CGPSC घोटाले में दागी पटेरिया को बड़ा ईनाम बिलासपुर यूनिवर्सिटी की सौंपी कमान,टामन को पैसे देकर बेटे को डिप्टी कलेक्टर बनवाने का है आरोप रायगढ़ में भी रहे थे फेल !

CGPSC घोटाले में दागी पटेरिया को बड़ा ईनाम बिलासपुर यूनिवर्सिटी की सौंपी कमान,टामन को पैसे देकर बेटे को डिप्टी कलेक्टर बनवाने का है आरोप रायगढ़ में भी रहे थे फेल !

रायपुर।विवादों में घिरे रहने वाले प्रो ललित पटेरिया की बिलासपुर के अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय में बतौर कुलपति नियुक्ति ने पूरे प्रदेश में हलचल मचा दी है। एक तरफ सरकार सुशासन और पारदर्शी व्यवस्था की बात करती है वहीं दूसरी तरफ ऐसे चेहरों को शिक्षा के अहम संस्थानों का मुखिया बनाया जा रहा है जिन पर प्रदेश के सबसे बड़े सीजीपीएससी घोटाले से जुड़े होने के गंभीर आरोप हैं। हाल ही में 30 और 31 मार्च 2026 को जारी हुए आदेश के बाद से ही बिलासपुर के छात्र संगठनों और शिक्षा जगत में भारी गुस्सा है। सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या सरकार को बिलासपुर यूनिवर्सिटी चलाने के लिए कोई साफ सुथरी छवि वाला शिक्षाविद नहीं मिला जो पहले से दागी पटेरिया को यह कुर्सी सौंप दी गई।

 

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सीजीपीएससी घोटाले से जुड़े तार और पैसों के लेन देन का आरोप

 

ललित पटेरिया का नाम सबसे ज्यादा तब उछला जब उनके बेटे श्रेयांश पटेरिया ने सीजीपीएससी 2022 की परीक्षा में टॉप 10 में तीसरी रैंक हासिल कर डिप्टी कलेक्टर का पद पाया। उस समय श्रेयांश ने अपनी इस बड़ी सफलता का श्रेय रोज शाम को फुटबॉल खेलने को दिया था और कहा था कि सफलता चाहिए तो फुटबॉल खेलो। लेकिन अब इस सफलता के पीछे की असली कहानी पर्त दर पर्त खुल रही है। पुख्ता सूत्रों की मानें तो सीजीपीएससी घोटाले के समय जिन प्रभावशाली लोगों ने अपने रसूख और पैसे का इस्तेमाल किया उनमें पटेरिया का नाम भी प्रमुखता से लिया जा रहा है।

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चर्चा इस बात की जोरों पर है कि तत्कालीन राज्यपाल के सचिव के माध्यम से प्रो ललित पटेरिया ने अपने बेटे की डिप्टी कलेक्टर पद पर नियुक्ति के लिए पीएससी के तत्कालीन चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी को एक बहुत बड़ी रकम पहुंचाई थी। यह वही दौर था जब पीएससी में भाई भतीजावाद अपने चरम पर था और योग्य छात्रों को किनारे कर रसूखदारों के बच्चों को नौकरियां बांटी जा रही थीं।

पटेरिया के कथित करीबी टामन सिंह सोनवानी फिलहाल रायपुर की जेल में बंद हैं और सीबीआई जांच का सामना कर रहे हैं। फरवरी 2026 में हाईकोर्ट ने उनकी दूसरी जमानत याचिका भी यह कहकर खारिज कर दी कि वे इस पूरे भर्ती महाघोटाले के मुख्य सूत्रधार हैं। सीबीआई की जनवरी 2026 की फाइनल चार्जशीट में साफ है कि सोनवानी ने अपने बेटे नितेश बहू निशा भतीजे साहिल और अन्य रिश्तेदारों को नियमों में धांधली कर और पेपर लीक कर बड़े पदों पर बैठाया। इसके अलावा उन्होंने उद्योगपति श्रवण कुमार गोयल से 45 लाख रुपये की भारी भरकम रिश्वत लेकर उनके बेटे बहू को भी डिप्टी कलेक्टर बनवाया था। ऐसे भ्रष्ट और जेल में बंद व्यक्ति के साथ पटेरिया के कथित आर्थिक लेन देन की खबरें बिलासपुर विश्वविद्यालय के भविष्य के लिए खतरे की घंटी हैं।

रायगढ़ में भी विवादों का रहा है लंबा इतिहास

प्रो पटेरिया का विवादों से नाता सिर्फ पीएससी तक सीमित नहीं है। नवंबर 2020 से नवंबर 2025 तक शहीद नंदकुमार पटेल विश्वविद्यालय रायगढ़ के कुलपति के रूप में उनका कार्यकाल भारी प्रशासनिक और वित्तीय अनियमितताओं के लिए जाना जाता है। साल 2023 में उनके राज में रायगढ़ और जांजगीर चांपा के लॉ संकाय में तीसरे सेमेस्टर के 90 प्रतिशत छात्र एक साथ फेल कर दिए गए। एलएलबी और एलएलएम के अन्य सेमेस्टरों में भी 80 से 90 प्रतिशत छात्र फेल हुए। जब छात्रों ने मूल्यांकन की जांच और मॉडल आंसर शीट की मांग को लेकर बवाल काटा तो पटेरिया ने अपनी नाकामी छिपाने के लिए इसे कोरोना के बाद पहली ऑफलाइन परीक्षा का नतीजा बता दिया।

कार्यकाल खत्म होने के बाद भी लिए नियम विरुद्ध वित्तीय फैसले

पटेरिया की कुर्सी का मोह और वित्तीय फैसलों में उनकी जल्दबाजी भी सवालों के घेरे में रही है। 24 नवंबर 2025 को रायगढ़ में उनका नियमित कार्यकाल समाप्त हो चुका था। इसके बाद भी अंतरिम अधिकारों का गलत इस्तेमाल करते हुए उन्होंने अगले पांच साल के लिए भारी मात्रा में उत्तर पुस्तिकाओं की खरीद का टेंडर पास कर दिया। जबकि नई शिक्षा नीति लागू होने के बाद परीक्षा का पूरा सिस्टम बदल रहा है और यूनिवर्सिटी के पास इतनी कॉपियां रखने के लिए भंडारण की जगह तक नहीं है। अपने इसी रसूख को कायम रखने और कुर्सी बचाने के लिए उन्होंने फरवरी 2026 में अचानक रायपुर जाकर राजभवन में दौड़ भी लगाई थी।

विवादित चेहरे को बिलासपुर की जिम्मेदारी क्यों

अब प्रदेश का युवा और बिलासपुर की जनता सरकार से सीधा सवाल कर रही है। जिस व्यक्ति पर अपने पद का दुरुपयोग करने छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने और सीजीपीएससी जैसे कलंकित घोटाले में पैसे देकर अपने बेटे को डिप्टी कलेक्टर बनवाने के गंभीर आरोप लग रहे हों उसे बिलासपुर यूनिवर्सिटी का कुलपति क्यों बनाया गया। क्या रायगढ़ में शिक्षा का बंटाधार करने के बाद अब बिलासपुर के छात्रों के भविष्य को दांव पर लगाया जा रहा है। लोग मांग कर रहे हैं कि सरकार को इस नियुक्ति पर तत्काल रोक लगानी चाहिए और सीजीपीएससी मामले में पटेरिया की भूमिका की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए।

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