5वीं-8वीं बोर्ड परीक्षा में रद्दी कॉपियां: पेन चलाते ही फट रहे पन्ने, सच छिपाने अफसरों ने स्कूलों में मीडिया की एंट्री पर लगाई रोक

5वीं-8वीं बोर्ड परीक्षा में रद्दी कॉपियां: पेन चलाते ही फट रहे पन्ने, सच छिपाने अफसरों ने स्कूलों में मीडिया की एंट्री पर लगाई रोक

रायपुर। छत्तीसगढ़ में 5वीं और 8वीं की बोर्ड परीक्षाओं में शिक्षा विभाग की भारी लापरवाही सामने आई है। प्रदेशभर में बच्चों को परीक्षा के लिए ऐसी रद्दी क्वालिटी की प्रश्नपत्र-सह-उत्तरपुस्तिका (बुकलेट) बांटी गई है, जिस पर लिखते ही पन्ने फट जा रहे हैं। कागज की क्वालिटी इतनी घटिया और पतली है कि एक तरफ लिखने पर स्याही दूसरे पन्ने पर छप रही है। सबसे ज्यादा फजीहत गणित के पेपर में हुई है। यहां ज्यामितीय आकृतियां बनाने में बच्चों के पसीने छूट गए। कंपास (डिवाइडर) और स्केल का इस्तेमाल करते ही पन्नों में छेद हो गए। हद तो तब हो गई, जब अपनी इस नाकामी को सुधारने के बजाय शिक्षा विभाग के अफसरों ने स्कूलों में मीडिया की एंट्री पर ही बैन लगा दिया।

मीडिया टीम ने धमतरी, बालोद, कवर्धा, जांजगीर और अंबिकापुर समेत कई जिलों के परीक्षा केंद्रों की पड़ताल की। इस ग्राउंड रिपोर्ट में सिस्टम की पोल खुल गई।

 

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बालोद-धमतरी: स्केल रखते ही फट रहे पन्ने, नौकरी के डर से शिक्षक चुप

 

बालोद और धमतरी के परीक्षा केंद्रों में हालात बेहद खराब मिले। छात्रों ने बताया कि आंसर शीट का कागज इतना पतला है कि पेंसिल का हल्का दबाव पड़ते ही उसमें छेद हो रहा है। गणित के पेपर में त्रिभुज, वर्ग या आयत बनाने के लिए जैसे ही बच्चों ने स्केल से लाइन खींची, पन्ने ही फट गए। चौंकाने वाली बात यह है कि इस घोर लापरवाही पर केंद्राध्यक्ष और शिक्षक भी मुंह बंद किए बैठे हैं। उन्हें अपनी नौकरी जाने का डर सता रहा है, इसलिए उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों से इसकी शिकायत ही नहीं की। वहीं, बालोद के गुंडरदेही में एक नया ही कारनामा दिखा, जहां पेपर में दो सवाल आधे-अधूरे कटे हुए छपे मिले।

 

जांजगीर: 4 पेज में 20 सवाल, रफ काम के लिए जगह ही नहीं

 

इस बार विभाग ने प्रश्नपत्र और उत्तरपुस्तिका एक ही बुकलेट में दी है, लेकिन जवाब लिखने के लिए पर्याप्त जगह नहीं छोड़ी। जांजगीर जिले में 8वीं कक्षा के छात्रों को 4 पेज के पेपर में 20 सवालों के जवाब ठूंस-ठूंस कर लिखने पड़े। गणित जैसे विषय में रफ कार्य के लिए कोई जगह नहीं दी गई। जब बच्चों ने अलग से सप्लीमेंट्री कॉपी (अतिरिक्त उत्तरपुस्तिका) मांगी, तो उन्हें साफ मना कर दिया गया। जगह कम होने से बच्चे न तो ठीक से चित्र बना पा रहे हैं और न ही स्पष्ट जवाब लिख पा रहे हैं।

 

अंबिकापुर: डार्क पेन से लिखा तो बर्बाद हो गए दो पेज

 

अंबिकापुर में भी यही रोना है। यहां छात्रों को मजबूरन पतले पॉइंट वाले सस्ते बालपेन का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। पुलिस लाइन मिडिल स्कूल के बच्चों ने बताया कि जेल पेन या थोड़ी भी डार्क स्याही वाले पेन से लिखने पर पीछे के पेज पर भी अक्षर उभर आते हैं। इससे दोनों तरफ के जवाब पढ़ने में नहीं आते और पूरी कॉपी गंदी दिखती है।

 

सच सामने आया तो मीडिया पर पाबंदी, अफसर झाड़ रहे पल्ला

 

जब मीडिया ने इस मामले की पड़ताल कर सच सामने लाने की कोशिश की, तो अफसरों में हड़कंप मच गया। धमतरी में शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने कई स्कूलों के शिक्षकों को सीधा मौखिक फरमान सुना दिया कि मीडिया को स्कूल के अंदर न घुसने दिया जाए। वे गलती सुधारने के बजाय सच दबाने में जुट गए।

वहीं, अंबिकापुर (सरगुजा) के जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) डॉ. दिनेश कुमार झा ने पूरी जिम्मेदारी से ही पल्ला झाड़ लिया। उनका रटा-रटाया जवाब था कि पेपर सीलबंद लिफाफे में सीधे राज्य कार्यालय से आए हैं और उन्हें पन्ने खराब होने की कोई शिकायत नहीं मिली है।

शिक्षा विभाग की इस लापरवाही ने साल भर मेहनत करने वाले बच्चों को टेंशन में डाल दिया है। परीक्षा हॉल में पेपर फटने और जगह न होने से बच्चे परेशान हैं। सवाल यह है कि प्रदेश स्तर पर इतनी बड़ी परीक्षा के लिए बुकलेट छपाई के टेंडर में इतनी बड़ी धांधली कैसे हो गई और इसका जिम्मेदार कौन है?

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