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बीमा कंपनी को झटका: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने खारिज की अपील, 53.40 लाख मुआवजा बरकरार
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सड़क दुर्घटना मुआवजा मामले में बीमा कंपनी की अपील खारिज करते हुए मृतक के परिवार को दिए गए 53.40 लाख रुपये के मुआवजे को बरकरार रखा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि बिना ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य के ‘सहभागी लापरवाही’ (Contributory Negligence) का दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता।
यह मामला 4 दिसंबर 2021 को हुए एक सड़क हादसे से जुड़ा है। जयमंगल राजवाड़े अंबिकापुर से कोरबा की ओर अपनी मारुति कार (CG-12-AY-8218) से जा रहे थे। थाना बांगो क्षेत्र के गांधी नगर बंजारी मुख्य मार्ग पर सामने से आ रही स्विफ्ट कार (UP-62-AP-9314) ने कथित रूप से तेज और लापरवाहीपूर्वक वाहन चलाते हुए उनकी कार को टक्कर मार दी। हादसे में जयमंगल राजवाड़े को गंभीर चोटें आईं और बाद में उनकी मृत्यु हो गई।
परिजनों का दावा
मृतक की पत्नी और बच्चों ने दावा अधिकरण में प्रस्तुत याचिका में बताया कि 42 वर्षीय जयमंगल राजवाड़े प्रेस में कार्यरत थे और साथ ही जूस की दुकान भी संचालित करते थे। उनकी मासिक आय लगभग 35,000 रुपये थी। परिजनों ने कुल 1.39 करोड़ रुपये मुआवजे की मांग की थी। मनेन्द्रगढ़ (जिला कोरिया) के प्रथम अपर मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने सुनवाई के बाद 53.40 लाख रुपये का मुआवजा निर्धारित किया।
बीमा कंपनी की दलील
यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड ने अधिकरण के आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अपील दायर की। कंपनी का तर्क था कि दुर्घटना में मृतक की भी सहभागी लापरवाही थी। कंपनी ने वाहन चालक जयसिंह यादव को गवाह के रूप में पेश किया, जिसने मृतक को भी दुर्घटना के लिए जिम्मेदार बताया।
हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडेय ने कहा कि बीमा कंपनी सहभागी लापरवाही साबित करने के लिए कोई स्वतंत्र और ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सकी। दुर्घटना करने वाले वाहन का चालक ‘रुचि वाला गवाह’ (Interested Witness) है और उसके बयान को बिना स्वतंत्र साक्ष्य के स्वीकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने एफआईआर, मर्ग सूचना और क्राइम डिटेल फॉर्म का उल्लेख करते हुए कहा कि रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि मृतक अपनी निर्धारित लेन में वाहन चला रहे थे। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि केवल आमने-सामने की टक्कर के आधार पर सहभागी लापरवाही मान लेना विधिसम्मत नहीं है, जब तक उसके समर्थन में ठोस साक्ष्य न हों।
मुआवजा उचित और न्यायसंगत
हाईकोर्ट ने माना कि मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण द्वारा निर्धारित 53.40 लाख रुपये का मुआवजा उचित, न्यायसंगत और कानूनी सिद्धांतों के अनुरूप है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस राशि में किसी प्रकार के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। इस फैसले को सड़क दुर्घटना मुआवजा मामलों में एक महत्वपूर्ण मिसाल के रूप में देखा जा रहा है, जहां अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि केवल आरोपों के आधार पर मृतक पर लापरवाही थोपना स्वीकार्य नहीं होगा।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
