जल संसाधन विभाग बना घोटालों का गढ़: बिना टेंडर और एग्रीमेंट के 24 घंटे में निकाल लिए 1.89 करोड़ रुपए
रायपुर.राजधानी के जल संसाधन विभाग में बिना टेंडर और अनुबंध के 1.89 करोड़ (1,89,38,720) रुपये का भुगतान करने का बड़ा मामला सामने आया है। पूरी राशि महज चौबीस घंटे के भीतर तीन अलग-अलग बिलों के जरिए निकाल ली गई। मामले में जल-मौसम विज्ञान संभाग क्रमांक-4, सिविल लाइन के कार्यपालन अभियंता (उपसंचालक) जयंत बिसेन और एमआईएस शाखा के अफसरों की भूमिका पर गंभीर आरोप लगे हैं।
यह पूरा वाकया विश्व बैंक की सहायता से चल रहे राष्ट्रीय जल विज्ञान परियोजना (2016-2025) के तहत बने रियल टाइम डाटा एक्वीजीशन सिस्टम (RTDAS) के संचालन और रखरखाव कार्य से संबंधित है। राज्य शासन के मंत्रालय (महानदी भवन) ने 30 मार्च 2026 को कार्य के लिए 5 करोड़ 24 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति दी थी। शर्त थी कि तकनीकी स्वीकृति के बाद ही टेंडर बुलाया जाए। साथ ही निविदा प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी रखने के निर्देश थे। लेकिन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने इन शर्तों को दरकिनार करते हुए बिना टेंडर निकाले और ठेकेदार से बिना कोई एग्रीमेंट किए करोड़ों रुपयों का भुगतान कर दिया।
कागजों में फर्जीवाड़े का आरोप
दस्तावेजों में प्रक्रिया को सही दिखाने के लिए समान ज्ञाप क्रमांक का दो अलग-अलग कार्यालयों के नाम पर इस्तेमाल किया गया। मुख्य अभियंता (महानदी गोदावरी बेसिन) रायपुर कार्यालय ने 523.94 लाख की जो तकनीकी स्वीकृति जारी की, उसमें अधीक्षण अभियंता, दुर्ग (शिवनाथ सर्कल) के ज्ञाप क्रमांक 1348 (दिनांक 16.04.2026) का हवाला दिया गया। जबकि यही क्रमांक अधीक्षण अभियंता, जल संसाधन एवं भू-जल सर्वेक्षण मण्डल, रायपुर के लिए भी उपयोग किया गया। दस्तावेजों में की गई इस हेराफेरी के जरिए अनियमितता को नियमानुकूल दर्शाने का प्रयास हुआ।
26 मई को पास हुए तीन बिल
ई-कोष के व्यय विवरण के मुताबिक, 26 मई 2026 को कार्यपालन अभियंता जयंत बिसेन ने एमआईएस शाखा के साथ मिलकर तीन बिल पास किए। इनमें पहला और दूसरा बिल क्रमशः 86,29,200 रुपये का था, जबकि तीसरा बिल 16,80,320 रुपये का पास हुआ। कुल 1,89,38,720 रुपये का यह भुगतान बिना किसी उच्च अधिकारी की अनुमति या अनुशंसा के, केवल ईई स्तर से ही कर दिया गया। किसी भी विशेष प्रकरण में उच्च कार्यालय से अनुमति ली जाती है, लेकिन यहां ऐसा कोई पत्राचार नहीं हुआ।
भण्डार क्रय नियमों की अनदेखी
यह पूरी कार्रवाई भण्डार क्रय नियम, 2002 (संशोधित 2020) का उल्लंघन है। नियम 4.3.3 के तहत 1,00,000 रुपये से अधिक के कार्य के लिए खुली निविदा बुलाना अनिवार्य होता है। साथ ही, नियम-12 कहता है कि लाख रुपये या उससे अधिक के अनुबंध की कॉपी महालेखाकार कार्यालय भेजना जरूरी है, जिससे लेखा परीक्षा हो सके। यहां 1.89 करोड़ की राशि बिना निविदा और अनुबंध बांट दी गई।
इस प्रकरण में पत्रकार राजेन्द्र माहेश्वरी ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) समेत 9 प्रमुख जगहों पर लिखित शिकायत भेजी है। पत्र में मांग की गई है कि पूरे वाकये की उच्च स्तरीय जांच हो, कार्यपालन अभियंता जयंत बिसेन को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए, और एमआईएस शाखा के दोषी कर्मचारियों पर विभागीय कार्रवाई करते हुए संपूर्ण राशि वसूल की जाए। साथ ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) के तहत अपराध दर्ज करने की भी मांग रखी गई है।
