रायपुर पुलिसिंग: 50 करोड़ के खर्च और विधानसभा में किरकिरी के बाद बदल रही व्यवस्था, पूरे जिले में कमिश्नरी की तैयारी

रायपुर पुलिसिंग: 50 करोड़ के खर्च और विधानसभा में किरकिरी के बाद बदल रही व्यवस्था, पूरे जिले में कमिश्नरी की तैयारी

रायपुर। राजधानी रायपुर में 179 दिन पहले शुरू हुई दोहरी पुलिस व्यवस्था अब समेटने की दिशा में आगे बढ़ रही है। प्रयोग के तौर पर लागू की गई पुलिस कमिश्नरी और देहात पुलिसिंग की अलग-अलग कमान से फायदे की जगह व्यावहारिक परेशानियां ज्यादा सामने आई हैं। डीजीपी ने भी शासन को पत्र भेजकर यह स्पष्ट कर दिया है कि खजाने पर बोझ डालने वाली इस व्यवस्था को लंबे समय तक जारी रखना मुमकिन नहीं है। पुलिस मुख्यालय द्वारा गठित एडीजी स्तर की उच्च स्तरीय समिति की रिपोर्ट के बाद पूरे रायपुर जिले में एकीकृत कमिश्नरी सिस्टम लागू करने का खाका तैयार हो गया है। माना जा रहा है कि अगस्त महीने तक सरकार इसकी आधिकारिक घोषणा कर देगी।

प्रशासनिक उलझन और विधानसभा में गलत जवाब

इस दोहरी प्रणाली से रोजमर्रा का प्रशासनिक कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ है। समन्वय के अभाव में विधानसभा सत्र के दौरान एक सवाल का गलत जवाब पेश हो गया। इस बात को लेकर वरिष्ठ विधायक भोलाराम साहू ने गहरी आपत्ति जताते हुए गृह मंत्री को पत्र लिखा है। तबादलों का पेंच भी एक बड़ा मुद्दा बन गया है। एक ही जिले के भीतर सिपाही और हवलदार के सामान्य ट्रांसफर के लिए फाइलें डीजीपी तक भेजनी पड़ रही हैं। बिना शासन की अनुमति लिए नवा रायपुर के स्टाफ को शहर में पदस्थ नहीं किया जा सकता, जिससे पुलिसिंग की रफ्तार धीमी हो गई है।

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वीवीआईपी क्षेत्र देहात में, अफसर शहर में

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पीएचक्यू की 100 दिनों की समीक्षा रिपोर्ट ने जमीनी हकीकत उजागर कर दी है। रिपोर्ट के मुताबिक कमिश्नरी वाले क्षेत्रों में अपराध घटे हैं और पुलिस की कार्रवाई बढ़ी है, लेकिन इसके विपरीत ग्रामीण इलाकों में पुलिसिंग कमजोर पड़ गई है और अपराध बढ़े हैं। सीमाओं का बंटवारा भी अव्यावहारिक तरीके से किया गया। मंत्रालय, विधानसभा और एयरपोर्ट जैसे संवेदनशील वीवीआईपी इलाके ग्रामीण पुलिस के अधिकार क्षेत्र में आ गए। वहीं, ग्रामीण एसपी और आईजी का दफ्तर कमिश्नरी इलाके में स्थित है। स्वर्णभूमि और साकार जैसी कॉलोनियां देहात का हिस्सा बन गईं, जबकि 23 गांव पुलिस कमिश्नरी में शामिल कर दिए गए। तय नोटिफिकेशन के विपरीत कई वार्ड और पंचायतें बंट गईं।

नए सेटअप के लिए 50 करोड़ से अधिक का बोझ

समिति की रिपोर्ट के अनुसार, बिना पर्याप्त बल के दोहरी व्यवस्था चलाना संभव नहीं है। रायपुर देहात (ग्रामीण) के लिए अलग से पूरा नया इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने में शुरुआती तौर पर ही 50 करोड़ रुपए से ज्यादा का खर्च आएगा। फिलहाल दफ्तरों का कोई स्थायी ठिकाना नहीं है। ग्रामीण एसपी को अस्थायी रूप से संभागीय आयुक्त कार्यालय में बैठना पड़ रहा है और तीनों एएसपी भी बिना स्थायी दफ्तर के काम कर रहे हैं। अगर यह व्यवस्था चलती है तो अलग एसपी कार्यालय, पुलिस लाइन, आवासीय क्वार्टर, महिला थाना, अजाक थाना, क्राइम ब्रांच और ट्रैफिक पुलिस के लिए नई भर्तियां व बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य करने होंगे।

रायपुर के कई जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर जिले में एक समान व्यवस्था की मांग की थी। गृह मंत्री विजय शर्मा भी पूरे जिले में कमिश्नरी के पक्ष में हैं और मुख्यमंत्री से इस पर सहमति बन चुकी है। भास्कर ने जनवरी में ही इस आधी-अधूरी व्यवस्था को लेकर आगाह किया था कि पुलिस बल की कमी और सीमाओं के बंटवारे से आने वाले समय में बड़ी दिक्कतें खड़ी होंगी, जो 179 दिनों के भीतर ही सामने आ गई हैं।

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