छत्तीसगढ़ जल संसाधन विभाग का अजब खेल: हाईकोर्ट के स्टे को ठेंगा, जूनियर को 'मलाईदार' कुर्सी, और सीनियर गड्ढे में
रायपुर । सरकार के सुशासन वाले दावों के बीच जल संसाधन विभाग से ऐसा मामला सामने आया है, जो प्रशासनिक नियमों की धज्जियां उड़ा रहा है। यह विभाग स्वयं मुख्यमंत्री के पास है। फिर भी, बिलासपुर हाईकोर्ट की अंतरिम रोक के बावजूद प्रमोशन और पोस्टिंग की फाइलें धड़ल्ले से दौड़ रही हैं। हालात ये हैं कि जूनियर अधिकारी प्रमोशन पाकर मलाईदार पदों पर बैठ गए हैं और अनुभवी सीनियर अपनी पुरानी कुर्सी पर ही अटके पड़े हैं।
हाईकोर्ट का आदेश दरकिनार
25 फरवरी 2026 को कार्यपालन अभियंता (सिविल) से अधीक्षण अभियंता (सिविल) के लिए प्रमोशन लिस्ट जारी हुई थी। लिस्ट को लेकर विवाद हुआ और मामला बिलासपुर हाईकोर्ट पहुंच गया।
- धर्मेंद्र मेश्राम और अन्य ने रिट याचिका (WPS 2653/2026) लगाई।
- 24 मार्च 2026 को हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश दिया कि अगली सुनवाई तक कोई नई पोस्टिंग न दी जाए।
- अभय आकोलेकर मामले (WPS 5742/2025) में भी 4 जुलाई 2025 को 'यथास्थिति' (Status Quo) का आदेश हो चुका था।
- बावजूद इसके, विभाग के प्रमुख अभियंता कार्यालय से लगातार पोस्टिंग के आदेश निकल रहे हैं।
बर्मन बनाम सिद्दीकी: काबिलियत पर भारी 'कृपा'
इस पूरे खेल को समझने के लिए दो अधिकारियों का उदाहरण काफी है। कार्यपालन अभियंता एस.के. बर्मन (गरियाबंद) और आई.ए. सिद्दीकी (रायपुर)। दोनों की तकदीर विभाग ने कैसे लिखी, इसे
विजुअल टाइम लाइन से समझते हैं....
एस.के. बर्मन EE बने (सीनियर) वर्ष 2021
एस.के. बर्मन ने कार्यपालन अभियंता (EE) का पद संभाला। नियमानुसार अगली पोस्ट (SE) के लिए 5 साल की उलटी गिनती शुरू।
आई.ए. सिद्दीकी EE बने (जूनियर) 28 जून 2023
आई.ए. सिद्दीकी कार्यपालन अभियंता बने। अनुभव और कैडर दोनों में बर्मन से पीछे।
कैबिनेट की 'विशेष मेहरबानी' 27 जनवरी 2026
नियमों में अचानक बदलाव। 2023 बैच (जिसमें सिद्दीकी आते हैं) को प्रमोशन के लिए सीधे 2 साल की विशेष छूट थमा दी गई।
अनुभव का असली गणित फरवरी 2026
एस.के. बर्मन: 5 साल से ज्यादा की सेवा पूरी। बिना किसी छूट के प्रमोशन के असली हकदार। आई.ए. सिद्दीकी: सेवा में मुश्किल से 2 साल 8 महीने। बिना विशेष छूट के प्रमोशन की रेस से ही बाहर।
नतीजा: एक को धक्का, दूसरे को 'सुपर जंप'
वर्तमान स्थिति
एस.के. बर्मन: हाईकोर्ट के स्टे का हवाला देकर गरियाबंद में उसी पुरानी कुर्सी (EE) पर बैठाए रखे गए। आई.ए. सिद्दीकी: स्टे को दरकिनार कर रायपुर में अधीक्षण अभियंता (SE) बनाए गए, और अब सीधे चीफ इंजीनियर (मुख्य अभियंता) का पावरफुल प्रभार भी सौंप दिया गया। 13 अगस्त 2026 को प्रमुख अभियंता कार्यालय (शिवनाथ भवन, नवा रायपुर) से आदेश (क्रमांक 3317020/छ.ग./2023) जारी हुआ। इसमें जूनियर होते हुए भी आई.ए. सिद्दीकी को मुख्य अभियंता (प्रबोधन) का भारी-भरकम अतिरिक्त प्रभार थमा दिया गया।
प्रमुख अभियंता बोले- 'सब सचिव के कहने पर'
कोर्ट के स्टे के बाद भी पोस्टिंग क्यों हो रही है? जब इस बारे में प्रमुख अभियंता (इंजीनियर-इन-चीफ) जितेंद्र नेताम से पूछा गया, तो उनका जवाब चौंकाने वाला था। उन्होंने पल्ला झाड़ते हुए कहा- "मैं ये सारे आदेश सचिव महोदय के निर्देश पर जारी कर रहा हूं।"
अगर आदेश सचिव के निर्देश पर हैं, तो जिम्मेदारी किसकी?
- जिस आदेश पर प्रमुख अभियंता के हस्ताक्षर हैं, क्या उसकी जवाबदेही वो नहीं लेंगे?
- सचिव की तरफ से इस पूरी गड़बड़ी पर अभी तक कोई बयान क्यों नहीं आया?
मुख्यमंत्री कार्यालय तक जाती है भूमिका...
अगस्त 2025 में हुए फेरबदल के बाद से जल संसाधन विभाग खुद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय संभाल रहे हैं। जब विभाग की कमान राज्य के मुखिया के हाथों में हो और वहीं अदालती आदेशों को ताक पर रखकर चहेतों को मनचाही पोस्टिंग दी जा रही हो, तो प्रशासनिक पकड़ पर प्रश्नचिह्न लगना लाजिमी है।
कुछ सुलगते सवाल.....
- डब्ल्यूपीएस 2653/2026 में हाईकोर्ट की रोक के बाद पोस्टिंग आदेश का आधार क्या है?
- सीनियर एस.के. बर्मन को पुराने पद पर क्यों रोक दिया गया, जबकि जूनियर को प्रमोशन देकर आगे बढ़ाया जा रहा है?
- क्या मुख्यमंत्री कार्यालय इस दोहरे मापदंड की कोई स्वतंत्र जांच कराएगा?
