हे भगवान, ये क्या लाशों पर कमाई का खेल ,मुक्तांजलि एंबुलेंस योजना बनी लुट का जरिया।

हे भगवान, ये क्या लाशों पर कमाई का खेल ,मुक्तांजलि एंबुलेंस योजना बनी लुट का जरिया।

रायपुर। छत्तीसगढ़ में गरीब मरीजों मौत और लाशें भी कमाई का जरिया बन गई है। मुक्तांजलि 1099 एंबुलेंस योजना में करोड़ों का महाघोटाला सामने आया है, जहां बाबू से लेकर बड़े अधिकारी तक फर्जी बिलिंग कर सरकार को चूना लगाने में लगे है।

 चौंकाने वाली बात ये है कि ACB और EOW में शिकायत के बावजूद बड़े अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही, जिससे साफ लग रहा है कि बड़े मगरमच्छों को बचाया जा रहा है।

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हाल ही में चिकित्सा शिक्षा विभाग के बाबू चवाराम बंजारे को ACB ने 50 हजार की रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़ा। बंजारे एक बुजुर्ग का पेंशन प्रकरण निपटाने के लिए 7 महीने से उन्हें परेशान कर रहा था। लेकिन ये तो छोटी मछली है। असली खेल तो मुक्तांजलि एंबुलेंस योजना में चल रहा है, जहां गरीब मरीजों की मौत के बाद उनकी लाशों को भी मुनाफे का सौदा बना लिया गया है।

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कागजों में हत्या, सरकार को करोड़ों का चूना

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भ्रष्टाचार में इतने अंधे हो चुके हैं कि वे कागजों में लोगों की हत्या कर रहे हैं। फर्जी नाम, पते और फोन नंबरों से बिल बनाकर हर महीने सरकार के खजाने से करोड़ों रुपए लूटे जा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो 50% से ज्यादा बिल फर्जी होते हैं। ये पढ़कर रोंगटे खड़े हो जाते हैं कि कैसे एक कल्याणकारी योजना भ्रष्टाचार का अड्डा बन गई है।

नोडल अधिकारी पर गंभीर आरोप, फिर भी मौन सरकार

इस पूरे घोटाले में योजना के राज्य नोडल अधिकारी डॉ. कमलेश जैन पर गंभीर आरोप लगे हैं। उन पर एंबुलेंस एजेंसी के साथ मिलकर करोड़ों के भ्रष्टाचार का आरोप है। हैरानी की बात यह है कि डॉ. जैन स्वास्थ्य सेवाएं विभाग के कर्मचारी भी नहीं हैं। वे रायपुर मेडिकल कॉलेज में संविदा पर सह प्राध्यापक हैं और किसी भी संविदा कर्मचारी को दूसरे विभाग में प्रतिनियुक्ति नहीं दी जा सकती। बावजूद इसके उन्हें महत्वपूर्ण पद पर बिठाया गया है। विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल जैसे संगठनों ने मुख्यमंत्री से लेकर ACB और EOW तक लिखित शिकायत की है, लेकिन स्वास्थ्य संचालक प्रियंका शुक्ला की चुप्पी भी संदेह पैदा कर रही है। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल भी कार्रवाई की बात कहकर टाल रहे हैं।

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ऐसा लगता है कि इस बड़े घोटाले पर पर्दा डालने की पूरी कोशिश की जा रही है। सवाल ये है कि सुशासन की सरकार में स्वास्थ्य विभाग केवल लूटपाट का अड्डा क्यों बना हुआ है? 

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