हाई कोर्ट का बड़ा आदेश, 32 महीने का पेंशन एरियर 120 दिन में देने के निर्देश

हाई कोर्ट का बड़ा आदेश, 32 महीने का पेंशन एरियर 120 दिन में देने के निर्देश

बिलासपुर : छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने राज्य गठन के बाद सेवानिवृत्त शासकीय कर्मचारियों और पेंशनरों के हित में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए 1 जनवरी 2006 से 31 अगस्त 2008 तक के 32 महीने के पेंशन एरियर का भुगतान करने का निर्देश दिया है । हाई कोर्ट ने इस अवधि का वित्तीय लाभ रोकने संबंधी राज्य शासन के परिपत्र और स्पष्टीकरणों को भेदभावपूर्ण बताते हुए निरस्त कर दिया है ।

जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की एकलपीठ ने यह आदेश बस्तर निवासी 80 वर्षीय सेवानिवृत्त प्रधान पाठक ज्ञानदत्त मिश्रा की याचिका पर सुनवाई के बाद दिया । अदालत ने छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश सरकार को अपने-अपने वित्तीय दायित्व के अनुसार 120 दिनों के भीतर एरियर का भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं ।

क्या था मामला?

याचिकाकर्ता ज्ञानदत्त मिश्रा अविभाजित मध्य प्रदेश के शिक्षा विभाग में नियुक्त हुए थे । राज्य पुनर्गठन के बाद उन्हें छत्तीसगढ़ कैडर मिला और 31 जुलाई 2003 को प्रधान पाठक के पद से सेवानिवृत्त हुए ।

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राज्य सरकार ने छठवें वेतनमान के आधार पर पेंशन पुनरीक्षण नियम 2009 लागू किए । हालांकि 31 अगस्त 2009 के परिपत्र में यह प्रावधान किया गया कि एक जनवरी 2006 से पहले सेवानिवृत्त पेंशनरों को पुनरीक्षित पेंशन का वास्तविक वित्तीय लाभ केवल एक सितंबर 2008 से मिलेगा । इसके कारण जनवरी 2006 से अगस्त 2008 तक के 32 महीने का एरियर रोक दिया गया ।

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पेंशनरों के साथ नहीं किया जा सकता भेदभाव

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अशोक कुमार शुक्ला ने दलील दी कि केवल सेवानिवृत्ति की तारीख के आधार पर पेंशनरों को अलग-अलग वर्गों में बांटना संविधान के अनुच्छेद-14 का उल्लंघन है ।

हाई कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए कहा कि महंगाई का असर सभी पेंशनरों पर समान रूप से पड़ता है । इसलिए केवल कटऑफ तिथि के आधार पर पूर्व और बाद में सेवानिवृत्त कर्मचारियों के बीच अंतर करना न्यायसंगत नहीं है । अदालत ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के ऑल मणिपुर पेंशनर्स एसोसिएशन बनाम मणिपुर राज्य मामले में दिए गए निर्णय का भी उल्लेख किया ।

एमपी-सीजी के विवाद का नहीं चलेगा बहाना

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने तर्क दिया कि मध्य प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2000 की धारा-49 के तहत दोनों राज्यों के बीच पेंशन दायित्व को लेकर सहमति नहीं बनी है । हाई कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए स्पष्ट कहा कि दोनों राज्यों के बीच वित्तीय दायित्व का विवाद पेंशनरों के वैध अधिकारों में बाधा नहीं बन सकता ।

अदालत ने निर्देश दिया कि दोनों राज्य अपने-अपने हिस्से का भुगतान करें । साथ ही छत्तीसगढ़ सरकार को यह स्वतंत्रता भी दी कि भुगतान के बाद वह अपने हिस्से की राशि मध्य प्रदेश सरकार से वसूल सकती है ।

120 दिन में देना होगा 32 महीने का एरियर

हाई कोर्ट ने 31 अगस्त 2009 के परिपत्र तथा 12 मार्च 2015 और 26 नवंबर 2019 को जारी स्पष्टीकरणों को उस सीमा तक निरस्त कर दिया, जिसमें वास्तविक वित्तीय लाभ एक सितंबर 2008 से देने का प्रावधान था । अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि एक जनवरी 2006 से 31 अगस्त 2008 तक के 32 महीने के बकाया पेंशन एरियर का भुगतान 120 दिनों के भीतर किया जाए ।

फैसले का असर

यह निर्णय राज्य गठन से पहले नियुक्त होकर एक जनवरी 2006 से पहले सेवानिवृत्त हुए हजारों पेंशनरों के लिए राहत भरा माना जा रहा है । फैसले के बाद ऐसे पेंशनरों को रुका हुआ 32 महीने का एरियर मिलने का रास्ता साफ हो गया है ।

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