हाई ब्लड शुगर बढ़ा देता है हार्ट अटैक का खतरा, प्रीडायबिटीक स्टेज में कैसे रखें दिल की सेहत का ख्याल?

हाई ब्लड शुगर बढ़ा देता है हार्ट अटैक का खतरा, प्रीडायबिटीक स्टेज में कैसे रखें दिल की सेहत का ख्याल?

नई दिल्ली। सर्दी के दिनों में सेहत को लेकर दोतरफा जान चाहिए। इस स्टेज पर लापरवाही एक दो तरफा चुनौती होती है, पहला खानपान को लेकर अनुशासन बिगड़ जाता है और दूसरी शारीरक गतिविधियां कम हो जाती हैं। इससे ब्लड शुगर बढ़ने की आशंका रहती है। दीर्घ अवधि में इसका दुष्प्रभाव हृदय की सेहत पर पड़ता है। तले भुने भोजन, गाजर का हलवा और कार्ब्स का सेवन सीमित रखना चाहिए। अगर पहले से डायबिटीज है, तो ये गंभीर मुश्किलें पैदा कर सकती हैं। हमें समझना होगा कि हाई ब्लड सुगर हार्ट अटैक का बड़ा रिस्क फैक्टर है। 

प्रीडायबिटिक स्टेज में बरतें सतर्कता 
प्रीडायबिटिक यानी जिन लोगों का शुगर लेवल डायबिटीज के रेंज में नहीं है पर वह सामान्य से अधिक हो चुका है ऐसे लोग को तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए। इस स्टेज पर लापरवाही एक साथ कई मुसीबतें लेकर आती है। ऐसे में लोग अगर खानपान और शारीरिक सक्रियता को लेकर अभी से प्रयास शुरू कर दें, तो लंबे समय तक बीमारियों से दूर रहेंगे।

आमतौर पर, सर्दी से बचाव के लिए लोग गर्म भोजन को प्राथमिकता देने लगते हैं। वहीं, अधिक मीठे खाद्य पदार्थ और नान-वेन का सेवन बढ़ जाता है। ये आज आपको प्री-डायबिटिक स्टेज से आसानी से अनबिटीज के स्टेज में पहुंचा सकती हैं। एचबीएसी में एक प्रतिशत की वृद्धि से हार्टअटैक की आशंका में 10 प्रतिशत की वृद्धि होती है।

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स्वस्थ रहने की शुरुआत 
हार्ट अटैक का जोखिम कम करने का आसान तरीका यह है कि सही आहार का चयन करें और शारीरिक सक्रियता बढ़ाएं। कार्बोहाइड्रेट, मिठाई, अधिक वसा वाले भोजन से दूर रहें। घर में ही शारीरिक सक्रियता रखें। सही दिनचर्य से ही दिल की सेहत को सही रख पाएंगे।

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छह 'एस' का हमेशा रखें ध्यान 
स्मोकिंग (धूमपान)- धूमपान से बचना हृदय को स्वस्थ रखने का सबसे प्रभावी उपाय है। धूमपान से रक्त में आक्सीजन की कमी होती है और रक्तचाप बढ़ता है।
स्ट्रेस मैनेजमेंट (तनाव प्रबंधन)- तनाव में रहने से रक्तचाप और हृदय गति पर दबात बढ़ता है। योग प्राणायाम और सामाजिक जुड़ाव से तनाव को दूर कर सकते हैं। 
स्लीप (सही नींद)- पर्याप्त नींद लेने से कार्डियोवैस्कुलर हेल्थ सही रहती है। छह से आठ घंटे की नींद मोटापा, रक्तचाप व डायबिटीज की आशंका कम करती है।
सेडेंटरी लाइफ (शिथिलता पूर्ण जीवनशैली)- पर्याप्त शारीरिक सक्रियता नहीं होने से अनेक बीमारियों का जोखिम बढ़ता है। वहीं व्यायाम करने से मांसपेशियां मजबूत होती हैं और रक्तसंचार बेहतर होता है। 
शुगर (चीनी)- शुगर की अधिकता होने से मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज और हार्ट हेल्थ का जोखिम बढ़ता है। अतिरिक्त शुगर लेने से परहेज करना चाहिए। 
साल्ट (नमक)- भोजन में नमक की अधिकता से हाइपरटेंशन, हार्ट और किडनी जैसी बीमारियों का रिस्क बढ़ जाता है। 

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