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नक्सलियों की गोली ने फिर बुझा दी उम्मीद की लौ, बीजापुर में शिक्षादूत की हत्या
बीजापुर : छत्तीसगढ़ के बीजापुर की धरती एक बार फिर खून से लाल हो गई और इस बार निशाना बना वो हाथ, जो बच्चों को किताब पकड़ना सिखा रहे थे। गंगालूर क्षेत्र के नेन्द्रा गांव में पदस्थ शिक्षादूत कल्लू ताती की नक्सलियों ने नृशंस हत्या कर दी। तोड़का गांव का रहने वाला कल्लू ताती हर रोज की तरह स्कूल से लौट रहा था, लेकिन उसे क्या पता था कि यह उसकी आख़िरी शाम होगी। रास्ते में नक्सलियों ने उसे अगवा कर लिया और फिर जंगलों में ले जाकर रात के अंधेरे में उसका जीवन छीन लिया। ना कोई अदालत, ना कोई सुनवाई, सिर्फ एक ही जुर्म कि वो बच्चों को रोशनी की तरफ ले जाने की कोशिश कर रहा था।
ग्रामीणों के मुताबिक, नक्सलियों ने पहले उन्हें धमकाया और फिर उनके समर्पण से इनकार करने पर हत्या कर दी। कल्लू, उन शिक्षादूतों में शामिल थे, जिन्होंने बंद स्कूलों को दोबारा शुरू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। छत्तीसगढ़ में स्कूलों के पुनः संचालन की पहल के बाद से अब तक कुल 9 शिक्षादूतों की हत्या हो चुकी है। इनमें से 5 बीजापुर जिले और 4 सुकमा जिले में मारे गए हैं। हर बार एक ही पैटर्न स्कूल से लौटते वक्त अपहरण, फिर जंगलों में मौत।
यह सिलसिला शिक्षा को गांव-गांव पहुंचाने की कोशिशों पर एक खौफनाक सवाल खड़ा करता है। क्या अब कोई शिक्षक इन दूरदराज़ इलाकों में सेवा देने की हिम्मत जुटा पाएगा? लगातार हो रही इन हत्याओं ने प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठा दिए हैं। क्यों नहीं मिल रही शिक्षकों को सुरक्षा? क्या नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों का कोई असर हो रहा है? और सबसे अहम, क्या अब शिक्षा को भी संघर्ष का मैदान बना दिया गया है? कल्लू ताती सिर्फ एक शिक्षक नहीं थे, वो एक उम्मीद थे, उन बच्चों के लिए जो पहली बार किताबें पकड़ रहे थे। वो एक सपना थे, उस गाँव के लिए जो दशकों से बंद स्कूल के ताले खुलते देख रहा था।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
