- Hindi News
- धर्म कला संस्कृति
- Chaitra Amavasya 2026: चैत्र अमावस्या क्यों कही जाती है ‘भूतड़ी अमावस्या’, जानें इसके पीछे क्या है र...
Chaitra Amavasya 2026: चैत्र अमावस्या क्यों कही जाती है ‘भूतड़ी अमावस्या’, जानें इसके पीछे क्या है रहस्य?
Chaitra Amavasya 2026: सनातन धर्म में हर के माह के कृष्ण पक्ष में 15वें दिन अमावस्या की तिथि पड़ती है. इस तरह से साल में 12 अमावस्या पड़ती है. हर एक अमावस्या का अपना एक विशेष महत्व है. अमावस्या की तिथि पितरों को समर्पित की गई है. इस दिन पवित्र नदियों में स्नान-दान और पितरों का तर्पण व पिंडदान किया जाता है. मान्यता है कि अमावस्या के दिन तर्पण और पिंडदान करने से पितृ प्रसन्न होते हैं.
प्रसन्न होकर पिृत आशीर्वाद प्रदान करते हैं, जिससे घर में खुशहाली और समृद्धि बनी रहती है. चैत्र माह में पड़ने वाली अमावस्या को चैत्र अमावस्या कहा जाता है. ये अमावस्या बहुत विशेष मानी जाती है. इसको ‘भूतड़ी अमावस्या’ भी कहा जाता है. आइए जानते हैं कि इसको ‘भूतड़ी अमावस्या’ क्यों कहा जाता है. इसके पीछे का रहस्य क्या है?
चैत्र अमावस्या 2026 कब है? (Chaitra Amavasya 2026 Date)
पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 18 मार्च को सुबह 08 बजकर 25 मिनट पर शुरू हो जाएगी. वहीं, इसका समापन 19 मार्च को सुबह 06 बजकर 52 मिनट पर होगा. ऐसे में उदया तिथि के अनुसार, 19 मार्च को चैत्र माह की अमावस्या मनाई जाएगी और स्नान-दान किया जाएगा.
क्यों कहा जाता है ‘भूतड़ी अमावस्या’?
चैत्र मास की अमावस्या को लोक भाषा में ‘भूतड़ी अमावस्या’ कहा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन ब्रह्मांड में नकारात्मक शक्तियां या फिर कहें कि बुरी और अतृप्त आत्माओं का प्रभाव बढ़ जाता है. जिनसे बचने के लिए इस तिथि पर तमाम तरह की पूजा की जाती है. विद्वानों के अनुसार, ये दिन प्रमुख रूप से पितरों को याद करने का है. इसे ‘पितृ अमावस्या’ भी माना जाता है.
चैत्र अमावस्या की पूजा विधि (Chaitra Amavasya Puja Vidhi)
- चैत्र अमावस्या के दिन सुबह जल्दी उठकर किसी पवित्र नदी में स्नान करें.
- इसके बाद तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन और फूल डालकर सूर्य देव को जल चढ़ाएं.
- इस दिन पीपल की जड़ में जल चढ़ाएं. फिर शाम को सरसों के तेल का दीपक जलाएं.
- हाथ में काले तिल और जल लेकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों का तर्पण करें.
- अंत में किसी जरूरतमंद को क्षमता अनुसार दान दें.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. नेशनल जगत विज़न इसकी पुष्टि नहीं करता है.
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
