स्कूल के 77.71 लाख के गबन कांड में नया मोड़, मुख्य आरोपी की मौत, सह-आरोपी बाबू ने दी आत्महत्या की धमकी
बिलासपुर : बेलतरा के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में 77 लाख 71 हजार 932 रुपये के कथित गबन का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाने के इस प्रकरण में अब जांच के बीच नया विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि मामले में सह-आरोपी लिपिक कैलाश चंद्र सूर्यवंशी ने अपनी निलंबन अवधि के वेतन भुगतान की मांग को लेकर मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई है। साथ ही, एक सप्ताह के भीतर भुगतान नहीं होने पर कलेक्टर कार्यालय परिसर में आत्महत्या करने की चेतावनी देने की बात सामने आई है। शिकायत में डीईओ और संबंधित लिपिक को इसके लिए जिम्मेदार ठहराने की बात भी कही गई है।
22 फर्जी बिलों से 77.71 लाख रुपये निकालने का आरोप
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बेलतरा स्कूल में वर्ष 2018 से 2019 के बीच महज 11 महीने 20 दिन की अवधि में कथित तौर पर एरियर्स भुगतान के नाम पर 22 फर्जी बिल तैयार किए गए। बताया जाता है कि उस समय नियमित प्राचार्य नरेंद्र राठौर अवकाश पर थे। उन्होंने व्याख्याता प्यारेलाल मरावी को प्रभार के साथ आहरण-संवितरण का अधिकार सौंपा था। आरोप है कि प्रभारी प्राचार्य पीएल मरावी, लिपिक कैलाश चंद्र सूर्यवंशी, लिपिक निर्मला सिदार और व्याख्याता पुन्नीलाल कुर्रे ने आपसी मिलीभगत से कथित फर्जी बिल तैयार कराए। इन बिलों के माध्यम से ट्रेजरी से कुल 77,71,932 रुपये व्याख्याता पुन्नीलाल कुर्रे के बैंक खाते में स्थानांतरित कराए जाने का आरोप है।
एफआईआर दर्ज हुई, लेकिन मुख्य आरोपी के खिलाफ कार्रवाई पर संदेह
मामले का खुलासा होने के बाद तत्कालीन डीईओ ने पुन्नीलाल कुर्रे को निलंबित किया था। वहीं, रतनपुर थाने में आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 409, 420 और 34 के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज कराया गया था। इसी बीच कोरोना की दूसरी लहर के दौरान तत्कालीन प्रभारी प्राचार्य पीएल मरावी का निधन हो गया। दूसरी ओर, मामले में मुख्य आरोपी बताए गए व्याख्याता पुन्नीलाल कुर्रे के खिलाफ अपेक्षित सख्त कार्रवाई नहीं होने को लेकर संदेह बना रहा। उपलब्ध विवरण के अनुसार, वे सेवानिवृत्त हो गए और सेवानिवृत्ति के कुछ समय बाद एक सड़क दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई।
बहाली के बाद विभागीय जांच, अब वेतन भुगतान को लेकर विवाद
मामले में सह-आरोपी लिपिक कैलाश चंद्र सूर्यवंशी को विभाग ने सेवा में बहाल कर दिया। हालांकि, उनके खिलाफ विभागीय जांच अलग से जारी रखने का निर्णय लिया गया और इसके लिए जांच दल गठित किया गया। इसी बीच लिपिक ने जांच अधिकारियों और विभागीय कर्मचारियों के खिलाफ शिकायत किए जाने का मामला सामने आया है। सूत्रों के अनुसार, उसने कलेक्टर और कमिश्नर के समक्ष भी शिकायतें प्रस्तुत की। इनमें लिपिक हेमंत शर्मा पर निलंबन अवधि का वेतन निकालने के एवज में 50 हजार रुपये रिश्वत मांगने का आरोप शामिल बताया गया है। दूसरी ओर, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बहाली आदेश में निलंबन अवधि के संबंध में निर्णय विभागीय जांच पूरी होने के बाद लिए जाने का उल्लेख है। यदि आदेश में वास्तव में यही शर्त लागू है, तो लंबित वेतन के भुगतान पर निर्णय जांच के निष्कर्ष और संबंधित सेवा नियमों के अनुसार किया जाना होगा। रिश्वत मांगने के आरोप की सत्यता भी निष्पक्ष जांच से ही स्पष्ट हो सकती है। सूत्रों का दावा है कि विभागीय जांच अंतिम चरण में है। इसी दौरान मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में दर्ज शिकायत और आत्महत्या की चेतावनी ने मामले को नया मोड़ दे दिया है।
