CBI की जांच या अफसरों को बचाने का खेल? 21 आरोपियों की लिस्ट में प्रोटेक्शन मनी लेने वाले एक भी पुलिस वाले का नाम नहीं!

CBI की जांच या अफसरों को बचाने का खेल? 21 आरोपियों की लिस्ट में प्रोटेक्शन मनी लेने वाले एक भी पुलिस वाले का नाम नहीं!

रायपुर | महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले में अब तक का सबसे बड़ा खुलासा हुआ है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में छत्तीसगढ़ पुलिस के स्टेट इंटेलिजेंस ब्यूरो (SIB) के ASI चंद्रभूषण वर्मा ने सफेदपोशों के चेहरे पर नकाब हटा दिए है। । प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत दर्ज अपने बयानों में ASI ने है बताया है कि वह महादेव ऐप के प्रमोटर्स के लिए हवाला के जरिए राज्य के बड़े पुलिस अफसरों, नौकरशाहों और राजनीतिक रसूखदारों तक प्रोटेक्शन मनी पहुंचाने का काम करता था।

 CBI की जांच पर उठ रहे सवाल: आखिर क्यों बचाए गए बड़े नाम?

इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि करीब डेढ़ साल की लंबी जांच के बाद CBI ने दिसंबर 2024 को चार्जशीट तो पेश की, लेकिन उसमें उन बड़े अधिकारियों के नाम ही गायब हैं, जिनके ठिकानों पर छापे पड़े थे। CBI ने आईजी, डीआईजी, एसपी, एएसपी से लेकर टीआई रैंक तक के अफसरों से कैंप और दिल्ली बुलाकर पूछताछ की थी। इसके बावजूद, 21 लोगों की चार्जशीट में सिर्फ उन्हीं को आरोपी बनाया गया, जिन्हें ED और अन्य एजेंसियां पहले ही नामजद कर चुकी थीं। बड़े चेहरों को बचाने से अब जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली पर ही गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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 छापे से पहले ही सिंडिकेट को मिल जाती थी भनक!

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जांच एजेंसियों के कार्रवाई से पहले ही सटोरियों को पुलिस ही अलर्ट कर रही थी। जुलाई 2023 में ED और इनकम टैक्स के छापों की खुफिया जानकारी सिंडिकेट को पहले ही लग गई थी। ASI वर्मा ने बताया कि अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) उसे फेसटाइम कॉल पर अलर्ट करते थे। वीआईपी रोड के बड़े होटलों (VW Canyon, Babylon Capital आदि) में केंद्रीय एजेंसियों के ठहरने की जासूसी पुलिस के ही जवान (प्रधान आरक्षक संदीप दीक्षित और राधाकांत पांडे) कर रहे थे। जानकारी मिलने के बाद ASI अपने आईफोन से सतीश चंद्राकर, पूर्व IAS अनिल टुटेजा के चपरासी और अन्य करीबियों को व्हाट्सएप के जरिए अलर्ट भेज देता था। ASI वर्मा ने ED को यह भी बताया कि ऐप के प्रमोटर रवि उप्पल का सीधा संपर्क तत्कालीन मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार विनोद वर्मा से था। पूछताछ में बताया गया कि विनोद वर्मा के निर्देश पर ही 8-10 किश्तों में करीब 5 करोड़ रुपये रायपुर सदर बाजार के हवाला कारोबारी अनिल दमानी से लिए गए। यह मोटी रकम रायपुर के कोटा स्थित विवेकानंद विद्या पीठ (जिसका संचालन विनोद वर्मा करते हैं) में उनके एक सहयोगी को सौंपी गई। हवाला का यह नेटवर्क नागपुर से भी जुड़ा हुआ था।

प्रोटेक्शन मनी' का हर महीने का फिक्स रेट कार्ड

नवंबर 2021 से जून 2023 के बीच बांटी गई रिश्वत का जो हिसाब ASI ने रवि उप्पल और उसके गुर्गों के हवाले से दिया, वह चौंकाने वाला है:

  •  ASP, रायपुर ₹35 लाख प्रतिमाह (पुलिस जवानों के जरिए)।
  •  ASP, दुर्ग ₹20 लाख प्रतिमाह।
  •  IG और SP रैंक (रायपुर और दुर्ग):** ₹10 से ₹25 लाख प्रतिमाह। और अन्य 
  •  तत्कालीन सीएम के OSD आशीष वर्मा, मनीष बंछोर और रियल एस्टेट कारोबारी विजय भाटिया जैसे लोग भी इस सिंडिकेट का हिस्सा बताए गए।

 

वर्मा का DMF में 10% कमीशन सहित बेनामी संपत्तियां.....

ASI वर्मा जिसकी पत्नी भी पुलिस में है, उसने अपने परिवार के नाम पर 'श्रीजन एसोसिएट्स' और श्रीजन ट्रेडिंग कंपनी' जैसी कई फर्मों का जाल बिछा रखा था। संतोषी नगर और शंकर नगर जैसे इलाकों में करोड़ों की संपत्तियां इन्ही पैसों से अर्जित करने का शक है।

एएसआई ने जिला खनिज न्यास (DMF) में भी कमीशन के बड़े खेल का जिक्र किया। दावा किया गया कि तत्कालीन उप सचिव सौम्या चौरसिया और जिला कलेक्टरों को 10-10% तथा कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी के रिश्तेदार बताए गए अंकित चक्रवर्ती को 2-3% कमीशन मिलता था। महादेव ऐप की काली कमाई से अफसरों के लिए फ्लैट और प्रमोटर्स की बेनामी संपत्तियां खरीदी गईं।

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