बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर लगेगा 'नाइट कर्फ्यू'? 13 साल से कम उम्र वालों पर बैन की मांग, दिल्ली हाईकोर्ट में 5 अगस्त को होगी अहम सुनवाई
नई दिल्ली। क्या आने वाले समय में भारत में बच्चों के लिए सोशल मीडिया इस्तेमाल करने के नियम पूरी तरह बदल सकते हैं? इसी सवाल के बीच दिल्ली हाईकोर्ट में दायर एक जनहित याचिका (PIL) ने देशभर में नई बहस छेड़ दी है। याचिका में 13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पूर्ण प्रतिबंध, जबकि 13 से 16 वर्ष के किशोरों के लिए 'नाइट कर्फ्यू' लागू करने की मांग की गई है। इस महत्वपूर्ण मामले पर अब 5 अगस्त को नई खंडपीठ सुनवाई करेगी।
बच्चों की सुरक्षा को लेकर अदालत पहुंचा मामला
याचिका में कहा गया है कि सोशल मीडिया की बढ़ती लत, अनुचित ऑनलाइन सामग्री और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहे प्रभाव बच्चों के विकास के लिए गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं। इसलिए केंद्र सरकार को बच्चों की डिजिटल सुरक्षा के लिए स्पष्ट और बाध्यकारी कानून बनाने का निर्देश दिया जाए। मामला मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष आया, लेकिन न्यायमूर्ति तेजस करिया ने स्वयं को सुनवाई से अलग कर लिया। इसके बाद अदालत ने मामले को नई पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करते हुए 5 अगस्त की तारीख तय की।
3 साल की बच्ची की मां और बाल रोग विशेषज्ञ ने दायर की याचिका
यह जनहित याचिका तीन वर्षीय बच्ची की मां कीर्ति दुआ और वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. शरद गुप्ता ने संयुक्त रूप से दायर की है। याचिका में केंद्र सरकार के कई मंत्रालयों के साथ-साथ प्रमुख सोशल मीडिया कंपनियों को भी पक्षकार बनाया गया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मौजूदा सुरक्षा उपाय पर्याप्त नहीं हैं और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए कानूनी व्यवस्था अनिवार्य होनी चाहिए।
याचिका में क्या-क्या मांगें रखी गई हैं?
याचिका में बच्चों और किशोरों की डिजिटल सुरक्षा के लिए कई बड़े सुझाव दिए गए हैं
- 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पूर्ण प्रतिबंध।
- 13 से 16 वर्ष के किशोरों के लिए 'नाइट कर्फ्यू', ताकि देर रात सोशल मीडिया उपयोग सीमित किया जा सके।
- सोशल मीडिया अकाउंट बनाने से पहले अनिवार्य आयु सत्यापन।
- बच्चों के लिए दिखाई जाने वाली सामग्री पर कड़ा नियमन।
- बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) से जुड़े लिंक और कंटेंट को तत्काल ब्लॉक करने की बाध्यता।
- आईटी कानून, डिजिटल डेटा सुरक्षा कानून और पॉक्सो कानून के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग।
मानसिक स्वास्थ्य और डिजिटल लत पर जताई चिंता
याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि अत्यधिक सोशल मीडिया उपयोग बच्चों में चिंता, अवसाद, नींद की समस्या और डिजिटल लत जैसी चुनौतियों को बढ़ा सकता है। उनका तर्क है कि ऑनलाइन उपलब्ध अनुचित सामग्री बच्चों के सुरक्षित विकास और संवैधानिक अधिकारों को प्रभावित करती है। याचिका में यह भी कहा गया है कि मौजूदा प्लेटफॉर्म-आधारित सुरक्षा व्यवस्थाएं अधिकतर स्वैच्छिक हैं, इसलिए सरकार को स्पष्ट कानूनी ढांचा तैयार करना चाहिए।
5 अगस्त की सुनवाई पर टिकी निगाहें
अब इस मामले की अगली सुनवाई 5 अगस्त को होगी। अदालत फिलहाल किसी भी प्रस्तावित नियम पर अंतिम निर्णय नहीं दे रही है। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार और संबंधित पक्षों का रुख भी महत्वपूर्ण रहेगा। यदि इस याचिका पर आगे कोई निर्देश जारी होते हैं, तो भारत में बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग से जुड़े नियमों पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।
