UNESCO की विश्व धरोहर सूची में चमकेगा सिरपुर, छत्तीसगढ़ की विरासत को मिलेगी वैश्विक पहचान
रायपुर : छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। महासमुंद जिले में महानदी के तट पर स्थित प्राचीन ऐतिहासिक नगरी सिरपुर को यूनेस्को की विश्व धरोहर की संभावित सूची में शामिल किया गया है। राजधानी रायपुर से करीब 78 किलोमीटर दूर स्थित सिरपुर प्राचीन भारत की उस समृद्ध सभ्यता का प्रतीक है, जहां हिंदू, बौद्ध और जैन धर्म से जुड़े स्मारक एक ही ऐतिहासिक क्षेत्र में मौजूद हैं। अब इसे स्थायी विश्व धरोहर का दर्जा दिलाने के लिए नामांकन की अगली प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बताया छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सिरपुर के यूनेस्को की संभावित सूची में शामिल होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि सिरपुर हमारी सभ्यता, कला, आध्यात्मिकता और ज्ञान परंपरा की अनमोल धरोहर है। प्राचीन काल से ही यह शिक्षा, संस्कृति, धर्म और स्थापत्य कला का प्रमुख केंद्र रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘विरासत भी, विकास भी’ की भावना के अनुरूप देश की ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण और उन्हें वैश्विक पहचान दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ सरकार भी अपनी सांस्कृतिक संपदा को संरक्षित करते हुए पर्यटन की नई संभावनाएं विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। सिरपुर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और आने वाली पीढ़ियां अपनी गौरवशाली विरासत से बेहतर तरीके से परिचित हो सकेंगी।
1 वर्ष में तैयार होगा विस्तृत नामांकन दस्तावेज
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के रायपुर सर्कल के अधीक्षण पुरातत्वविद् एम कलिमुथु के अनुसार, सिरपुर का नाम संभावित सूची में दर्ज होने के बाद अब विस्तृत नामांकन दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस दस्तावेज को तैयार करने के लिए विभाग के पास एक वर्ष का समय है। इस दस्तावेज में सिरपुर के मुख्य पुरातात्विक क्षेत्र, बफर जोन, संरक्षण योजनाओं, प्रबंधन व्यवस्था और ऐतिहासिक महत्व से जुड़े तकनीकी प्रमाण शामिल किए जाएंगे। साथ ही यह स्पष्ट करना होगा कि सिरपुर वैश्विक स्तर पर असाधारण सांस्कृतिक महत्व क्यों रखता है। भारत में तकनीकी समीक्षा के बाद प्रस्ताव यूनेस्को के विश्व धरोहर केंद्र को भेजा जाएगा। इसके बाद संबंधित विशेषज्ञ संस्थाओं द्वारा स्थल का मूल्यांकन किया जा सकता है। इस प्रक्रिया में स्मारकों की प्रामाणिकता, संरक्षण और भविष्य की प्रबंधन व्यवस्था अहम भूमिका निभाएगी।
श्रीपुर के नाम से प्रसिद्ध था प्राचीन सिरपुर
इतिहास में ‘श्रीपुर’ के नाम से प्रसिद्ध सिरपुर कभी दक्षिण कोसल की राजधानी और सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र था। शरभपुरीय, पांडुवंशी और सोमवंशी शासकों के शासनकाल में इस नगर ने धार्मिक, स्थापत्य और शहरी विकास की उल्लेखनीय परंपराएं विकसित कीं। पांचवीं से बारहवीं शताब्दी के बीच सिरपुर का विशेष महत्व रहा। यहां हुई पुरातात्विक खुदाई में 22 शिव मंदिरों, 5 वैष्णव मंदिरों, 10 बौद्ध विहारों और 3 जैन विहारों के अवशेष मिलने की जानकारी है। इसके अलावा राजमहल परिसर, प्राचीन बाजार, अन्न भंडारण और जल निकासी व्यवस्था से जुड़े अवशेष भी सामने आए हैं। ये संरचनाएं बताती हैं कि सिरपुर केवल धार्मिक गतिविधियों का केंद्र नहीं था, बल्कि यहां व्यापार, प्रशासन और व्यवस्थित नागरिक जीवन का भी विकास हुआ था। सातवीं शताब्दी में भारत आए चीनी बौद्ध यात्री ह्वेनसांग के यात्रा विवरणों में भी इस क्षेत्र से जुड़े ऐतिहासिक संदर्भ मिलते हैं, जो सिरपुर की प्राचीन सांस्कृतिक पृष्ठभूमि को समझने में महत्वपूर्ण हैं।
