RSS प्रमुख डॉ मोहन भागवत पहुंचे बिलासपुर, छत्तीसगढ़ में संगठन के बंटवारे पर कल होगा बड़ा फैसला
बिलासपुर : आरएसएस के सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत आज गुरुवार को दो दिवसीय प्रवास पर बिलासपुर पहुंच गए। नागपुर से इंटरसिटी एक्सप्रेस के जरिए बिलासपुर पहुंचे संघ प्रमुख का रेलवे स्टेशन पर संघ के पदाधिकारियों ने स्वागत किया। इसके बाद कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच वे कोनी स्थित सरस्वती शिशु मंदिर परिसर के लिए रवाना हुए। डॉ भागवत के इस दौरे को छत्तीसगढ़ में संघ के संगठनात्मक पुनर्गठन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
संघ प्रमुख के बिलासपुर पहुंचते ही संगठनात्मक गतिविधियां तेज हो गई हैं। आज शाम से बैठकों और बौद्धिक कार्यक्रमों का सिलसिला शुरू होगा। वहीं, शुक्रवार 23 अक्टूबर को होने वाली प्रांतीय टोली की बैठक पर सभी की नजरें टिकी हैं। इस बैठक में छत्तीसगढ़ में संघ की संगठनात्मक व्यवस्था को दो संभागों में संचालित करने की योजना को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय सामने आ सकते हैं।
आज शाम 5 बजे से महत्वपूर्ण बैठक, शताब्दी वर्ष की गतिविधियों की होगी समीक्षा
डॉ मोहन भागवत आज शाम 5 बजे कोनी स्थित सरस्वती शिशु मंदिर परिसर में प्रांतीय पदाधिकारियों की बैठक लेंगे। बैठक में संघ के शताब्दी वर्ष के दौरान संचालित संगठनात्मक गतिविधियों की समीक्षा की जाएगी। ग्रामीण क्षेत्रों में शाखाओं की स्थिति, संगठन के विस्तार और नए स्वयंसेवकों को जोड़ने के प्रयासों पर भी विस्तार से चर्चा होगी। संघ प्रमुख पदाधिकारियों से सीधे संवाद कर जमीनी स्तर पर चल रहे कार्यों की जानकारी लेंगे। बैठक के बाद आधे घंटे का विश्राम होगा। इसके पश्चात शाम 6:30 बजे से रात 8 बजे तक डॉ. भागवत बौद्धिक को संबोधित करेंगे। अपने दो दिवसीय प्रवास के दौरान वे कोनी स्थित सरस्वती शिशु मंदिर परिसर के ग्राम भारती परिसर में ठहरेंगे।
कल दो संभागों में बंटेगा संघ का संगठनात्मक ढांचा
शुक्रवार 23 अक्टूबर को संघ की प्रांतीय टोली की बैठक आयोजित होगी। इसमें छत्तीसगढ़ प्रांत के प्रमुख पदाधिकारी शामिल होंगे। इस बैठक में संघ की संगठनात्मक संरचना को नए सिरे से व्यवस्थित करने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण रहेगी। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत छत्तीसगढ़ में संघ का कामकाज रायपुर और बिलासपुर संभाग के माध्यम से संचालित किया जाएगा। बिलासपुर संभाग में बिलासपुर और सरगुजा संभाग के क्षेत्र शामिल होंगे, जबकि रायपुर संभाग में रायपुर, दुर्ग और बस्तर संभाग के क्षेत्र आएंगे। इस बदलाव का उद्देश्य संगठनात्मक गतिविधियों को अधिक व्यवस्थित करना, शाखाओं का विस्तार करना और क्षेत्रीय स्तर पर पदाधिकारियों के बीच समन्वय मजबूत करना है।
22 पदाधिकारियों की कार्यकारिणी, नियुक्तियों पर बाद में होगी घोषणा
प्रस्तावित संगठनात्मक ढांचे में संभागीय कार्यकारिणी का स्वरूप प्रांत की कार्यकारिणी की तर्ज पर रखा जाएगा। इसमें करीब 22 चुनिंदा पदाधिकारियों को शामिल करने की योजना है। प्रांत संघचालक, प्रांत कार्यवाह और बौद्धिक प्रमुख समेत प्रमुख संगठनात्मक दायित्वों से जुड़े पदाधिकारी इसमें शामिल होंगे। संभागीय पदाधिकारियों की नियुक्ति और औपचारिक घोषणा संघ की आगामी अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में किए जाने की बात कही गई है। यह बैठक अप्रैल से मई के बीच होने की संभावना है।
संघ के दस्तावेजों में छत्तीसगढ़ प्रांत अब कहलाएगा राज्य
संगठनात्मक पुनर्गठन के साथ संघ की आंतरिक शब्दावली में भी बदलाव प्रस्तावित है। संघ के दस्तावेजों में वर्तमान छत्तीसगढ़ प्रांत को राज्य के रूप में संबोधित किया जाएगा। राज्य स्तर पर संघचालक, प्रचारक और कार्यवाह जैसे प्रमुख दायित्व बने रहेंगे, जबकि क्षेत्रीय गतिविधियों को रायपुर और बिलासपुर संभागों के माध्यम से संचालित किया जाएगा। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में संघ के संगठनात्मक पुनर्गठन के प्रस्ताव पर पिछले वर्ष बेंगलुरु में आयोजित अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में सहमति बन चुकी है। अब बिलासपुर में होने वाली बैठकों के जरिए इस निर्णय को आगे बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।
बैठक के बाद रायपुर रवाना होंगे डॉ भागवत
दो दिवसीय बिलासपुर प्रवास के दौरान संघ प्रमुख संगठन के विस्तार, शताब्दी वर्ष की गतिविधियों और भविष्य की कार्ययोजना पर पदाधिकारियों के साथ चर्चा करेंगे। शुक्रवार को प्रांतीय टोली की बैठक के बाद वे सड़क मार्ग से रायपुर के लिए रवाना होंगे। डॉ मोहन भागवत का आज बिलासपुर पहुंचना और कल होने वाली प्रांतीय टोली की बैठक छत्तीसगढ़ में आरएसएस के संगठनात्मक पुनर्गठन के लिहाज से अहम मानी जा रही है। अब सबकी नजरें कल की बैठक पर हैं, जहां प्रस्तावित बदलावों को लेकर आगे की तस्वीर स्पष्ट हो सकती है।
