रायपुर के डॉग शेल्टर का सच: बेजुबान की मौत पर 4 दिन तक पर्दा, डॉक्टर के इनकार से खुली पोल!
रायपुर। जिसे बेजुबानों को नया जीवन देने के लिए बनाया गया था, वहां से एक ऐसी खबर आई है जो किसी का भी दिल दुखा देगी। सोनडोंगरी के डॉग शेल्टर में इलाज के नाम पर एक बेजुबान की जान चली गई और उसकी मौत की सच्चाई को चार दिनों तक छिपा कर रखा गया। लेकिन कहते हैं न कि सच ज्यादा दिन नहीं छिपता। इस बार सच शेल्टर प्रबंधन की मर्जी से नहीं, बल्कि एक डॉक्टर के पोस्टमार्टम करने से साफ इनकार के बाद सामने आया है।
जब मृत बेजुबान के शव का पोस्टमार्टम कराने की कोशिश हुई, तो डॉक्टर ने साफ मना कर दिया। डॉक्टर ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि इस बेजुबान की मौत लगभग चार दिन पहले ही हो चुकी है। शरीर पर मक्खियां भिनभिना रही हैं और लाश बुरी तरह सड़ चुकी है, इसलिए अब पोस्टमार्टम करना मुमकिन नहीं है। इस एक इनकार ने शेल्टर होम के बड़े-बड़े दावों की पोल खोलकर रख दी।
महीने भर इलाज का भरोसा, फिर मिला सिर्फ धोखा
यह पूरा मामला रायपुर के सोनडोंगरी स्थित डॉग शेल्टर का है। पशु प्रेमी मुकेश चंद्रा ने एक बीमार कुत्ते को बेहतर इलाज की उम्मीद में यहां भर्ती कराया था। शेल्टर प्रबंधन ने भरोसा दिया था कि वे उसकी अच्छी देखभाल करेंगे। करीब एक महीने तक वहां इलाज चलने की बात कही गई। मुकेश को लगा कि उनका बेजुबान ठीक हो रहा है, लेकिन वहां घोर लापरवाही चल रही थी। आखिरकार कुत्ते की मौत हो गई। शेल्टर प्रबंधन ने इसकी जानकारी तुरंत नहीं दी। जब चार दिन बाद लाश पूरी तरह खराब हो गई, तब जाकर मुकेश को खबर दी गई।
प्राइवेट कंपनी के हाथ में कमान, व्यवस्था राम भरोसे
रायपुर नगर निगम ने इस डॉग शेल्टर को चलाने का जिम्मा हरियाणा की एक निजी कंपनी को सौंप रखा है। जिस शेल्टर को बेजुबानों के लिए एक सुरक्षित आसरा बनना था, वह अब अव्यवस्था और भारी लापरवाही का केंद्र बन चुका है। स्थानीय लोगों और पशु प्रेमियों में इस घटना को लेकर काफी गुस्सा है।
अफसर बोले- शिकायत का प्रमाण लाओ, तब करेंगे कार्रवाई
इस पूरे संवेदनशील मामले पर जब रायपुर नगर निगम के अपर आयुक्त विनोद पाण्डेय से बात की गई, तो उन्होंने कहा:
हमारे पास अभी तक इस प्रकार की कोई शिकायत नहीं आई है। निगम के अधिकारी डॉग शेल्टर का समय-समय पर निरीक्षण करते हैं। अगर आपके पास लापरवाही का कोई प्रमाण है, तो उसे प्रस्तुत करें। जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब डॉक्टर खुद लिखित में दे रहा है कि मौत चार दिन पहले हुई और जानकारी दबाकर रखी गई, तो क्या नगर निगम को कार्रवाई के लिए किसी और बड़े सबूत का इंतजार है?
