मंत्री कार्यालय के सामने दलाल की दुकान: कृषि-ट्राइबल विभाग में चल रहा परसेंट का खेल
रायपुर। छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार के 1 साल ही पूरे हुए है और भ्रष्टाचार के गंभीर मामले सामने आने लगे है, जिसने ट्राइबल विभाग में हड़कंप मचा दिया है। आरोप है कि कृषि और ट्राइबल जैसे महत्वपूर्ण विभाग एक दलाल के हवाले कर दिए गए हैं, जिसने सीधे मंत्री कार्यालय के सामने अपनी दलाली की दुकान खोल ली है। दावा किया जा रहा है कि यह दलाल मंत्री को मोटी रकम देकर पूरे विभाग को ठेके पर ले चुका है । और अब हर काम परसेंट पर हो रहा है, जिससे किसान और आदिवासियों के हितों का हनन हो रहा है।
दलाल और आईएएस की जोड़ी कमा रही नोट
विभागीय सूत्रों के अनुसार, इस दलाली के खेल में एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी भी शामिल है जो दलाल के साथ गुरु की भूमिका में है और दलाल चेला बन मलाई काट रहा है। बताया जा रहा है कि आईएएस अधिकारी के दिशानिर्देश पर ही सारी योजनाएं बनाई जाती हैं। पूर्ववर्ती भूपेश बघेल सरकार में भी बीज निगम और महिला बाल विकास विभागों में इस आईएएस पर करोड़ों के हेरफेर के आरोप लगे थे। यह आईएएस राजधानी के कई अफसरों की काली कमाई को ठिकाने लगाने का काम भी करता है और महंगी गाड़ियों में घूमता देखा जाता है। वहीं दलाल चेला खुलेआम कहता है कि कृषि और ट्राइबल विभाग उसकी जेब में हैं। आलम यह है कि मंत्री खुद किसी काम या दस्तखत के लिए दलाल के ठिकाने पर जाते हैं।
किसानों-आदिवासियों के हित से खिलवाड़: भाजपा को भुगतना पड़ेगा खामियाजा
कृषि और ट्राइबल विभाग सीधे किसानों और आदिवासियों के हितों से जुड़े हैं। ऐसे महत्वपूर्ण विभागों को एक मारवाड़ी दलाल के हाथों सौंपना इन वर्गों के साथ सीधा खिलवाड़ है। 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की प्रचंड जीत में किसान और आदिवासियों का बड़ा योगदान था, लेकिन सत्ता में आने के बाद मंत्रियों का दलालों के हाथों खेलना आगामी नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों में भाजपा को भारी पड़ सकता है। आम जनता में इस बात को लेकर नाराजगी है कि जब मंत्री ही दलालों के इशारों पर काम करेंगे तो उनका हित कैसे होगा। लोग दबी जुबान में अपनी पीड़ा बता रहे हैं।
प्रशिक्षण के नाम पर करोड़ों का बंदरबांट: आंकड़े कर रहे खुलासा
किसानों के उन्नत फसल और संरक्षण के लिए सरकार करोड़ों का बजट आवंटित करती है, लेकिन यह पैसा प्रशिक्षण के नाम पर बंदरबांट किया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में संचालक कृषि विभाग को लगभग 40 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली है, जिसे किसानों को प्रशिक्षण देने के नाम पर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ाया जा रहा है। इसी तरह, ट्राइबल आदिम जाति विभाग में गैर-कार्यालयीन फर्नीचर और कपड़े बिस्तर के लिए 19 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली है, जिसमें दलाल और मंत्री ने पहले ही अपना हिस्सा फिक्स कर लिया है। यदि परसेंट के बाद राशि बची तो काम होगा, अन्यथा पूरी राशि डकारने की जुगत दलाल लगे है।
आंकड़ों में देखिए, कहां कितनी बंदरबांट की तैयारी:
1000 किसानों के प्रशिक्षण: 1 करोड़ 35 लाख रुपये
जैविक प्रमाणीकरण हेतु सहायक अनुदान: 69 लाख रुपये
कृषकों को आर्थिक सहायता फसल प्रदर्शन हेतु: 15 करोड़ 50 लाख रुपये
जैविक खाद उत्पादन हेतु: 1 करोड़ रुपये
कृषक मेला आयोजन हेतु: 70 लाख रुपये
विभिन्न व्यक्तियों के प्रशिक्षण हेतु: 1 करोड़ 35 लाख रुपये
फसलों के प्रदर्शन के लिए: 15 करोड़ 50 लाख रुपये
प्रचार प्रसार के लिए: 1 करोड़ 64 लाख रुपये
कुल मिलाकर, कृषि और ट्राइबल विभाग में करोड़ों के बजट को ठिकाने लगाने की सुनियोजित साजिश रची गई है। इससे मंत्री के दलाल और मंत्री पर तो लक्ष्मी की कृपा बरसेगी, लेकिन किसान और आदिवासी केवल देखते रह जाएंगे। इस पूरे मामले को लेकर विभाग में हड़कंप तो है, लेकिन मुख्यमंत्री ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है। 40 प्रतिशत की वसूली से लोग अचंभित हैं और दबी जुबान में अपनी वेदनाएं बता रहे हैं। व्यापारी भी भाजपा के मंत्रियों की इस लूटपाट' से त्रस्त हैं। सवाल यह है कि क्या भाजपा ऐसे दलालों से अपनी सरकार को बचा पाएगी?
