शादी के नाम पर ‘डिजिटल जाल’: रायगढ़ में फर्जी मैट्रिमोनियल साइट से 7693 लोगों से ऐंठे 1.11 करोड़, 26 गिरफ्तार, कॉल सेंटर से चल रहा था खेल
रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में एक बड़े साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश हुआ है, जिसने फर्जी मैट्रिमोनियल प्लेटफॉर्म के जरिए देशभर के 7,693 लोगों से करीब 1.11 करोड़ की ठगी की। रायगढ़ के कोतवाली थाना क्षेत्र में संचालित इस गिरोह ने लोक सेवा केंद्र की आड़ में अपना जाल फैलाया हुआ था। पुलिस ने मामले में दो मुख्य संचालकों समेत कुल 26 आरोपियों को गिरफ्तार कर एक संगठित ठगी नेटवर्क का खुलासा किया है।
जांच में सामने आया कि आरोपी यूट्यूब चैनलों, फर्जी प्रोफाइल और कॉल सेंटर के जरिए लोगों को शादी के नाम पर फंसाते थे। पहले रजिस्ट्रेशन फीस, फिर मीटिंग फीस और अन्य बहानों से यूपीआई के माध्यम से पैसे वसूले जाते थे, लेकिन पीड़ितों को न तो कोई वास्तविक प्रोफाइल दिखाई जाती थी और न ही मुलाकात की व्यवस्था होती थी। इस पूरे ऑपरेशन को बेहद पेशेवर तरीके से चलाया जा रहा था, जिससे लोग आसानी से इनके झांसे में आ जाते थे।
पुलिस छापेमारी में खुलासा हुआ कि दरोगा पारा इलाके में ‘निधि परिवहन सुविधा केंद्र’ के नाम से चल रहे संस्थान के भीतर अलग-अलग कमरों में फर्जी दस्तावेज तैयार किए जाते थे। यहां वीडियो एडिटिंग सेटअप और कॉल सेंटर भी संचालित था, जहां युवतियों के जरिए ग्राहकों से संपर्क कर उन्हें भरोसे में लिया जाता था। आरोपियों के पास से लैपटॉप, मोबाइल, प्रिंटर, फर्जी सील-मुहर और कई डिजिटल सबूत बरामद हुए हैं, जो बड़े स्तर पर साइबर फ्रॉड की पुष्टि करते हैं।
मुख्य आरोपी कपिल गर्ग और हिमांशु मेहर पहले वैध सेवाओं से जुड़े थे, लेकिन बाद में उन्होंने इस फर्जी नेटवर्क को खड़ा कर अवैध कमाई का जरिया बना लिया। पुलिस के अनुसार, वर्ष 2022 से सक्रिय इस गिरोह ने करोड़ों की ठगी को अंजाम दिया। सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है, जबकि जांच एजेंसियां इस नेटवर्क के अन्य कनेक्शन खंगालने में जुटी हैं।
