अपोलो की लापरवाही: वेंटिलेटर वाले मरीज को बिना डॉक्टर निजी एंबुलेंस से एयरपोर्ट भेजा, ऑक्सीजन गिरा, एक दिन खड़ी रही एयर एंबुलेंस
बिलासपुर।अपोलो अस्पताल प्रबंधन की गंभीर लापरवाही सामने आई है। अस्पताल के गैर-जिम्मेदाराना रवैये के कारण गंभीर मरीज की जान खतरे में पड़ गई जिसके चलते परिजनों को मजबूरी में लाखों रुपए का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ा। जिस मरीज को सांस लेने के लिए वेंटिलेटर और डॉक्टरों की सख्त निगरानी की आवश्यकता थी, उसे अपोलो ने बिना किसी मेडिकल स्टाफ के निजी एंबुलेंस के भरोसे छोड़ दिया। नतीजा यह हुआ कि एयरपोर्ट पहुंचते-पहुंचते मरीज का ऑक्सीजन लेवल गिरकर 20 से 22% तक रह गया था। इसी कारण एयर एंबुलेंस को बुधवार को बिलासपुर में ही रोकना पड़ा।
लोक निर्माण विभाग में कार्यरत 54 वर्षीय राजकुमार अग्रवाल करीब 12 दिन पहले दोस्तों के साथ कोलकाता घूमने गए थे। वहां तबीयत बिगड़ने पर वे बिलासपुर लौटे और डॉक्टरों की सलाह पर चार दिन पहले उन्हें अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया। वे दोनों फेफड़ों में निमोनिया (बाइलेटरल न्यूमोनिया), एच1एन1 संक्रमण, श्वसन तंत्र विफलता और हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित थे। बुधवार दोपहर अपोलो के डॉक्टरों ने उन्हें हायर सेंटर रेफर करने की सलाह दी।
परिजनों ने आनन-फानन में 13 लाख रुपए खर्च कर हैदराबाद के यशोदा अस्पताल ले जाने के लिए एक एयर एंबुलेंस बुक की। यह एयर एंबुलेंस बुधवार शाम 7 बजे चकरभाठा एयरपोर्ट पहुंच भी गई। जब मरीज को अस्पताल से एयरपोर्ट ले जाने की बात आई, तो अपोलो परिसर में दो एंबुलेंस खड़ी होने के बावजूद प्रबंधन ने उन्हें देने से इनकार कर दिया। अस्पताल ने परिजनों को एक निजी एंबुलेंस वाले का नंबर थमा दिया।
क्रिटिकल कंडीशन के बावजूद अपोलो ने मरीज के साथ अपनी मेडिकल टीम या डॉक्टर नहीं भेजा। मरीज भगवान भरोसे निजी एंबुलेंस में रवाना कर दिया गया। अपोलो के डॉक्टरों ने एंबुलेंस में मरीज की जरूरत के हिसाब से किट या लाइफ सपोर्ट सिस्टम जांच करना भी जरूरी नहीं समझा।
डॉक्टरों की अनुपस्थिति और लापरवाही का नतीजा यह हुआ कि बुधवार को चकरभाठा एयरपोर्ट पहुंचते ही मरीज का ऑक्सीजन लेवल गिरकर महज 20 से 22% रह गया। मरीज की ऐसी हालत देखकर हैदराबाद आई एयर एंबुलेंस की टीम ने उन्हें ले जाने से मना कर दिया और मरीज को वापस अपोलो लाना पड़ा। एयर एंबुलेंस को रोकने के लिए परिजनों को 2 लाख रुपए अतिरिक्त खर्च देना पड़ा।
दूसरे दिन गुरुवार सुबह हैदराबाद से 3 डॉक्टरों की विशेष टीम बिलासपुर पहुंची। दिनभर अस्पताल में मरीज के स्वास्थ्य को स्थिर किया । परिजनों ने एक बार फिर निजी एंबुलेंस की इस बार हैदराबाद की टीम ने अपोलो के डॉक्टरों की तरह लापरवाही न दोहराते हुए। एंबुलेंस को पहले खुद बुलाकर अपने सामने सारे लाइफ सपोर्ट उपकरण चेक किए, ओके रिपोर्ट दी और उसके बाद मरीज को अपनी निगरानी में चकरभाठा एयरपोर्ट के लिए रवाना किया। वहां से मरीज को एयरलिफ्ट कर हैदराबाद के यशोदा अस्पताल भेजा गया।
मरीज को समय पर एयरपोर्ट पहुंचाने के लिए ट्रैफिक पुलिस ने संवेदनशीलता दिखाते हुए ग्रीन कॉरिडोर बनाया। एसएसपी रजनेश सिंह के निर्देश व एएसपी ट्रैफिक रामगोपाल करियारे के सुपरविजन में यातायात पुलिस ने मार्ग के सभी ट्रैफिक सिग्नल अस्थायी रूप से बंद कर दिए और चौक-चौराहों पर जवानों की तैनाती की।
दूसरी तरफ, अपोलो अस्पताल की घोर लापरवाही के खिलाफ पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष विजय केशरवानी ने एसएसपी रजनेश सिंह से मुलाकात कर कार्रवाई की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि इस लापरवाही से मरीज की जान जोखिम में पड़ी और परिजनों पर भारी आर्थिक बोझ बढ़ा। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए एसएसपी ने अपोलो प्रबंधन को फटकार लगाई और तत्काल व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए।
