झीरम घाटी केस का फाइनल राउंड: 13 साल बाद फैसले की आहट, आज बचाव पक्ष की आखिरी दलील
जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के सबसे चर्चित और दर्दनाक नक्सली हमलों में शामिल झीरम घाटी कांड से जुड़े मामले की न्यायिक प्रक्रिया अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। करीब 13 साल पुराने इस मामले में जगदलपुर जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर स्थित एनआईए की विशेष अदालत में अंतिम बहस शुरू हो चुकी है। सोमवार को अदालत ने पूरे दिन अभियोजन पक्ष की अंतिम दलीलें सुनीं, लेकिन न्यायालयीन समय समाप्त होने के कारण बहस पूरी नहीं हो सकी। अब आज बचाव पक्ष अपनी अंतिम दलीलें अदालत के सामने रखेगा। दोनों पक्षों की अंतिम बहस पूरी होने के बाद अदालत मामले में आगे की प्रक्रिया तय करेगी। इसके बाद फैसला सुरक्षित रखा जा सकता है या निर्णय सुनाने के लिए अगली तारीख निर्धारित हो सकती है।
13 साल पुराने मामले में अब ‘आखिरी दलीलों’ का दौर
झीरम घाटी हमले से जुड़े इस मामले की सुनवाई लंबे समय से न्यायिक प्रक्रिया में रही है। गवाहों के बयान, दस्तावेजी साक्ष्य और अन्य तथ्यों की सुनवाई के बाद अब मामला अंतिम बहस के चरण में पहुंच चुका है। सोमवार को एनआईए की विशेष अदालत में शासन की ओर से अभियोजन पक्ष ने मामले में उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी बिंदुओं के आधार पर अपनी अंतिम दलीलें पेश कीं। अदालत ने दिनभर अभियोजन की दलीलें सुनीं। हालांकि, न्यायालयीन समय समाप्त होने के कारण अंतिम बहस पूरी नहीं हो सकी। अब बचाव पक्ष को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा।
आज बचाव पक्ष रखेगा अपनी अंतिम दलील
आज की सुनवाई इस मामले के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बचाव पक्ष आरोपों, साक्ष्यों और अभियोजन की ओर से रखे गए तर्कों पर अपनी अंतिम दलील अदालत के सामने रखेगा। दोनों पक्षों की अंतिम बहस पूरी होने के बाद अदालत आगे की न्यायिक प्रक्रिया तय करेगी। अदालत चाहे तो फैसला सुरक्षित रख सकती है या निर्णय सुनाने के लिए अलग तारीख निर्धारित कर सकती है। यानी अब इस लंबे समय से चल रहे मामले में अंतिम बहस का दौर पूरा होने के बाद अगला बड़ा पड़ाव अदालत का फैसला होगा।
25 मई 2013 को दहली थी झीरम घाटी
झीरम घाटी हमला 25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के दौरान हुआ था। दरभा क्षेत्र की झीरम घाटी में नक्सलियों ने परिवर्तन यात्रा को निशाना बनाया था। हमले में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, वरिष्ठ आदिवासी नेता महेंद्र कर्मा और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल समेत कई लोगों की मौत हुई थी। इस हमले में सुरक्षाकर्मियों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं समेत बड़ी संख्या में लोगों की जान गई थी। घटना के बाद पूरे देश में शोक और आक्रोश का माहौल बना था। झीरम घाटी कांड को छत्तीसगढ़ के इतिहास के सबसे बड़े राजनीतिक और नक्सली हमलों में गिना जाता है।
101 गवाहों के बयान, अब मुकदमा अंतिम बहस तक
मामले में अभियोजन की ओर से अब तक 101 गवाहों के बयान अदालत में दर्ज कराए जा चुके हैं। गवाहों के बयान और उपलब्ध दस्तावेजी एवं अन्य साक्ष्यों की सुनवाई के बाद मुकदमा अब अंतिम बहस के चरण तक पहुंचा है। मामले में कुल 11 आरोपियों के खिलाफ अभियोजन चल रहा है। इनमें से एक आरोपी की मृत्यु हो चुकी है, जबकि शेष आरोपियों के खिलाफ न्यायिक प्रक्रिया जारी है। शासन की ओर से मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता दिनेश पाणिग्रही पैरवी कर रहे हैं।
गवाहों से लेकर अंतिम बहस तक पहुंची सुनवाई
झीरम घाटी मामले की न्यायिक प्रक्रिया के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत में विभिन्न गवाहों के बयान दर्ज कराए और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष रखा। लंबी सुनवाई के बाद अब अभियोजन पक्ष अपनी अंतिम दलील अदालत के सामने रख चुका है। इसके बाद बचाव पक्ष की बारी है। मंगलवार की सुनवाई में बचाव पक्ष की दलीलें पूरी होने के बाद अदालत के सामने मामले से जुड़े दोनों पक्षों का अंतिम कानूनी पक्ष स्पष्ट हो जाएगा।
शहीदों के परिजनों की नजर अब अदालत पर
झीरम घाटी हमले में जान गंवाने वाले नेताओं, सुरक्षाकर्मियों और अन्य लोगों के परिजन लंबे समय से इस मामले की न्यायिक प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए हैं।मामला अंतिम बहस के चरण में पहुंचने के बाद अब शहीदों के परिजनों के साथ राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों की निगाहें भी अदालत की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। 13 साल पहले हुई इस घटना से जुड़े मामले में अब अभियोजन की अंतिम दलील के बाद बचाव पक्ष का पक्ष सामने आना बाकी है। इसके बाद अदालत की ओर से आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।