लक्ष्मण मंदिर से लेकर बौद्ध विहारों तक, अनूठी है स्थापत्य विरासत
सिरपुर का लक्ष्मण मंदिर यहां की सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक संरचनाओं में शामिल है। लगभग सातवीं शताब्दी का यह मंदिर पकी हुई ईंटों से निर्मित प्राचीन भारतीय मंदिर स्थापत्य का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है। इसकी बनावट और स्थापत्य शैली प्राचीन भारत की तकनीकी दक्षता तथा शिल्पकला को प्रदर्शित करती है। इसके अलावा राम मंदिर, गंधेश्वर मंदिर और विभिन्न बौद्ध विहार सिरपुर की धार्मिक विविधता और ऐतिहासिक महत्ता को सामने लाते हैं। मंदिरों, विहारों और नागरिक संरचनाओं का एक ही क्षेत्र में मिलना इस स्थल को देश के महत्वपूर्ण पुरातात्विक केंद्रों में स्थान दिलाता है।
यूनेस्को के प्रस्ताव में शामिल हैं ये 9 प्रमुख स्मारक
सिरपुर के संभावित नामांकन प्रस्ताव में मुख्य पुरातात्विक क्षेत्र के भीतर नौ प्रमुख स्मारकों और संरचनात्मक समूहों को चिह्नित किए जाने की जानकारी दी गई है। जिसमें लक्ष्मण मंदिर, राम मंदिर, गंधेश्वर मंदिर, आनंदप्रभु कुटी विहार, स्वास्तिक विहार, प्राचीन बाजार परिसर, राजमहल परिसर, हर्षगुप्त एवं तीवरदेव बुद्ध विहार और बालेश्वर/बटेश्वर स्मारक समूह शामिल हैं। इन स्मारकों में प्राचीन धार्मिक स्थापत्य, बौद्ध परंपरा, व्यापारिक गतिविधियों और प्रशासनिक व्यवस्था के प्रमाण मिलते हैं। इन सभी को एक व्यापक ऐतिहासिक परिदृश्य के रूप में प्रस्तुत करना नामांकन प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण होगा।
इको-फ्रेंडली पर्यटन से जुड़ेगा सिरपुर
सिरपुर को विश्व धरोहर के मानकों के अनुरूप विकसित करने के लिए संरक्षण और पर्यटन के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पुरातात्विक क्षेत्र को चार हिस्सों में बांटकर विकसित करने की योजना है। इनमें बौद्ध मठ क्षेत्र, हिंदू मंदिर समूह, नागरिक-प्रशासनिक क्षेत्र और महानदी का तटीय क्षेत्र शामिल हैं। अधीक्षण पुरातत्वविद् एम कलिमुथु और सहायक पुरातत्व अभियंता राहुल तिवारी के अनुसार, इन क्षेत्रों को आपस में जोड़ने के लिए मुख्य हेरिटेज पाथवे विकसित करने की योजना है। प्रदूषण को कम करने के उद्देश्य से परिसर में बैटरी से चलने वाले वाहनों के उपयोग की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। इसके साथ ही आसपास के बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य और स्थानीय गोंड तथा बैगा समुदायों की संस्कृति, परंपराओं और हस्तशिल्प को भी पर्यटन से जोड़ने की संभावनाओं पर जोर दिया जा रहा है। इससे क्षेत्र की प्राकृतिक और सांस्कृतिक पहचान को एक साथ सामने लाने का अवसर मिल सकता है।
विश्व धरोहर का दर्जा मिलने से बढ़ेंगे पर्यटन और रोजगार के अवसर
यदि सिरपुर को भविष्य में स्थायी विश्व धरोहर का दर्जा मिलता है, तो इससे छत्तीसगढ़ की पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत हो सकती है। इतिहास, बौद्ध संस्कृति, मंदिर स्थापत्य और पुरातत्व में रुचि रखने वाले पर्यटकों का आकर्षण बढ़ने की संभावना है। पर्यटन गतिविधियों में वृद्धि से स्थानीय गाइड, होटल, परिवहन, भोजनालय, हस्तशिल्प और छोटे कारोबारों को लाभ मिल सकता है। साथ ही स्मारकों के संरक्षण, वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण और ऐतिहासिक स्थलों के बेहतर प्रबंधन को भी प्रोत्साहन मिल सकता है।
हालांकि, संभावित सूची में शामिल होना स्थायी विश्व धरोहर का दर्जा मिलने के समान नहीं है। इसके लिए विस्तृत दस्तावेज, तकनीकी मूल्यांकन और संरक्षण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करना होगा।
