बिलासपुर आबकारी दफ्तर: बाबू ने मातहतों को बनाया वसूली एजेंट परेशान कर्मचारियों ने पीएमओ को भेजी शिकायत कहा हम छोटी कर्मचारी हमे बचा लो...
बिलासपुर। आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के रडार पर आ गई है। इस बार शिकायत किसी बाहरी व्यक्ति ने नहीं, बल्कि विभाग के ही एक छोटे से कर्मचारी ने दिल्ली PMO को भेजी है। अपनी पहचान गुप्त रखते हुए इस कर्मचारी ने विभाग के हेड क्लर्क दिनेश दुबे पर पद के दुरुपयोग और वसूली का दबाव बनाने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
कर्मचारी द्वारा भेजे गए पत्र के मुताबिक, विभाग में काम का नहीं बल्कि टारगेट का तनाव है। आरोप है कि हेड क्लर्क निचले कर्मचारियों को शराब दुकानों के सुपरवाइजरों से रोजाना पैसे लाने के लिए मजबूर करता है। शराब ठेकेदारों और ब्रांड एजेंटों से स्टॉक काटने के नाम पर प्रति पेटी कमीशन मांगा जाता है। अहाता, चखना सेंटर और भांग लाइसेंस वालों से भी नियमित रकम लाने का जिम्मा छोटे कर्मचारियों पर थोप दिया गया है।
शिकायत में हेड क्लर्क के रसूख का भी जिक्र किया गया है। शिकायत पत्र के अनुसार, दिनेश दुबे का दावा हैं कि नीचे से जमा हुई रकम का बड़ा हिस्सा रायपुर में बैठे वरिष्ठ अधिकारियों और मुख्यालय के आबकारी आयुक्त तक पहुंचाया जाता है। कर्मचारियों की परेशानी यह है कि यदि वे पैसे लाने से मना करते हैं या कारोबारी रकम नहीं देते, तो उन्हें लूप लाइन में डालने और डिपार्टमेंटल कार्रवाई की धमकी दी जाती है। इस प्रेशर के चलते कार्यालय का माहौल खराब हो चुका है। कई कर्मचारी मानसिक तनाव में हैं और उन्हें अपने परिवार की फिक्र में है। पीड़ित ने पीएमओ से पूरे मामले की जांच ईओडब्ल्यू (EOW), एसीबी (ACB) या ईडी (ED) से कराने की मांग की है ताकि विभाग में काम करने लायक वातावरण बन सके।
नोटबंदी में चपरासियों को बना दिया था एटीएम, पहले भी दर्ज हो चुकी है एफआईआर
दिनेश दुबे के खिलाफ यह कोई पहला मामला नहीं है। 12 अगस्त 2017 को तत्कालीन रिटायर्ड सहायक आयुक्त पीसी अग्रवाल ने भी पीएमओ को इनकी बेहिसाब संपत्ति का ब्यौरा भेजा था। इसके बाद एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने एफआईआर दर्ज की थी। आबकारी उड़नदस्ता के तत्कालीन सहायक आयुक्त वीआर लहरे की जांच में यह बात सामने आई थी कि दिनेश ने अपने पद का दुरुपयोग कर अकूत संपत्ति जुटाई है। अब इसी मामले को आधार बनाकर नई शिकायत की गई है।
खातों में ऐसे घूमी नगदी: पुरानी जांच रिपोर्ट के अनुसार, नोटबंदी के वक्त काली कमाई को खपाने के लिए जमकर खेल हुआ। सरकंडा एसबीआई में 4 नवंबर 2016 से 29 दिसंबर 2017 के बीच 16.71 लाख जमा किए गए और 15.64 लाख निकाले गए। पत्नी मिनाक्षी के खाते में 5.04 लाख और बेटे आदित्य के नाम पर 3.90 लाख रुपए जमा हुए।
चपरासियों के खातों का इस्तेमाल
नोटबंदी में आबकारी के चपरासी जीआर महार के खाते में 5.15 लाख, हीरालाल के खाते में 1.51 लाख, संतोष कुमार के नाम 40 हजार और नरेश के खाते में 2 लाख रुपए जमा कराकर उन्हें एटीएम की तरह इस्तेमाल किया गया।
संपत्तियों का साम्राज्य: एक छोटे से पद पर रहते हुए दिनेश ने शहर के कुदुदंड में आलीशान मकान खड़ा कर लिया है। इसके अलावा गंगानगर में दो मंजिला इमारत, भारतीय नगर और व्यापार विहार में भी घर हैं। चकरभाठा के चिचिरदा में दो फार्म हाउस और गृहग्राम पाराघाट (मस्तूरी) में लंबी-चौड़ी खेती की जमीन भी इन्हीं के नाम दर्ज है। पीएमओ स्तर की जांच को फाइलों में दबाने वाले इस लिपिक की मुश्किलें कर्मचारियों की शिकायत के बाद अब एक बार फिर बढ़ती दिखाई दे रही हैं।
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