CM से शिकायत के बाद खुली अटल आरोग्य लैब की पोल! जांच में कर्मचारियों की चूक स्वीकार, लेकिन कार्रवाई सिर्फ काउंसलिंग तक क्यों?

CM से शिकायत के बाद खुली अटल आरोग्य लैब की पोल! जांच में कर्मचारियों की चूक स्वीकार, लेकिन कार्रवाई सिर्फ काउंसलिंग तक क्यों?

सुकमा। सुकमा जिला अस्पताल में संचालित अटल आरोग्य लैब की जांच रिपोर्ट में सामने आई गंभीर लापरवाही का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को की गई शिकायत के बाद मामले की जांच कर रही लैब संचालन एजेंसी एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड (HLL Lifecare Limited) ने अपने स्पष्टीकरण में स्वीकार किया है कि मरीज के पंजीयन के दौरान डेटा एंट्री में मानवीय त्रुटि हुई थी। हालांकि, कंपनी ने इसे टाइपिंग की गलती बताते हुए संबंधित कर्मचारियों की केवल काउंसलिंग किए जाने की जानकारी दी है। इसी को लेकर अब जवाबदेही और कार्रवाई पर सवाल उठने लगे हैं।

गौरतलब है कि 13 अप्रैल 2026 को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जिला अस्पताल में अटल आरोग्य लैब का शुभारंभ किया था। अत्याधुनिक जांच सुविधाएं मिलने की उम्मीद से लोगों में उत्साह था, लेकिन शुभारंभ के कुछ ही दिनों बाद सामने आए इस मामले ने लैब की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए है।

शिकायत के बाद खुली लापरवाही की परत
जानकारी के अनुसार, सुकमा के राठी परिवार ने अपने 80 वर्षीय पिता की ब्लड जांच रिपोर्ट में गंभीर त्रुटियों को लेकर मुख्यमंत्री से शिकायत की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि रिपोर्ट में मरीज की मूलभूत जानकारी ही गलत दर्ज कर दी गई है। मामले की जांच के बाद कंपनी ने जारी स्पष्टीकरण में माना कि पंजीयन के दौरान डेटा एंट्री करते समय टाइपिंग त्रुटि हुई थी। इसी वजह से मरीज की उम्र और लिंग गलत दर्ज हो गया।

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80 वर्ष के मरीज को बना दिया 30 साल का, पुरुष की जगह महिला दर्ज
एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड द्वारा 19 जून 2026 को जारी स्पष्टीकरण में बताया गया कि जांच के दौरान यह पाया गया कि मरीज का पंजीयन करते समय मानवीय त्रुटि हुई। कंपनी के अनुसार, 80 वर्षीय पुरुष मरीज की उम्र 30 वर्ष दर्ज कर दी गई, जबकि लिंग के कॉलम में पुरुष के स्थान पर महिला दर्ज हो गया। कंपनी ने इसे टाइपोग्राफिकल एरर तथा अस्थायी तकनीकी समस्या का परिणाम बताया है। हालांकि इस तरह की गलती ने मरीजों की मेडिकल जानकारी की शुद्धता और लैब की गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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केवल काउंसलिंग तक सीमित रही कार्रवाई
कंपनी ने अपने जवाब में बताया कि संबंधित कर्मचारियों की काउंसलिंग की गई है तथा भविष्य में ऐसी त्रुटियां दोबारा न हों, इसके लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। लेकिन इस कार्रवाई को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि मेडिकल रिपोर्ट जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में इतनी बड़ी गलती हो सकती है, तो केवल मौखिक समझाइश या काउंसलिंग पर्याप्त कैसे मानी जा सकती है।

इलाज पर भी पड़ सकता था असर
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी मरीज की उम्र, लिंग और अन्य व्यक्तिगत जानकारी चिकित्सकीय निर्णय लेने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि रिपोर्ट में ऐसी मूलभूत जानकारी ही गलत दर्ज हो जाए, तो आगे के उपचार, दवा की मात्रा, जांच की व्याख्या और चिकित्सकीय निर्णय प्रभावित हो सकते हैं। यही कारण है कि इस मामले को केवल डेटा एंट्री की साधारण गलती मानकर छोड़ देना कई लोगों को उचित नहीं लग रहा है।

जवाबदेही को लेकर उठ रहे सवाल
मामले के सामने आने के बाद अब यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि जांच एजेंसी स्वयं कर्मचारियों की गलती स्वीकार कर रही है, तो क्या केवल काउंसलिंग से भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सकेगी? स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही के मामलों में जवाबदेही स्पष्ट होना जरूरी है, ताकि मरीजों का भरोसा बना रहे और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली पर भी सवाल
इस घटना ने लैब की आंतरिक गुणवत्ता जांच (Quality Check) व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी रिपोर्ट को अंतिम रूप देने से पहले मरीज की मूलभूत जानकारी का सत्यापन किया जाना चाहिए। अंतिम रिपोर्ट जारी होने से पहले यह त्रुटि पकड़ में नहीं आई, तो यह केवल डेटा एंट्री की गलती नहीं बल्कि गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली की भी कमजोरी की ओर संकेत करती है। अब स्थानीय नागरिकों की नजर इस बात पर है कि स्वास्थ्य विभाग और संबंधित एजेंसी भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या अतिरिक्त कदम उठाते हैं और क्या जवाबदेही तय करने के लिए आगे कोई प्रशासनिक कार्रवाई की जाती है।

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