बस्तर दशहरा में बड़ा हादसा, विजय रथ की चपेट में आने से ग्रामीण की मौत, दो व्यक्ति गंभीर घायल
जगदलपुर : छत्तीसगढ़ के विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा उत्सव के बीच एक दर्दनाक हादसे ने खुशियों के माहौल को मातम में बदल दिया। दशहरे की पारंपरिक ‘भीतर रैनी’ रस्म के दौरान आठ पहियों वाले विशालकाय विजय रथ की चपेट में आने से एक ग्रामीण की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद उत्सव स्थल पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार जारी है।
विजय रथ के नीचे आने से गई ग्रामीण की हुई मौत
मिली जानकारी के अनुसार, हादसे में जान गंवाने वाले ग्रामीण की पहचान कोपाराम कश्यप के रूप में हुई है। वह बास्तानार विकासखंड के सुरगुड़ा गांव के निवासी था। बताया जा रहा है कि कोपाराम कश्यप बस्तर दशहरा की पारंपरिक रस्म में शामिल होने के लिए पहुंचे था। इसी दौरान जगन्नाथ मंदिर परिसर में विजय रथ खींचते समय हादसा हो गया और कोपाराम कश्यप सहित कुछ लोग गिर गये, कोपाराम कश्यप रथ की चपेट में आ गए और रथ के नीचे आने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने तत्काल राहत पहुंचाने की कोशिश की। घायलों को एंबुलेंस की सहायता से अस्पताल भेजा गया। हादसे में घायल एक अन्य ग्रामीण की पहचान लोहंडीगुड़ा निवासी सुखराम मंडावी के रूप में बताई जा रही है, जबकि दूसरे घायल की पहचान की जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है।
आईजी बंगले के सामने भी हुआ हादसा
जानकारी के मुताबिक, लालबाग स्थित आईजी बंगले के सामने भी विजय रथ की चपेट में आने से एक व्यक्ति घायल हो गया। इस तरह उत्सव के दौरान अलग-अलग स्थानों पर हुए हादसों ने सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन को लेकर चिंता बढ़ा दी है। हालांकि, घटनाओं से जुड़ी विस्तृत परिस्थितियों और घायलों की वर्तमान स्थिति की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
हजारों ग्रामीणों की मौजूदगी में निभाई जाती है परंपरा
बस्तर दशहरा देश के सबसे विशिष्ट सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजनों में शामिल है। इसकी पहचान केवल रावण दहन से नहीं, बल्कि मां दंतेश्वरी के प्रति आस्था, आदिवासी परंपराओं और सदियों पुरानी रस्मों से जुड़ी हुई है। उत्सव में शामिल होने के लिए बस्तर संभाग के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में ग्रामीण और श्रद्धालु पहुंचते हैं। दशहरा पर्व की महत्वपूर्ण रस्मों में ‘भीतर रैनी’ और ‘बाहर रैनी’ का विशेष स्थान है। भीतर रैनी के दौरान मां दंतेश्वरी के छत्र को विजय रथ पर विराजित कर पारंपरिक विधि-विधान के साथ आगे ले जाने की रस्म निभाई जाती है। इस आयोजन में आठ पहियों वाले विशाल रथ को ग्रामीण सामूहिक रूप से खींचते हैं। निर्धारित परंपरा के अनुसार, रथ को जगदलपुर से लगभग चार किलोमीटर दूर कुम्हड़ाकोट के जंगल की ओर ले जाया जाता है। इस अनूठी परंपरा में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी होती है। ऐसे में रथ की गति, आसपास मौजूद लोगों की सुरक्षा और भीड़ को नियंत्रित करना बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।
