ईओडब्ल्यू डीजी को शिकायत: पूर्व सीएम शिवराज व उनके परिवार की कंपनियों, व्यापमं और दिलीप बिल्डकॉन की जांच की मांग
भोपाल।मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को लेकर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) में एक शिकायत की गई गई है। यह पत्र रिटायर्ड आईएफएस अफसर आजाद सिंह डबास ने सौंपा है। डबास वर्तमान में सिस्टम परिवर्तन अभियान के अध्यक्ष हैं। उन्होंने ईओडब्ल्यू के महानिदेशक (DG) को दिए अपने पत्र में पूर्व सीएम के परिजनों के नाम पर बनी कंपनियों और जमीनों की जांच कराने की बात रखी है।
डबास ने अपनी शिकायत में मुख्य रूप से तीन बातों को शामिल किया है, जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री के बेटों की कंपनियां, व्यापमं और दिलीप सूर्यवंशी की कंपनी दिलीप बिल्डकॉन का नाम शामिल है।

पूर्व मुख्यमंत्री के बेटों के नाम पर बनी फर्मों की जांच की मांग
ईओडब्ल्यू डीजी को सौंपे गए पत्र में वर्ष 2021 के बाद बनी कुछ फर्मों का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता आजाद सिंह डबास का कहना है कि 2021 के बाद पूर्व मुख्यमंत्री के बेटों के नाम से कई फर्म बनाई गई हैं। इन व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में उनके दोनों बेटे बतौर डायरेक्टर शामिल हैं। पूर्व अधिकारी ने अपने आवेदन में मांग रखी है कि इन सभी फर्मों के कामकाज और इनमें हुए लेनदेन की ईओडब्ल्यू द्वारा पारदर्शी तरीके से जांच की जाए। उन्होंने जमीनों और कंपनियों के इन सभी प्रकरणों में निष्पक्ष कार्रवाई का अनुरोध किया है।
व्यापमं मामले का हैं जिक्र
इस शिकायत में वर्ष 2013 के व्यापमं मामलों को भी शिकायतकर्ता द्वारा उठाया गया है। रिटायर्ड आईएफएस ने अपनी बात रखते हुए पत्र में बताया है कि 2013 में जब व्यापमं का मामला पहली बार सामने आया था, तब विद्यार्थियों की एक पूरी पीढ़ी का करियर बर्बाद हो गया था। इसे लेकर भी उन्होंने विस्तृत जांच की अपेक्षा जताई है।
दिलीप बिल्डकॉन के टर्नओवर पर दावे
आवेदन में एक अन्य बिंदु दिलीप सूर्यवंशी की कंपनी दिलीप बिल्डकॉन के विषय में है। डबास के आरोप अनुसार, 30 नवंबर 2005 को शिवराज सिंह चौहान के मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद इस कंपनी के स्वरूप में बदलाव आया। शिकायत में उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2006 में दिलीप बिल्डर्स की प्रोप्राइटरशिप फर्म को प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बना दिया गया। इसके ठीक एक साल बाद इसे पब्लिक लिमिटेड कंपनी में परिवर्तित कर दिया गया।
पूर्व आईएफएस ने कंपनी के कारोबार को लेकर भी अपने दावे पेश किए हैं। उनका दावा है कि जो कंपनी कभी 2 से 5 करोड़ रुपये का कारोबार करती थी, उसका टर्नओवर आज लगभग 10 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। डबास ने ईओडब्ल्यू से इस पूरी वृद्धि और इस कंपनी से संबंधित सभी मामलों की भी बारीकी से जांच करने का आग्रह किया है।
