CG High Court Verdict: न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग पर हाईकोर्ट की टिप्पणी, 5 आरोपियों के खिलाफ मामला खत्म
बिलासपुर: Chhattisgarh High Court ने एक महत्वपूर्ण आदेश में बिलासपुर के सिरगिट्टी थाने में दर्ज मारपीट और लूट के मामले की एफआईआर को निरस्त कर दिया है। अदालत ने कहा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों को यथावत मान भी लिया जाए, तब भी कथित अपराध के आवश्यक तत्व प्रथम दृष्टया स्थापित नहीं होते। ऐसे में आपराधिक कार्यवाही जारी रखना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग माना जाएगा।
यह फैसला मुख्य न्यायाधीश Ramesh Sinha और न्यायमूर्ति Ravindra Kumar Agrawal की खंडपीठ ने सुनाया। अदालत ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्धारित सिद्धांतों का हवाला देते हुए कहा कि जब आरोपों में कानूनी आधार स्पष्ट न हो, तो अभियोजन को आगे बढ़ाना उचित नहीं है।
मामले के अनुसार, 7 सितंबर 2024 को पांच व्यक्तियों सुमन यादव, इंदु चंद्रा, नंद राठौर, मोहम्मद इस्लाम और राहुल जायसवाल के खिलाफ ग्रामीण बैंक तिफरा के पास मारपीट और सोने की चेन लूटने का आरोप लगाते हुए अपराध दर्ज किया गया था। भारतीय न्याय संहिता, 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला कायम किया गया था।
याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट में दलील दी कि एफआईआर दर्ज करने में लगभग 13 घंटे की देरी हुई, जो घटनाक्रम पर संदेह पैदा करती है। उनका कहना था कि घटना से पहले उन्होंने स्वयं 112 डायल और मोबाइल ऐप के जरिए शिकायत दर्ज कराई थी। साथ ही, सीसीटीवी फुटेज उनके पक्ष में होने का दावा भी पेश किया गया। उन्होंने इसे प्रतिशोधवश दर्ज ‘काउंटर ब्लास्ट’ एफआईआर बताया।
राज्य की ओर से तर्क दिया गया कि शिकायत में संज्ञेय अपराध का उल्लेख है, जांच पूरी हो चुकी है और चालान भी प्रस्तुत किया जा चुका है। हालांकि, अदालत ने उपलब्ध रिकॉर्ड और परिस्थितियों का विश्लेषण करते हुए पाया कि अभियोजन की कहानी में गंभीर विसंगतियां हैं। अंततः हाईकोर्ट ने अपराध क्रमांक 624/2024 को पांचों याचिकाकर्ताओं के खिलाफ पूरी तरह से क्वैश कर दिया। इस फैसले को न्यायिक विवेक और प्रक्रिया के दुरुपयोग पर स्पष्ट टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है।
