बिलासपुर पंजीयन कार्यालय में गोलमाल: 5 डिसमिल से कम कृषि भूमि और कच्ची प्लाटिंग की धड़ल्ले से रजिस्ट्री भी ओके......

बिलासपुर पंजीयन कार्यालय में गोलमाल: 5 डिसमिल से कम कृषि भूमि और कच्ची प्लाटिंग की धड़ल्ले से रजिस्ट्री भी ओके......

बिलासपुर । शहर के उप पंजीयक कार्यालय में शासन के नियमों को ताक पर रखकर बड़े पैमाने पर पंजीयन किया जा रहा है। बीते छह माह के भीतर पंजीयक प्रतीक खेमका और यहां पदस्थ दो अन्य पंजीयकों द्वारा पांच डिसमिल से कम कृषि भूमि की धड़ल्ले से रजिस्ट्री की गई है। जबकि, शासन का नियम है कि पांच डिसमिल के नीचे की कृषि भूमि का पंजीयन नहीं किया जाना है। इस तरह के मामलों में राजस्व की चोरी होने के साथ-साथ नियमों की अनदेखी की जा रही है।

कृषि भूमि के अलावा, डायवर्सन शुदा जमीन, जिस पर बैन है, उसे भी बिना सक्षम अनुमति के छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटकर रजिस्ट्री की जा रही है। नियमों के मुताबिक कच्ची प्लाटिंग वाली जमीनों का पंजीयन नहीं किया जा सकता, लेकिन यहां ऐसी जमीनों की भी लगातार रजिस्ट्री हो रही है। इन सभी मामलों की सघन जांच होनी चाहिए, ताकि यह पता चल सके कि पिछले कुछ महीनों में ऐसे कितने दस्तावेजों का पंजीयन किया गया है और शासन को राजस्व का कितना नुकसान हुआ है।

इन गड़बड़ियों के बीच कार्यालय में लेनदेन का एक और ताजा मामला सामने आया है। पंजीयक प्रतीक खेमका ने 3 जुलाई 2026 को एक प्रार्थी के दस्तावेज को सिर्फ इसलिए लौटा दिया था क्योंकि उसके दस्तावेजों में नाम की विसंगति थी। प्रार्थी के आधार कार्ड में नाम 'नरसिम्हन मूर्ति' दर्ज था, एक अन्य दस्तावेज में 'ए. मुर्ति' और एक रिकॉर्ड में 'ए. नरसिम्हन मूर्ति' लिखा था। इसी अंतर का हवाला देकर रजिस्ट्री रोक दी गई। लेकिन, जब उसी खारिज दस्तावेज को 9 जुलाई 2026 को दूसरे दस्तावेज लेखक के माध्यम से पेश किया गया, तो 25 हजार रुपये लेकर बिना किसी आपत्ति के पंजीयन पूरा कर दिया गया।

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विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरे काम के लिए बाहरी लोगों का सहारा लिया जा रहा है। विनोद श्रीवास नाम का व्यक्ति विभाग का कर्मचारी नहीं है, उसे केवल रिश्वत की रकम लेने और बाहर से पूरी सेटिंग करने के लिए रखा गया है। विभाग में विनोद की तरह दो अन्य बाहरी व्यक्ति भी सक्रिय हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि किसी भी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी पर कोई आंच न आए और लेनदेन सुरक्षित तरीके से चलता रहे।

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पंजीयक प्रतीक खेमका का लापरवाही और अनियमितता का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले सक्ती जिले में पदस्थापना के दौरान वे एक बड़ी गड़बड़ी कर चुके हैं। सक्ती में उन्होंने एक आदिवासी व्यक्ति की भूमि बिना कलेक्टर की अनुमति के गैर आदिवासी के नाम पर रजिस्ट्री कर दी थी। शिकायत और जांच रिपोर्ट के आधार पर संभागायुक्त ने कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया था। उस दौरान संभागायुक्त ने चेतावनी दी थी कि भविष्य में इस प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके बावजूद बिलासपुर में नए सिरे से गड़बड़ियों का सिलसिला जारी है।

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