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शराब घोटाला: 29 आबकारी अफसरों पर शिकंजा, सरकार ने दी केस चलाने की मंजूरी; अब जेल जाना तय
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में शामिल 29 आबकारी अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। राज्य सरकार ने इन सभी अफसरों के खिलाफ मुकदमा चलाने (अभियोजन) की आधिकारिक मंजूरी दे दी है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) को भेजी गई इस हरी झंडी के बाद अब इन अधिकारियों की गिरफ्तारी और जेल जाना लगभग तय माना जा रहा है।
पिछले एक महीने से मंत्रालय में रुकी इस फाइल को विभागीय मंत्री के कड़े रुख के बाद मंजूरी मिली है। इससे पहले ED ने घोटाले की जांच के दौरान इन अधिकारियों की भूमिका को संदिग्ध पाया था।
मंत्रालय में दबी थी फाइल, मंत्री के दखल से बढ़ा मामला
शराब घोटाले की जांच कर रही ED ने अपनी चार्जशीट में 33 अधिकारियों को आरोपी बनाया था। इनमें से तत्कालीन आयुक्त निरंजन दास, एमडी अरुणपति त्रिपाठी और अनिल टुटेजा जैसे बड़े नाम पहले ही सलाखों के पीछे पहुंच चुके हैं। मैनपावर घोटाले में सहायक आयुक्त नवीन प्रताप सिंह भी जेल में हैं।
बाकी बचे 29 अधिकारियों की फाइल लंबे समय से मंत्रालय में धूल फांक रही थी। चर्चा है कि शासन स्तर पर कुछ लोग इन्हें बचाने की कोशिश में थे, लेकिन फाइल मंत्री के पास पहुंचते ही स्थिति बदल गई। मंत्री के हस्तक्षेप के बाद फाइल पर हस्ताक्षर हुए और इसे वापस ED को सौंप दिया गया।
अफसरों ने खुद कबूला था- 'हमें मिलता था हर महीने पैसा'
ED की पूछताछ में इन 29 अधिकारियों ने स्वीकार किया था कि शराब सिंडिकेट से उन्हें हर महीने बंधी-बंधाई रकम (कमीशन) मिलती थी। यह पैसा अवैध शराब की बिक्री और ओवररेटिंग को नजरअंदाज करने के बदले दिया जाता था। चार्जशीट के मुताबिक, जिला स्तर से लेकर मुख्यालय तक भ्रष्टाचार का यह नेटवर्क फैला हुआ था।
इन अधिकारियों पर गिरेगी गाज
ED की चार्जशीट में शामिल जिन अफसरों पर अब कार्रवाई होगी, उनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
नवीन प्रताप सिंह, गंभीर सिंह, नोहर सिंह ठाकुर, नीतू नोतानी, अरविंद पटले, प्रकाश पाल, अनंत कुमार सिंह, अश्वनी कुमार अनंत, अनिमेष नेताम, मंजूश्री केसर, जनार्दन सिंह कौरब, प्रमोद कुमार नेताम, देवलाल वैद्य, दिनकर वासनिक, वेदराम लहरे, इकबाल अहमद खान, मोहित जायसवाल, नितिन खंडूजा, जीतूराम मंडावी, अलेख राम सिदार, लखन लाल ध्रुव, आशीष कोसम, गरीबपाल सिंह, विजय सेन शर्मा, विकास गोस्वामी, सौरभ बक्शी, राजेश जायसवाल, सोनल नेताम और रामकृष्ण मिश्रा।
आगे क्या होगा?
अभियोजन की मंजूरी मिलने के बाद अब ED इन अधिकारियों को पूछताछ के लिए समन भेज सकती है या सीधे गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश कर सकती है। आबकारी महकमे में इस फैसले के बाद से हड़कंप मचा हुआ है।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
