कर्मचारियों के नाम पर 172 करोड़ की हेराफेरी: पूर्व आबकारी एमडी त्रिपाठी गिरफ्तार, 20 जुलाई तक रिमांड पर; रामगोपाल अग्रवाल से होगी पूछताछ

कर्मचारियों के नाम पर 172 करोड़ की हेराफेरी: पूर्व आबकारी एमडी त्रिपाठी गिरफ्तार, 20 जुलाई तक रिमांड पर; रामगोपाल अग्रवाल से होगी पूछताछ

रायपुर | छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (CSMCL) में हुए 172 करोड़ रुपए के ओवरटाइम भुगतान घोटाले में ईओडब्ल्यू ने शनिवार को पूर्व विशेष सचिव आबकारी और तत्कालीन एमडी अरुणपति त्रिपाठी को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद त्रिपाठी को विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां से अदालत ने उन्हें 20 जुलाई तक रिमांड पर भेज दिया है। जांच एजेंसी ईओडब्ल्यू अब इस रिमांड अवधि में त्रिपाठी और कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल से आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करेगी।

इस घोटाले में जांच एजेंसी ने दावा किया है कि हेराफेरी की गई 172 करोड़ की रकम में से 137 करोड़ रुपए अकेले त्रिपाठी तक पहुंचे। इस पूरे मामले में ईओडब्ल्यू की ओर से यह 13वीं गिरफ्तारी है। इसके अलावा, जांच एजेंसी त्रिपाठी की पत्नी की कंपनी की भी बारीकी से पड़ताल कर रही है। यह देखा जा रहा है कि उस कंपनी के जरिए किस तरह के लेन-देन किए गए।

3000 कर्मचारियों के नाम का हुआ इस्तेमाल

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इस घोटाले का तरीका ऐसा था कि सरकारी खजाने से रकम निकालने के लिए कर्मचारियों का सहारा लिया गया। वित्तीय वर्ष 2019-20 से लेकर 2023-24 के बीच ओवरटाइम, बोनस, हॉलिडे और सर्विस चार्ज के नाम पर 172 करोड़ रुपए से अधिक की राशि का भुगतान किया गया। ईओडब्ल्यू के अनुसार, यह रकम लगभग 3000 कर्मचारियों के नाम पर निकाली गई थी। लेकिन वास्तव में, इन कर्मचारियों को कोई भुगतान नहीं मिला। आरोप है कि निकाली गई राशि में से 137 करोड़ रुपए त्रिपाठी ने रख लिए और बाकी की राशि उन कंपनियों के पास रही जो मैनपावर सप्लाई करती थीं।

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कैसे शुरू हुआ यह ओवरटाइम का खेल

छत्तीसगढ़ में 3200 करोड़ रुपए का आबकारी घोटाला हुआ था, जिसमें एक बड़े सिंडिकेट ने काम किया। आईटीएस अधिकारी अरुणपति त्रिपाठी उस समय आबकारी विभाग में प्रतिनियुक्ति पर आए थे और सीएसएमसीएल के एमडी तथा विशेष सचिव का पद संभाल रहे थे। जांच एजेंसी के अनुसार, शराब कारोबार में डेमरेज चार्ज को लेकर जब विरोध होने लगा, तो सिंडिकेट ने पैसे निकालने का दूसरा रास्ता खोजा।

इसी रास्ते के तहत सीएसएमसीएल के कर्मचारियों के नाम पर फर्जी बिल बनाए गए। रिकॉर्ड में यह दिखाया गया कि कर्मचारी अतिरिक्त समय (ओवरटाइम) काम कर रहे हैं, त्योहारों पर भी काम कर रहे हैं (हॉलिडे चार्ज) और उन्हें इसके लिए बोनस दिया जाना चाहिए। इसी बहाने से 172 करोड़ रुपए सरकारी सिस्टम से बाहर कर लिए गए।

इस बड़े आबकारी मामले में लगातार जांच चल रही है। ईओडब्ल्यू एक-एक कर उन सभी लोगों को गिरफ्तार कर रही है जिनकी भूमिका इस वित्तीय हेराफेरी में पाई जा रही है। रामगोपाल अग्रवाल के साथ होने वाली पूछताछ में और भी कई तथ्य सामने आने की उम्मीद है। जांच टीम इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि त्रिपाठी तक जो 137 करोड़ रुपए पहुंचे, उन्हें आगे कहां निवेश किया गया। आने वाले दिनों में जांच एजेंसी कुछ और लोगों को भी पूछताछ के लिए बुला सकती है। त्रिपाठी की पत्नी की कंपनी के खातों का ऑडिट भी इसी जांच का हिस्सा है, जिससे वित्तीय अनियमितताओं का पूरा ब्यौरा खोला जा सके।

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