स्कूल के पास कचरे में लाखों की दवाइयां, स्वास्थ्य केंद्र की लापरवाही उजागर

स्कूल के पास कचरे में लाखों की दवाइयां, स्वास्थ्य केंद्र की लापरवाही उजागर

पेण्ड्रा : गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही (जीपीएम) जिले के मरवाही विकासखंड स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सेमरदर्री में स्वास्थ्य सेवाओं और मेडिकल वेस्ट प्रबंधन को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आई है । स्वास्थ्य केंद्र के पास सड़क किनारे कचरे के ढेर में बड़ी मात्रा में दवाइयां और सिरप की सामग्री खुले में पड़ी मिली है । स्थानीय लोगों के अनुसार, कचरे में मिली दवाइयों की कीमत लाखों रुपये में हो सकती है । हालांकि, दवाइयों की वास्तविक कीमत, उनकी वैधता और उन्हें खुले में फेंके जाने के कारण का पता जांच के बाद ही चल सकेगा ।

सबसे गंभीर बात यह है कि जिस स्थान पर दवाइयां और मेडिकल वेस्ट खुले में पड़ा मिला है, उसके आसपास ही हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूल संचालित होते हैं । यहां रोजाना बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं का आना-जाना रहता है । ऐसे में सड़क किनारे खुले में पड़ी दवाइयां और मेडिकल सामग्री बच्चों के लिए भी खतरा बन सकती हैं । कोई बच्चा अनजाने में दवा उठा ले या मेडिकल वेस्ट के संपर्क में आ जाए तो गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है ।

दवाइयों के खुले में मिलने से उठे सवाल

स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों के उपचार के लिए शासन की ओर से दवाइयां उपलब्ध कराई जाती हैं । ऐसे में बड़ी मात्रा में दवाइयों का कचरे के ढेर में मिलना कई प्रश्न खड़े करता है । आखिर इतनी मात्रा में दवाइयां सड़क किनारे कैसे पहुंचीं? क्या ये दवाइयां उपयोग के योग्य नहीं थीं, एक्सपायर हो चुकी थीं या किसी अन्य कारण से इन्हें अनुपयोगी घोषित किया गया था? यदि दवाइयां अनुपयोगी थीं तो उनका नियमानुसार निस्तारण क्यों नहीं किया गया? स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र के आसपास इस तरह मेडिकल वेस्ट का खुले में पड़ा मिलना स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रश्न खड़ा करता है । लोगों ने पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदार कर्मचारियों और अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है ।

मेडिकल वेस्ट के निस्तारण के लिए तय नियम

स्वास्थ्य संस्थानों से निकलने वाले जैव-चिकित्सीय कचरे का सामान्य कचरे की तरह खुले में निस्तारण नहीं किया जा सकता । अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों से निकलने वाली दवाइयां, इस्तेमाल की गई चिकित्सा सामग्री और अन्य जैव-चिकित्सीय अपशिष्ट का सुरक्षित तरीके से अलग-अलग संग्रहण और अधिकृत व्यवस्था के माध्यम से निस्तारण किया जाना आवश्यक है ।

इसके बावजूद यदि दवाइयां और मेडिकल वेस्ट सड़क किनारे कचरे के ढेर में खुले में फेंका गया है तो यह गंभीर लापरवाही मानी जा सकती है । इससे न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचने की आशंका है, बल्कि आसपास रहने वाले लोगों और स्कूल जाने वाले बच्चों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है ।

जांच के बाद सामने आएगी असली तस्वीर

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि कचरे में मिली दवाइयां कितनी मात्रा में हैं और उनकी कुल कीमत कितनी है । दवाइयों के बैच नंबर, निर्माण और समाप्ति तिथि तथा स्टॉक रजिस्टर की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि ये दवाइयां स्वास्थ्य केंद्र के स्टॉक का हिस्सा थीं या किसी अन्य स्रोत से यहां पहुंची हैं ।

मामले में स्वास्थ्य विभाग को मौके पर मिले मेडिकल वेस्ट की जांच कराने के साथ-साथ स्वास्थ्य केंद्र के दवा स्टॉक और रिकॉर्ड की भी जांच करनी चाहिए । यदि जांच में दवाइयों को जानबूझकर नियमों के विपरीत खुले में फेंकने की पुष्टि होती है तो संबंधित जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जरूरत होगी । स्कूल के पास खुले में मेडिकल वेस्ट और बड़ी मात्रा में दवाइयों का मिलना इस पूरे मामले को और गंभीर बना रहा है । अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और जांच में दवाइयों को खुले में फेंकने के पीछे किसकी लापरवाही सामने आती है ।

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