Best Clay Pot Buying Guide: मिट्टी के बर्तन खरीदने से पहले जान लें ये वास्तु नियम, रविवार और मंगलवार को क्यों माना जाता है वर्जित?
Clay Pot Vastu Tips: मिट्टी के बर्तनों का उपयोग भारतीय घरों में सदियों से किया जाता रहा है। इनमें रखा पानी प्राकृतिक रूप से ठंडा रहता है और कई लोग मिट्टी के बर्तनों में खाना पकाना भी पसंद करते हैं। वहीं, वास्तु शास्त्र और पारंपरिक मान्यताओं में मिट्टी के बर्तन खरीदने के लिए कुछ विशेष नियम बताए गए हैं। आइए जानते हैं कि वास्तु मान्यताओं के अनुसार मिट्टी के बर्तन कब खरीदने चाहिए, किन दिनों में खरीदने से बचना चाहिए और सही बर्तन चुनते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
रविवार और मंगलवार को क्यों नहीं खरीदते मिट्टी के बर्तन?
वास्तु शास्त्र और कुछ पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, रविवार और मंगलवार को मिट्टी के बर्तन खरीदने से बचने की सलाह दी जाती है। मंगलवार को मंगल ग्रह और पृथ्वी तत्व से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन मिट्टी से बनी वस्तुएं घर लाना शुभ नहीं माना जाता। रविवार को भी कुछ परंपराओं में मिट्टी के बर्तन खरीदने से परहेज करने की सलाह दी जाती है।कुछ मान्यताओं में शनिवार को भी मिट्टी के बर्तन खरीदने से बचने की बात कही गई है। हालांकि, ये मान्यताएं धार्मिक और पारंपरिक विश्वासों पर आधारित हैं।
सूर्यास्त के बाद मिट्टी के बर्तन क्यों नहीं खरीदने चाहिए?
लोकमान्यताओं के अनुसार, मिट्टी के बर्तन दिन के समय खरीदना शुभ माना जाता है। सूर्यास्त के बाद या रात में नए मिट्टी के बर्तन घर लाने से बचने की सलाह दी जाती है। यदि नया घड़ा, मटका या अन्य मिट्टी का बर्तन खरीदना हो, तो दिन के उजाले में खरीदना बेहतर माना जाता है।
चमकदार या रंगीन बर्तन खरीदते समय रखें सावधानी
वास्तु मान्यताओं के अलावा स्वास्थ्य की दृष्टि से भी मिट्टी के बर्तन चुनते समय सावधानी जरूरी है।
- विशेषज्ञों के अनुसार अत्यधिक चमकदार या रासायनिक रंगों से रंगे बर्तन खरीदने से बचें।
- कुछ बर्तनों पर वार्निश या केमिकल कोटिंग की जाती है, जो लंबे समय तक उपयोग में स्वास्थ्य के लिए उपयुक्त नहीं हो सकती।
- यदि बर्तन पीने के पानी या खाना पकाने के लिए खरीद रहे हैं, तो प्राकृतिक और बिना रासायनिक कोटिंग वाले उत्पाद चुनना बेहतर माना जाता है।
अच्छी गुणवत्ता का मिट्टी का बर्तन कैसे पहचानें?
मिट्टी का बर्तन खरीदते समय इन बातों का ध्यान रखें
- बर्तन को हल्के से थपथपाकर देखें। यदि साफ और खनकदार आवाज आए, तो यह अच्छी तरह पका हुआ माना जाता है।
- यदि आवाज धीमी या दबी हुई हो, तो बर्तन अधपका हो सकता है।
- खरीदने से पहले उसमें पानी भरकर देखें कि कहीं से रिसाव तो नहीं हो रहा।
- दरार, टूट-फूट या कमजोर किनारों वाले बर्तन लेने से बचें।
वास्तु और व्यवहारिक दोनों पहलुओं का रखें ध्यान
वास्तु शास्त्र में बताए गए नियम आस्था और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। वहीं, व्यवहारिक रूप से मिट्टी के बर्तन खरीदते समय उनकी गुणवत्ता, स्वच्छता और उपयोगिता की जांच करना अधिक महत्वपूर्ण है, ताकि वे लंबे समय तक सुरक्षित और उपयोगी बने रहें।
Disclaimer: यह लेख वास्तु शास्त्र, धार्मिक मान्यताओं और पारंपरिक विश्वासों पर आधारित है। इन मान्यताओं की वैज्ञानिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। नेशनल जगत विज़न इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं करता। पाठकों से अनुरोध है कि इसे केवल आस्था और परंपरा के संदर्भ में ही पढ़ें।
