आज़ादी के दशकों बाद भी पानी के लिए संघर्ष: कबीरधाम के 35 बैगा परिवार नदी का गंदा पानी पीने को मजबूर, प्रशासन पर अनदेखी का आरोप
कबीरधाम। एक ओर सरकार हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले का एक आदिवासी गांव आज भी बुनियादी सुविधा के लिए संघर्ष कर रहा है। बोड़ला विकासखंड के बेलापानी गांव में रहने वाले बैगा जनजाति के करीब 35 परिवार बरसात के मौसम में भी नदी का मटमैला और दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से सुरक्षित पेयजल की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक न हैंडपंप लगा और न ही किसी स्थायी जल योजना का लाभ गांव तक पहुंच पाया है।
बरसात में और बढ़ जाता है संकट
ग्रामीणों के अनुसार गांव में पीने के पानी का कोई सुरक्षित स्रोत उपलब्ध नहीं है। मजबूरी में महिलाएं और बच्चे रोजाना नदी तक जाकर पानी भरते हैं और उसी पानी का उपयोग पीने, खाना बनाने तथा अन्य घरेलू कार्यों में करते हैं। बरसात के दिनों में नदी का पानी और अधिक गंदा व मटमैला हो जाता है। ऐसे पानी के उपयोग से डायरिया, उल्टी-दस्त, टाइफाइड और अन्य जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार दूषित पानी पीने के कारण लोगों की तबीयत भी खराब हुई है, लेकिन मजबूरी में उन्हें उसी पानी का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।
बाढ़ आने पर पानी लाना भी बन जाता है जोखिम
बारिश के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ने से हालात और गंभीर हो जाते हैं। ग्रामीण बताते हैं कि तेज बहाव के बीच नदी तक पहुंचना भी खतरे से खाली नहीं रहता। ऐसे समय में महिलाओं और बच्चों को जान जोखिम में डालकर पानी लाना पड़ता है। कई बार पूरा गांव पेयजल संकट से जूझने लगता है।
'कई बार शिकायत की, लेकिन समाधान नहीं मिला'
ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने कई बार ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत और संबंधित विभागों से सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था करने की मांग की, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में हैंडपंप लगाने और स्थायी पेयजल योजना की मांग वर्षों से की जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका यह भी आरोप है कि यह समस्या जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के संज्ञान में कई बार लाई गई, फिर भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।
जनप्रतिनिधियों पर वादाखिलाफी का आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के दौरान गांव में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के कई वादे किए गए थे, लेकिन आज भी गांव सुरक्षित पेयजल जैसी सबसे जरूरी सुविधा से वंचित है। उनका आरोप है कि समस्या की जानकारी उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा तक भी पहुंचाई गई, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया।
'जल जीवन मिशन' पर भी उठे सवाल
बेलापानी के ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि जब सरकार 'हर घर जल' और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने की बात करती है, तब उनका गांव अब तक इस सुविधा से क्यों वंचित है? ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था नहीं की गई तो आने वाले दिनों में स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं, जिसका सबसे अधिक असर बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ेगा।
प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गांव में जल्द से जल्द हैंडपंप स्थापित किए जाएं अथवा किसी स्थायी पेयजल योजना के माध्यम से स्वच्छ पानी उपलब्ध कराया जाए। उनका कहना है कि अब उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देने वाला समाधान चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियों को दूषित पानी पीने की मजबूरी से छुटकारा मिल सके.
