नेपाल में फिर उठी 'हिंदू राष्ट्र' की मांग: सुनसरी हिंसा के बाद आंदोलन तेज, भारत-नेपाल सीमा पर हाई अलर्ट; SSB की निगरानी बढ़ी
नई दिल्ली/काठमांडू। पड़ोसी देश नेपाल में एक बार फिर 'हिंदू राष्ट्र' की मांग को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज हो गई है। हाल के दिनों में इस मुद्दे ने नया जोर पकड़ लिया है और अब यह आंदोलन केवल पहाड़ी इलाकों तक सीमित नहीं रहकर तराई और मधेस क्षेत्र तक फैलता दिखाई दे रहा है। इस बीच नेपाल के सुनसरी जिले में हुई सांप्रदायिक हिंसा के बाद हालात संवेदनशील बने हुए हैं। नेपाल में बढ़ते तनाव को देखते हुए भारत ने भी उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और सिक्किम से लगी भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। सशस्त्र सीमा बल (SSB) और राज्य पुलिस को सीमावर्ती क्षेत्रों में अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
सुनसरी हिंसा के बाद तेज हुआ आंदोलन
पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि 26 जुलाई को सुनसरी जिले के देवागंज क्षेत्र में हुई हिंसक झड़प से जुड़ी बताई जा रही है। धार्मिक जुलूस के दौरान दो समुदायों के बीच विवाद हिंसा में बदल गया, जिसमें तीन प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई। इस घटना के बाद नेपाल के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। नेपाल सरकार के गृह मंत्री ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख नेपाली रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की, लेकिन इसके बावजूद आंदोलन थमता नजर नहीं आ रहा है।
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15 से ज्यादा हिंदूवादी संगठन एक मंच पर
नेपाल में अब 15 से अधिक हिंदूवादी संगठन एक साझा मंच पर आ चुके हैं। इनमें संयुक्त हिंदू मोर्चा, हिंदू सम्राट सेना, राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (RPP), महाकाल युवा शक्ति और हिंदू युवा संघ जैसे संगठन शामिल बताए जा रहे हैं। इन संगठनों ने 13 सूत्रीय मांगपत्र जारी करते हुए नेपाल को दोबारा हिंदू राष्ट्र घोषित करने सहित विभिन्न मांगें उठाई हैं। जनकपुर, कपिलवस्तु और तराई क्षेत्र के कई हिस्सों में लगातार बैठकें, सभाएं और प्रदर्शन आयोजित किए जा रहे हैं। आंदोलन से जुड़े नेताओं का दावा है कि यह अब किसी एक जिले का नहीं, बल्कि पूरे नेपाल का राष्ट्रीय मुद्दा बन चुका है।
भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा बढ़ी
नेपाल में बढ़ते तनाव के बीच भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने सीमावर्ती राज्यों में निगरानी और गश्त बढ़ा दी है।
बिहार सीमा
बिहार के मधुबनी जिले के बेतौहां और पिपरौन बॉर्डर पर नेपाल से आने-जाने वाले लोगों की बायोमैट्रिक जांच, फेस स्कैनिंग और पहचान दस्तावेजों की जांच की जा रही है। अररिया जिले में भी SSB और स्थानीय पुलिस संयुक्त रूप से फ्लैग मार्च कर रही है।
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उत्तर प्रदेश सीमा
उत्तर प्रदेश के पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, बहराइच, श्रावस्ती, महाराजगंज (सोनौली) और सिद्धार्थनगर (बढ़नी व ककहरवा) जैसे सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पुलिस और SSB संयुक्त रूप से संवेदनशील स्थानों पर गश्त कर रही हैं तथा आने-जाने वाले लोगों और वाहनों की जांच की जा रही है।
पश्चिम बंगाल और सिक्किम
सिलीगुड़ी सब-डिवीजन के पानीटंकी और मिरिक क्षेत्र में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। वहीं सिक्किम सीमा पर बिना वैध पहचान पत्र के किसी भी व्यक्ति को प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। सभी वाहनों की सघन जांच की जा रही है।
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SSB ने क्या कहा?
SSB के आईजी वंदन सक्सेना ने कहा कि भारत-नेपाल सीमा पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तत्काल कार्रवाई की जाए ताकि भारत की आंतरिक सुरक्षा पर किसी भी प्रकार का खतरा उत्पन्न न हो।
क्यों महत्वपूर्ण है यह घटनाक्रम?
नेपाल और भारत के बीच खुली सीमा व्यवस्था है, जिसके कारण दोनों देशों के नागरिकों की आवाजाही अपेक्षाकृत आसान रहती है। ऐसे में नेपाल के भीतर किसी भी बड़े आंदोलन, हिंसा या अस्थिरता का प्रभाव सीमावर्ती भारतीय जिलों पर भी पड़ सकता है। हालांकि फिलहाल भारत की ओर से सीमा बंद करने जैसी कोई घोषणा नहीं की गई है। सुरक्षा एजेंसियां केवल एहतियाती कदमों के तहत निगरानी बढ़ा रही हैं और हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। नेपाल में आंदोलन की दिशा और सरकार की आगामी रणनीति पर अब सभी की नजरें टिकी हुई हैं। वहीं भारत भी सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थिति पर लगातार निगरानी बनाए हुए है।
