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भारत को पावर बैंक बनाएंगे एलन मस्क! Tesla की एनर्जी स्टोरेज सेक्टर में एंट्री की तैयारी
दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति एलन मस्क अब सिर्फ इलेक्ट्रिक कारों तक सीमित नहीं रहना चाहते. उनकी कंपनी टेस्ला भारत को एक बड़े एनर्जी हब में बदलने की तैयारी कर रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक टेस्ला अब भारत के तेजी से बढ़ते एनर्जी स्टोरेज सेक्टर में एंट्री की प्लानिंग कर रही है. यह कदम देश की बढ़ती बिजली जरूरत और रिन्यूएबल एनर्जी मिशन से जुड़ा है. अगर यह प्लान सफल होता है, तो भारत पावर बैंक की तरह काम कर सकता है.
EV के बाद अब एनर्जी मार्केट पर नजर
टेस्ला ने भारत में पहले ही इलेक्ट्रिक व्हीकल मार्केट में एंट्री कर ली है, लेकिन अब कंपनी अपना फोकस बदलती नजर आ रही है. EV बिक्री अभी सीमित है, ऐसे में कंपनी एनर्जी सेक्टर में बड़ा मौका देख रही है. टेस्ला के करियर पोर्टल पर नई जॉब पोस्टिंग से साफ हुआ है कि कंपनी भारत में सोलर और बैटरी स्टोरेज बिजनेस को बढ़ाना चाहती है. यह कदम दिखाता है कि टेस्ला सिर्फ कार कंपनी नहीं, बल्कि एक पूरी एनर्जी कंपनी बनने की दिशा में काम कर रही है.
Megapack और Powerwall से बदलेगा गेम
टेस्ला भारत में अपने दो बड़े प्रोडक्ट्स मेगापैक और पावरवॉल पर फोकस कर सकती है. मेगापैकबड़े पावर ग्रिड और इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट्स के लिए होता है, जबकि पावरवॉल घरों में इस्तेमाल के लिए डिजाइन किया गया है. ये सिस्टम बिजली को स्टोर करके जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल करने की सुविधा देते हैं. इससे बिजली की कमी और सप्लाई में उतार-चढ़ाव की समस्या को कम किया जा सकता है.
भारत में क्यों बढ़ रही है डिमांड
भारत का लक्ष्य 2030 तक 500 गीगावॉट नॉन-फॉसिल एनर्जी क्षमता हासिल करना है. इसके लिए बड़े स्तर पर सोलर और विंड प्रोजेक्ट्स लगाए जा रहे हैं. लेकिन इन स्रोतों से लगातार बिजली नहीं बनती, इसलिए स्टोरेज सिस्टम जरूरी हो जाते हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक 2024 तक देश में स्टोरेज कैपेसिटी तेजी से बढ़ रही है. ऐसे में टेस्ला के लिए यह बाजार काफी बड़ा और फायदेमंद साबित हो सकता है.
भारत में इन कंपनियों से होगी टक्कर
भारत में टेस्ला का रास्ता आसान नहीं होगा. भारत में इसका मुकाबला टाटा पावर, अदानी ग्रुप और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसे बड़े खिलाड़ी से है जो पहले से इस सेक्टर में निवेश कर रहे हैं. ये कंपनियां बैटरी टेक्नोलॉजी और पावर ग्रिड में लगातार सुधार कर रही हैं. हालांकि टेस्ला के पास ग्लोबल अनुभव और एडवांस टेक्नोलॉजी का फायदा है, जिससे वह इस मुकाबले में अपनी अलग पहचान बना सकती है.
कैसे काम करता है एनर्जी स्टोरेज सिस्टम?
एनर्जी स्टोरेज सिस्टम एक बड़े पावर बैंक की तरह काम करता है. जब बिजली ज्यादा बनती है, तो यह उसे स्टोर कर लेता है और जरूरत पड़ने पर वापस सप्लाई करता है. यह सिस्टम बिजली को केमिकल या अन्य फॉर्म में स्टोर करता है और फिर उसे वापस इलेक्ट्रिसिटी में बदल देता है. खासकर सोलर और विंड एनर्जी के साथ यह सिस्टम बेहद जरूरी होता है, क्योंकि ये 24 घंटे बिजली नहीं बनाते. यही वजह है कि भविष्य की एनर्जी व्यवस्था में स्टोरेज सिस्टम की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है.
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
