स्कूलों की बिल्डिंग का हिसाब नहीं दे पाए डीईओ, अक्टूबर का वेतन रोकने की मिली चेतावनी
बिलासपुर : प्रदेश के सरकारी स्कूलों की बदहाल और अधूरी इमारतों का हिसाब मांगने पर जिला शिक्षा अधिकारियों की लापरवाही सामने आई है। लोक शिक्षण संचालनालय ने स्कूलों की बिल्डिंग से जुड़ी जरूरी जानकारी समय पर उपलब्ध नहीं कराने पर बलौदाबाजार और बलरामपुर को छोड़कर प्रदेश के बाकी जिलों के डीईओ को नोटिस जारी कर दिया है। संचालनालय ने इसे सरकारी काम के प्रति गंभीरता की कमी मानते हुए अब सख्त रुख अपनाया है। डीईओ को तीन दिन के भीतर जवाब और मांगी गई जानकारी भेजने के निर्देश दिए गए हैं। जवाब नहीं देने या संतोषजनक जवाब न मिलने पर अक्टूबर का वेतन रोकने की कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
एक सप्ताह की समय-सीमा, फिर भी नहीं पहुंची जानकारी
लोक शिक्षण संचालनालय ने 7 सितंबर को सभी जिलों के जिला शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी कर स्कूलों की भवन स्थिति की जानकारी मांगी थी। इसमें विशेष रूप से ऐसे स्कूलों का विवरण मांगा गया था, जिनके पास स्वयं की बिल्डिंग नहीं है अथवा जिनकी इमारत मरम्मत की जरूरत में है। संचालनालय ने जानकारी जुटाकर भेजने के लिए एक सप्ताह का समय दिया था। लेकिन निर्धारित समय बीतने के बाद भी बलौदाबाजार और बलरामपुर को छोड़कर किसी अन्य जिले से अपेक्षित जानकारी नहीं पहुंची। स्कूल भवनों की स्थिति से जुड़ी जानकारी को महत्वपूर्ण मानते हुए संचालनालय ने अब इसे गंभीरता से लिया है।
देरी का कारण बताओ नोटिस हुआ जारी

लोक शिक्षण संचालनालय की ओर से 29 सितंबर को जारी नोटिस में कहा गया है कि स्कूलों की बिल्डिंग से संबंधित जानकारी शासन स्तर पर आवश्यक है। इसके बावजूद तय समय में जानकारी उपलब्ध नहीं कराना सरकारी कार्य के प्रति लापरवाही के रूप में देखा गया है। नोटिस में संबंधित डीईओ से देरी का कारण बताते हुए जवाब मांगा गया है और साथ ही लंबित जानकारी तत्काल भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
तीन दिन में नहीं दिया जवाब, तो वेतन पर कार्रवाई तय
अब सभी संबंधित जिला शिक्षा अधिकारियों को तीन दिन के भीतर अपना स्पष्टीकरण और स्कूल भवनों से जुड़ी पूरी जानकारी संचालनालय को उपलब्ध करानी होगी। संचालनालय ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय में जवाब नहीं देने अथवा जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने की स्थिति में संबंधित डीईओ के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसी कार्रवाई के तहत अक्टूबर माह का वेतन रोकने का प्रस्ताव रखा गया है। स्कूलों की भवन व्यवस्था जैसी बुनियादी जरूरत से जुड़ी जानकारी में हुई देरी के बाद संचालनालय के इस सख्त रुख से शिक्षा विभाग में हलचल बढ़ गई है।
