जल संसाधन विभाग में हजारों करोड़ का टेंडर घोटाला अयोग्य कंपनियों को ठेका देने चीफ सेक्रेटरी को किया गुमराह

जल संसाधन विभाग में हजारों करोड़ का टेंडर घोटाला अयोग्य कंपनियों को ठेका देने चीफ सेक्रेटरी को किया गुमराह

रायपुर। छत्तीसगढ़ के जल संसाधन विभाग में हजारों करोड़ रुपये के टेंडर में बड़ी गड़बड़ी की जा रही है। विभाग की सचिव तीन ऐसी कंपनियों को टेंडर देने की तैयारी कर रही हैं जो सरकारी मापदंडों को पूरा नहीं करती हैं। इन कंपनियों के पास सरकार की तरफ से तय प्रशासकीय और वित्तीय दस्तावेज तक नहीं हैं। इसके बावजूद सचिव इन अयोग्य कंपनियों को योग्य बताकर ठेका देने की कोशिश में लगी हुई हैं।

नियमों में किया गया मनमाना बदलाव

जानकारी के अनुसार जल संसाधन विभाग की सचिव ने सरकार और चीफ सेक्रेटरी को गलत जानकारी दी है। उच्च अधिकारियों को गुमराह करके टेंडर के नियमों और शर्तों में बदलाव करवा दिया गया है ताकि इन तीनों कंपनियों को फायदा पहुंचाया जा सके। 27 जुलाई 2026 को वित्तीय बोलियां खोली गईं और इन कंपनियों को सबसे कम बोली लगाने वाला बताकर टेंडर देने का रास्ता साफ कर लिया गया।

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इन तीन बड़े प्रोजेक्ट में हो रहा खेल

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जिन तीन प्रोजेक्ट के टेंडर में यह पूरी प्रक्रिया अपनाई गई है उनका कुल बजट हजारों करोड़ रुपये का है।

पहला काम महानदी पर बनने वाली मोहमेला सिरपुर बैराज परियोजना और पाइप सिंचाई नेटवर्क का है। रायपुर जिले के आरंग तहसील में होने वाले इस काम के लिए ओम मेटल्स इंफ्राप्रोजेक्ट्स लिमिटेड को चुना गया है। इस कंपनी ने पांच सौ अड़सठ करोड़ रुपये से ज्यादा की बोली लगाई है।

दूसरा बड़ा प्रोजेक्ट पैरी परियोजना के तहत सिकासर से कोदार जलाशय तक लिंक नहर और पाइपलाइन बनाने का है। इस योजना के तहत सिकासर से बत्तीस हजार क्यूसेक पानी कोदार डैम में लाया जाना है। इस भारी भरकम काम के लिए दिलीप बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड को आगे किया गया है जिसने दो हजार पांच सौ चौबीस करोड़ रुपये की बोली दी है।

तीसरा टेंडर मातनार बहुउद्देशीय लिफ्ट सिंचाई बैराज और देउरगांव बैराज लिफ्ट सिंचाई परियोजना का है। इसके लिए एनसीसी लिमिटेड को एक हजार छह सौ तैंतीस करोड़ रुपये के टेंडर में पहला स्थान दिया गया है।

दस्तावेजों की जांच की उठ रही मांग

इन सभी प्रोजेक्ट में निर्माण के साथ अगले कई सालों तक संचालन और रखरखाव का काम भी शामिल है। सरकारी मापदंड कहते हैं कि इतनी बड़ी जिम्मेदारी सिर्फ उन कंपनियों को मिलनी चाहिए जो हर तरह से योग्य हों। लेकिन यहां नियमों को दरकिनार कर दिया गया है। अब यह मांग उठ रही है कि सरकार इस पूरी टेंडर प्रक्रिया पर रोक लगाए और तीनों कंपनियों के दस्तावेजों की बारीकी से जांच कराए। जो भी कंपनी नियम और शर्तें पूरी नहीं करती उसे बाहर का रास्ता दिखाया जाए ताकि सरकारी खजाने को नुकसान न हो।

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