एफएसएल में 85 लाख की डीएनए किट पहुंची, नियमों के विपरीत नियुक्त संचालक हटाए गए

एफएसएल में 85 लाख की डीएनए किट पहुंची, नियमों के विपरीत नियुक्त संचालक हटाए गए

रायपुर। राज्य न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) में पिछले कुछ समय से चल रही खामियों पर अब बड़ा सुधार देखने को मिला है। प्रयोगशाला में संचालक की नियुक्ति से लेकर डीएनए जांच किट की कमी तक के मुद्दे को मीडिया द्वारा लगातार उठाया गया था। अब इन दोनों ही मामलों में प्रशासन ने कार्रवाई की है। 154 से अधिक डीएनए जांच के रुके हुए मामले अब जल्द सुलझ सकेंगे, क्योंकि विभाग ने 85 लाख रुपये की नई किट खरीद ली है।

नियुक्ति पर उठे सवालों की हुई जांच

23 मई को प्रमुखता से यह खुलासा किया गया था कि एफएसएल में संचालक पद पर नियुक्ति निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं की गई है। खबर में विस्तार से बताया गया था कि नियुक्ति के समय नियमों का पालन नहीं हुआ है। इस खबर के बाद गृह विभाग ने इसे गंभीरता से लिया और पूरे मामले की जांच कराई गई। जांच पूरी होने के बाद तत्कालीन संचालक सुशील द्विवेदी को पद से हटा दिया गया। उनकी जगह पर अब अंकित गर्ग को प्रभारी संचालक की जिम्मेदारी सौंप दी गई है।

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154 गंभीर मामलों की जांच थी लंबित

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संचालक की नियुक्ति के अलावा प्रयोगशाला में एक और बड़ी परेशानी चल रही थी। यह बात भी उजागर की गई थी कि पिछले तीन माह से डीएनए जांच के लिए आवश्यक केमिकल किट की कमी बनी हुई है। इस केमिकल किट की कमी के कारण हत्या, दुष्कर्म और अन्य गंभीर अपराधों से संबंधित 154 से अधिक डीएनए जांच के मामले प्रयोगशाला में लंबित पड़े थे। इन मामलों की जांच रुकी होने के कारण पुलिस को भी परेशानी आ रही थी और न्याय मिलने में देरी हो रही थी।

85 लाख की किट खरीदी गई

लगातार 12 और 23 मई को खबर प्रकाशित होने के बाद एफएसएल प्रशासन ने इस ओर ध्यान दिया। डीएनए केमिकल किट की खरीदी प्रक्रिया में तेजी लाई गई। विभाग ने काम करते हुए अब तक करीब 85 लाख रुपये की डीएनए जांच के लिए आवश्यक केमिकल किट की खरीदी पूरी कर ली है। अधिकारियों के अनुसार केमिकल उपलब्ध होने के बाद अब डीएनए जांचों का तेजी से निष्पादन किया जाएगा। इससे लंबे समय से लंबित मामलों के निपटारे का रास्ता खुल गया है।

पुलिस विवेचना और न्यायालयीन प्रक्रिया को मिलेगी गति

एफएसएल में हुए इन प्रशासनिक और तकनीकी सुधारों से अब हत्या, दुष्कर्म, संदिग्ध मौत, साइबर अपराध और अन्य गंभीर मामलों की लंबित जांचों में तेजी आने की उम्मीद है। डीएनए रिपोर्ट किसी भी अपराध को सुलझाने में बड़ी भूमिका निभाती है। रिपोर्ट समय पर नहीं मिलने से पुलिस की जांच रुक जाती है। अब किट आ जाने से पुलिस विवेचना समय पर पूरी हो सकेगी। समय पर रिपोर्ट मिलने से चार्जशीट दाखिल करने और न्यायालयीन प्रक्रिया को भी गति मिलेगी।

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