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एयू परीक्षा में बड़ा फर्जीवाड़ा अजय जायसवाल के कॉलेज में पकड़ी गई धांधली हाजिरी पांच की लगी और केंद्राध्यक्ष खुद लिख रहा था कॉपियां सेंटर निरस्त
शिक्षा के नाम पर नकल का बड़ा खेल चल रहा है। अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय की मुख्य परीक्षा में धांधली की सारी हदें पार कर दी गईं। परीक्षा हॉल में सिर्फ दो छात्र बैठे थे। लेकिन हाजिरी पांच की लगी थी। बाकी तीन छात्रों की कॉपियां खुद केंद्राध्यक्ष के कमरे में लिखी जा रही थीं। यह पूरा मामला गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के मेडूका स्थित कॉलेज ऑफ एजुकेशन का है। यह कॉलेज अजय जायसवाल का है। अजय जायसवाल के इस कॉलेज में नकल माफिया इतने बेखौफ हैं कि उन्होंने चोरी पकड़े जाने के डर से सीसीटीवी कैमरे तक बंद कर दिए थे। उड़नदस्ता टीम की अचानक हुई छापेमारी ने इस पूरे फर्जीवाड़े की पोल खोल दी। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने कड़ा एक्शन लिया है। इस कॉलेज का परीक्षा केंद्र तुरंत निरस्त कर दिया गया है।
अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय से जुड़े कॉलेजों में इन दिनों मुख्य परीक्षाएं चल रही हैं। दूर दराज के इलाकों में नकल माफिया पूरी तरह सक्रिय हैं। इसी कड़ी में अट्ठाईस मार्च की सुबह एक बड़ी कार्रवाई हुई। प्रथम पाली की परीक्षा चल रही थी। सुबह करीब नौ बजकर पच्चीस मिनट पर विश्वविद्यालय की उड़नदस्ता टीम अचानक मेडूका के इस कॉलेज पहुंच गई। टीम सीधे परीक्षा कक्ष में घुसी। वहां का नजारा देखकर अधिकारी हैरान रह गए। कमरे में सिर्फ दो परीक्षार्थी परीक्षा दे रहे थे। जब टीम ने उपस्थिति रजिस्टर चेक किया तो उसमें पांच छात्रों की हाजिरी लगी हुई थी। उड़नदस्ता टीम ने तुरंत वहां मौजूद वीक्षक से सवाल जवाब शुरू किए। अधिकारियों ने पूछा कि जब कमरे में दो ही छात्र हैं तो पांच की हाजिरी कैसे लगी। बाकी तीन छात्र और उनकी कॉपियां कहां हैं। वीक्षक घबरा गया। उसने बताया कि बाकी तीन कॉपियां केंद्राध्यक्ष अपने साथ ले गए हैं।
यह सुनते ही उड़नदस्ता टीम सीधे केंद्राध्यक्ष के कमरे यानी परीक्षा नियंत्रण कक्ष में पहुंच गई। वहां जो मिला उसने पूरी परीक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी। केंद्राध्यक्ष के पास वो तीनों संदिग्ध कॉपियां मौजूद थीं। टीम ने तुरंत कॉपियों को अपने कब्जे में लिया और जांच शुरू की। गड़बड़ी बहुत बड़ी थी। एक मुख्य उत्तर पुस्तिका और एक सप्लीमेंट्री कॉपी में छात्र की कोई जानकारी ही दर्ज नहीं थी। वे एकदम कोरी थीं। वहीं दो अन्य कॉपियों के कवर पेज पर एक ही हैंडराइटिंग में पूरा विवरण भरा हुआ था। इसका सीधा मतलब था कि कोई एक ही व्यक्ति बैठकर इन छात्रों की कॉपियां लिख रहा था। इन तीनों कॉपियों में वीक्षक के हस्ताक्षर भी नहीं थे। हाजिरी रजिस्टर की जांच करने पर पता चला कि उसमें सिर्फ उन्हीं दो छात्रों के दस्तखत थे जो कमरे में बैठे थे। बाकी तीन गायब थे।
इस फर्जीवाड़े को छिपाने के लिए कॉलेज प्रबंधन ने पूरी साजिश रची थी। शक होने पर उड़नदस्ता टीम ने सीसीटीवी रिकॉर्डिंग खंगालनी शुरू की। यहां भी बड़ा खेल सामने आया। परीक्षा कक्ष के कैमरे में केवल चार मिनट की रिकॉर्डिंग मिली। फुटेज सुबह नौ बजकर सोलह मिनट से नौ बजकर बीस मिनट तक का ही था। इस छोटे से फुटेज में भी कमरे में बैठे दोनों छात्र आपस में बेधड़क बातचीत करते नजर आ रहे थे। उस समय कमरे में वीक्षक मौजूद ही नहीं था। सबसे बड़ी बात यह थी कि केंद्राध्यक्ष और नियंत्रण कक्ष का सीसीटीवी कैमरा पूरी तरह बंद कर दिया गया था। कैमरे जानबूझकर बंद किए गए थे ताकि कॉपियां लिखते हुए कोई रिकॉर्डिंग न हो सके।
उड़नदस्ता टीम ने तुरंत एक्शन लिया। मौके से सभी पांचों उत्तर पुस्तिकाओं को सीलबंद कर दिया गया। इन्हें सीधे विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक को सौंप दिया गया है। केंद्राध्यक्ष और वीक्षक की इस घोर लापरवाही और मिलीभगत पर लिखित जवाब मांगा गया है। मामला सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन तुरंत हरकत में आया है। कुलसचिव डॉ तारणीश गौतम ने इस घटना को बेहद गंभीरता से लिया है। फर्जीवाड़ा करने वाले अजय जायसवाल के कॉलेज ऑफ एजुकेशन मेडूका का परीक्षा केंद्र तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है। अब इस कॉलेज के छात्रों को आगे की परीक्षाओं के लिए शासकीय कॉलेज पेंड्रा में शिफ्ट कर दिया गया है। जो छात्र दिन रात मेहनत करते हैं उनके भविष्य के साथ यह सीधा खिलवाड़ है।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
