इवनिंग वॉक पर निकले प्रोफेसर का चाकू की नोक पर अपहरण, महिला के खाते में ट्रांसफर कराए 1 लाख
रायगढ़ : शाम की सैर पर निकले प्रोफेसर कपुरचंद गुप्ता को रास्ते से अगवा कर चाकू की नोक पर उनके मोबाइल और डिजिटल पेमेंट ऐप के पासवर्ड हासिल करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोपियों ने प्रोफेसर की आंखों पर पट्टी बांधकर उन्हें मोटरसाइकिल से पंडरीपानी ले गए। यहां मारपीट कर गूगल पे और भीम ऐप की जानकारी हासिल की और एक महिला के खाते का क्यूआर कोड मंगवाकर प्रोफेसर के खाते से करीब एक लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए। रकम निकलवाने के बाद भी आरोपियों ने प्रोफेसर को नहीं छोड़ा, बल्कि एक कमरे में बंधक बनाकर रखा।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी शशि मोहन सिंह ने पुसौर पुलिस को प्रोफेसर की सकुशल बरामदगी और आरोपियों की गिरफ्तारी के तत्काल निर्देश दिए। पुलिस ने रातभर ऑपरेशन चलाया और प्रोफेसर को सुरक्षित बरामद कर लिया। घटना के 24 घंटे के भीतर एक आरोपी को हिरासत में लेकर पुलिस ने मामले की परतें खोलनी शुरू कर दी हैं।
डबरी किनारे आराम कर रहे थे प्रोफेसर, तभी पहुंचे दो युवक
पीड़ित प्रोफेसर कपुरचंद गुप्ता (47) के बताया कि 5 अक्टूबर की शाम करीब 6 से 7 बजे के बीच वह गांव के डीपापारा और शोभा राइस मिल के पास इवनिंग वॉक कर रहे थे। थकान होने पर वह सड़क किनारे डबरी के पास माइलस्टोन पर बैठकर आराम करने लगे। इसी दौरान दो युवक उनके पास पहुंचे और अचानक उन्हें पकड़ लिया। आरोपियों ने उन्हें डबरी की ओर ले जाकर उनकी आंखों पर पट्टी बांध दी। इसके बाद पेट, गर्दन और छाती पर चाकू लगाकर जान से मारने की धमकी दी। प्रोफेसर को कुछ समझ आता, इससे पहले ही आरोपी उन्हें मोटरसाइकिल पर बैठाकर वहां से ले गए।
चाकू की नोक पर अपहरण, फिर मोबाइल के खुलवाए पासवर्ड
आरोपी प्रोफेसर को भूपदेवपुर थाना क्षेत्र के ग्राम पंडरीपानी ले गए। यहां उनके साथ मारपीट की गई। इसके बाद मोबाइल का पासवर्ड, गूगल पे और भीम ऐप से जुड़ी गोपनीय जानकारी जबरन हासिल की गई। आरोपियों ने इसके बाद एक महिला से फोन पर संपर्क किया और उसका क्यूआर कोड मंगवाया। क्यूआर कोड मिलते ही प्रोफेसर के खाते से लगातार रकम ट्रांसफर कराई जाने लगी। पुलिस के अनुसार खाते से करीब एक लाख रुपये की ट्रांसफर लिमिट खत्म होने तक रकम निकाली गई।
परिवार को न हो शक, प्रोफेसर से ही करवाया फोन
आरोपियों ने सिर्फ रकम ही नहीं लूटी, बल्कि परिजनों को गुमराह करने की भी पूरी कोशिश की। प्रोफेसर को धमकाकर उनके घर फोन करवाया गया और उनसे कहलवाया गया कि वे बिल्कुल ठीक हैं। इसका मकसद परिजनों को किसी अनहोनी का शक न होने देना था। रकम ट्रांसफर कराने के बाद आरोपियों ने प्रोफेसर की आंखों पर दोबारा पट्टी बांधी और उन्हें पंडरीपानी के एक कमरे में ले जाकर बंधक बना दिया।
परिजनों को हुआ शक तो पहुंच गए पंडरीपानी, भनक लगते ही आरोपी फरार
इधर, प्रोफेसर के परिजनों को पूरे घटनाक्रम पर संदेह हुआ। उन्होंने अपने स्तर पर लोकेशन की जानकारी जुटाई और पंडरीपानी पहुंच गए। परिजनों के वहां पहुंचने की भनक लगते ही आरोपी मौके से फरार हो गए। सूचना मिलते ही पुसौर थाना प्रभारी निरीक्षक हर्षवर्धन सिंह पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने कमरे से प्रोफेसर को सकुशल बाहर निकाला और उन्हें थाने लाया गया।
24 घंटे में एक आरोपी गिरफ्तार, अन्य की तलाश जारी
प्रोफेसर की बरामदगी के बाद पुलिस ने आरोपियों की तलाश तेज कर दी। रातभर संभावित ठिकानों पर दबिश और पतासाजी के बाद पुलिस ने ग्राम जकेला निवासी सुनील सारथी को हिरासत में ले लिया। पूछताछ में आरोपी ने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर प्रोफेसर के अपहरण की वारदात में शामिल होना स्वीकार किया है। पुलिस ने अन्य नामजद आरोपियों की पहचान भी कर ली है और उनकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है।
महिला के खाते में गई रकम भी सुरक्षित वापस
पुलिस ने उस महिला से भी संपर्क किया, जिसके खाते का क्यूआर कोड मंगवाकर प्रोफेसर के खाते से रकम ट्रांसफर कराई गई थी। पुलिस ने ट्रांसफर की गई पूरी रकम को सुरक्षित करा लिया है। अब पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि इस पूरी साजिश में महिला की भूमिका क्या थी और रकम ट्रांसफर कराने के पीछे आरोपियों की पूरी योजना क्या थी।
डिजिटल ट्रांजेक्शन से जुड़े साक्ष्यों की होगी जांच
पीड़ित की रिपोर्ट पर पुसौर थाने में धारा 140(3), 309(6), 142 एवं 351(3) बीएनएस के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस आरोपियों से पूछताछ के साथ ही वारदात में इस्तेमाल वाहन, मोबाइल और डिजिटल ट्रांजेक्शन से जुड़े साक्ष्यों की भी जांच कर रही है। पूरे मामले का 24 घंटे के भीतर खुलासा करने में थाना प्रभारी पुसौर निरीक्षक हर्षवर्धन सिंह, उप निरीक्षक कुंदन लाल गौर, प्रधान आरक्षक बसंत पांडे, डोल नारायण साव, आरक्षक धनुर्जय चंद बेहरा, दिलीप सिदार, राहुल सिदार एवं पुलिस स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
