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धान खरीदी में हो रही समस्याओं के निराकरण को लेकर जिला किसान कांग्रेस ने राज्यपाल के नाम पर कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

राष्ट्रीय जगत विजन। प्रदेश में धान खरीदी की समस्याओं के निराकरण और किसानों की 7 सूत्रीय मांगों को लेकर जिला किसान कांग्रेस बिलासपुर ने राज्यपाल के नाम पर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपी है। छत्तीसगढ़ प्रदेश किसान कांग्रेस इस ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन का ध्यान प्रदेश के अन्नदाताओं की अत्यंत चिंताजनक और ज्वलंत समस्याओं को संज्ञान में लाना है।
वर्तमान में राज्य में धान खरीदी की प्रक्रिया में व्याप्तः भारी अव्यवस्था, प्रशासनिक उदासीनता और सरकार की दोषपूर्ण नीतियों के कारण प्रदेश का किसान स्वयं को असहाय और ठगा हुआ महसूस कर रहा है। किसानों के व्यापक हित में सात सूत्रीय मांगो पर तत्काल संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार को उचित दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है।
क्या है सात सूत्रीय मांग ?
(1) खरीदी की अवधि में वृद्धीः धान खरीदी की प्रक्रिया अभी भी अपूर्ण है और बड़ी संख्या में किसान अपनी उपज बेचने से वंचित है। खरीदी की अंतिम तिथि 28 फरवरी 2026 तक बढ़ाने की मांग।
(2) धान का त्वरित उठावः सोसायटियों और केन्द्रों में धान का अंबार लगा हुआ है। धान की सुरक्षा और वजन में होने वाली क्षति को रोकने हेतु आगामी 4 दिनों के भीतर धान का उठाव अनिवार्य रूप से प्रारंभ कराया मांग।
(3) एकमुश्त भुगतान का वादाः- सरकार द्वारा "एकमुश्त भुगतान के नाम पर किसानों को भ्रमित किया जा रहा है। सभी किसानों को घोषित 3100 रूपये प्रति क्विंटल की दर से तत्काल एकमुश्त भुगतान सुनिश्चित किया जाने की मांग।
(4) लंबित टोकन का निराकरणः- जिन किसानों के टोकन अब तक लंबित है या काट दिए गए हैं. उन्हें आगामी 7 दिनों के भीतर प्राथमिकता से टोकन जारी कर उनके एक-एक दाने की खरीदी सुनिश्चित की जाने की मांग।
(5) वन पट्टा धारी किसानः- यन पट्टा धारक किसानों के लिए धान बेचने की प्रक्रिया में आ रही तकनीकी दिक्कतों को दूर कर तत्काल प्रभाव से सुचारू व्यवस्था की मांग।
(6) गिरदावरी विसंगतियां:- गिरदावरी रिपोर्ट के नाम पर रकबा कटौती और सत्यापन के बहाने किसानों की मानसिक उत्पीड़न तुरंत बंद करने की मांग।
(7) किसानों के स्वाभिमान की रक्षाः टोकन सत्यापन के बहाने प्रशासनिक अमले द्वारा किसानों की और जाकर धान की जांच करना उनके आत्मसम्मान पर गहरी चोट है। इस अपमानजनक प्रक्रिया को तत्काल की मांग की है।
वहीं शासन प्रशासन उनकी मांगो पर तत्काल कार्रवाई नहीं करता है, तो छत्तीसगढ़ प्रदेश किसान कांग्रेस लोकतांत्रिक तरीके से 28 जनवरी 2026 को पूरे प्रदेश में उग्र आनदोलन प्रदर्शन करने की बात कही है।
