ईओडब्ल्यू रिमांड में भागीरथ वर्मा का बड़ा खुलासा: काली डायरी में दबे हैं कई रसूखदारों के नाम, ठेकेदारों में मची भगदड़।
- 10 दिन की रिमांड पर चल रहे पूर्व चीफ इंजीनियर ने पूछताछ में उगले कई अहम राज।
- छापेमारी में मिली 'काली डायरी' और हार्ड डिस्क से 500 करोड़ के टेंडर घोटाले का शक।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित टेंडर घोटाले में गिरफ्तार नगरीय प्रशासन विभाग के तत्कालीन चीफ इंजीनियर भागीरथ वर्मा से पूछताछ में हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं। ईओडब्ल्यू (EOW) और एसीबी (ACB) की 10 दिन की पुलिस रिमांड में आरोपी वर्मा अब पूरी तरह से टूटते नजर आ रहे हैं। 19 जून की सुबह तक चली लंबी पूछताछ में इस भ्रष्ट सिंडिकेट से जुड़े कई सफेदपोशों के नामों से पर्दा उठने लगा है।
जांच टीम के वरिष्ठ सूत्रों के मुताबिक, उज्जैन और रायपुर के ठिकानों से एक 'काली डायरी' और कुछ अहम डिजिटल साक्ष्य बरामद हुए हैं। इनमें टेंडर पास कराने के एवज में लिए गए मोटे कमीशन का पूरा हिसाब-किताब दर्ज है। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद से विभाग के कई दागी अफसरों और शहर के बड़े ठेकेदारों में भारी दहशत का माहौल है।
कोडवर्ड में छिपा है करोड़ों की रिश्वत का सच
ईओडब्ल्यू के अधिकारियों की मानें तो जब्त डायरी में करोड़ों रुपयों के लेन-देन की स्पष्ट एंट्री है। इन एंट्रीज के आगे ठेकेदारों और अफसरों के असली नाम की जगह 'एक्स', 'वाई' और 'बॉस' जैसे कोडवर्ड का इस्तेमाल किया गया है। साइबर सेल और तकनीकी टीम अब इन कोडवर्ड्स को डिकोड करने में दिन-रात जुटी हुई है।
जांच में यह बात भी खुलकर सामने आई है कि टेंडर की लागत जानबूझकर कई गुना बढ़ाई जाती थी। इसके बाद चहेते ठेकेदारों से एडवांस में 10 से 15 प्रतिशत का मोटा कमीशन वसूला जाता था। यह सारा काला पैसा हवाला नेटवर्क के जरिए रियल एस्टेट और बेनामी संपत्तियों में खपाया जा रहा था।
अंडरग्राउंड होने लगे सिंडिकेट के नामी ठेकेदार
भागीरथ वर्मा की गिरफ्तारी के बाद नगरीय प्रशासन विभाग के बड़े टेंडर लेने वाले कई नामी ठेकेदार अचानक अंडरग्राउंड हो गए हैं। रायपुर और बिलासपुर के कुछ रसूखदार बिल्डर्स और सप्लायर्स के मोबाइल नंबर पिछले दो दिनों से बंद आ रहे हैं। जांच एजेंसियों ने ऐसे संदिग्ध ठेकेदारों की एक लंबी सूची तैयार कर ली है।
एसीबी की अलग-अलग टीमें जल्द ही इन फरार ठेकेदारों के ठिकानों पर दूसरी सर्जिकल स्ट्राइक कर सकती हैं। जांच टीम यह भी पता लगा रही है कि इस कमीशनखोरी का पैसा राजनीतिक फंडिग के तौर पर तो इस्तेमाल नहीं हुआ है। इस पूरे नेक्सस की आंच अब सत्ता के करीबी कुछ कद्दावर नेताओं तक भी पहुंच रही है।
विदेशों में भी बेनामी संपत्ति और निवेश का शक
रिमांड के दौरान भागीरथ वर्मा के करीबी चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) को भी बुलाकर ईओडब्ल्यू ने लंबी पूछताछ की है। शुरुआती जांच में मुंबई और पुणे में कुछ महंगी कमर्शियल संपत्तियों और फार्म हाउस के दस्तावेज जांच टीम के हाथ लगे हैं। इसके अलावा विदेशी बैंक खातों और दुबई में भी भारी-भरकम बेनामी निवेश का संदेह गहरा गया है।
ईओडब्ल्यू के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई अभी सिर्फ एक झांकी है। हार्ड डिस्क और जब्त मोबाइलों का डिलीट किया गया डेटा रिकवर होने के बाद घोटाले का कुल आंकड़ा 500 करोड़ के पार जा सकता है। जांच की सुई जिस तेजी से घूम रही है, उससे आने वाले दिनों में कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां होना लगभग तय माना जा रहा है।
