युवती के बाहर निकले दांतों का सिम्स में हुआ सफल सर्जरी, आयुष्मान कार्ड से परिजन के लाखों बचे

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राष्ट्रीय जगत विजन। बिलासपुर के सिम्स अस्पताल के दंत चिकित्सा विभाग के डॉक्टरों ने एक युवती बाहर निक ले दांतों की आर्थोगनेथिक सर्जरी सफलतापूर्वक की। जिससे चेहरे की मुस्कान लौट आई है। लाखों रुपए की लागत पर होने वाली इस सर्जरी को सिम्स के दंत चिकित्सा विभाग के डॉक्टरों ने आयुष्मान कार्ड के माध्यम से नि:शुल्क की है। जिससे युवती के परिवारों वालों को लाखों रुपए की बचत हुई है। युवती के मुस्कान को देखकर परिजनों में खुशी की लहर है। हसते समय दांत के बाहर दिखाई देने युवती नाखुश रहती थी वह अक्सर खुलकर हसने में भी कतराने लगती थी। सफल सर्जरी के बाद एक बार उनके चेहरे पर फिर से खुली मुस्कान लौट आई है। 

उपरी जबड़ा सामान्य से था बड़ा, हड्डियों को दिया सही आकार

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अपनी परेशानी लेकर वह सिम्स के दंत चिकित्सा विभाग पहुंची। आवश्यक एक्स-रे, सीटी स्कैन और रक्त जांच के बाद डॉक्टरों ने पाया कि उसका ऊपरी जबड़ा सामान्य से बड़ा था, होंठ छोटे थे, दांत बाहर निकले हुए थे, और निचला जबड़ा छोटा था। डॉक्टरों द्वारा उपचार की रूपरेखा तैयार की गई, जिसमें पहले दांतों में ब्रेसेस (तार) लगाकर उनके विन्यास को ठीक किया गया और उन्हें अंदर किया गया। इसके बाद सर्जरी के माध्यम से जबड़े की हड्डियों को सही आकार दिया गया।

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तीन चरणों में चली सर्जरी

पहले चरण में, ऊपरी जबड़े को काटकर छोटा किया गया, जिसे लेफोर्ट-1 ओस्टियोटोमी कहा जाता है। दूसरे चरण में, निचले जबड़े को आगे बढ़ाकर हड्डियों को बराबर किया गया, जिसे बाइलेटरल सैजिटल स्प्लिट ओस्टियोटोमी कहते हैं। अंतत:, ठुड्डी की हड्डी को सही आकार दिया गया, जिसे 'जीनियोप्लास्टी' कहते हैं। इस प्रकार, सभी हड्डियों को एक नए प्रारूप में व्यवस्थित किया गया, जिससे युवती को एक संतुलित चेहरा मिला। सिम्स प्रशासन का दावा है कि छत्तीसगढ़ का यह पहला मेडिकल कॉलेज अस्पताल है जहां दंत चिकित्सा विभाग द्वारा निरंतर इस प्रकार की आर्थोगनेथिक सर्जरी की जाती है। निजी अस्पतालों में इस तरह के इलाज पर आमतौर पर 2 से 3 लाख रुपये तक का खर्च आता है।

ऑपरेशन में इनका रहा सफल योगदान

इस ऑपरेशन दंत चिकित्सा विभाग के डॉ. भूपेन्द्र कश्यप के मार्गदर्शन में विभागाध्यक्ष एवं ओरल एंड मैक्सिलो-फेसिअल सर्जन डॉ. संदीप प्रकाश एवं उनकी टीम ने किया। डॉक्टरों की टीम में डॉ. जंडेल सिंह ठाकुर, डॉ. केतकी कीनीकर, डॉ. हेमलता राजमणि, डॉ. प्रकाश खरे, डॉ. सोनल पटेल, रेडियो-डायग्नेसिस विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह एवं निश्चेतना विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति शामिल रहे।

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