Bhopal Cyber Fraud: होटल ग्रुप को 1 करोड़ का ई-मेल फ्रॉड! 3 घंटे में 200 खातों में घुमा दी रकम, पुलिस ने 95 लाख कराए होल्ड

Bhopal Cyber Fraud: होटल ग्रुप को 1 करोड़ का ई-मेल फ्रॉड! 3 घंटे में 200 खातों में घुमा दी रकम, पुलिस ने 95 लाख कराए होल्ड

भोपाल। साइबर ठग अब सिर्फ आम लोगों को ही नहीं, बल्कि बड़ी कंपनियों और कारोबारी समूहों को भी बेहद शातिर तरीके से निशाना बना रहे हैं। भोपाल में ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां साइबर ठगों ने हेरिटेज होटल नूर-उस-सबाह पैलेस से जुड़े रिलायबल ग्रुप से करीब 1 करोड़ रुपये की ठगी कर ली। ठगों ने कंपनी की असली ई-मेल आईडी से मिलती-जुलती फर्जी आईडी बनाकर भुगतान से जुड़ी जानकारी भेजी। भरोसा होने पर ग्रुप ने बताए गए बैंक खाते में करीब 1 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए। लेकिन रकम पहुंचते ही ठगों ने उसे एक जगह रखने के बजाय कुछ ही घंटों में करीब 200 बैंक खातों में बांट दिया। राहत की बात यह रही कि समय रहते साइबर पुलिस तक शिकायत पहुंच गई और कार्रवाई करते हुए करीब 95 लाख रुपये की रकम होल्ड करा दी गई।

असली ई-मेल जैसी दिखने वाली ID से भेजा संदेश
रिलायबल ग्रुप के अकाउंटेंट संजय लाखोटिया के मुताबिक, 27 अगस्त को एक कंपनी को करीब 1 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाना था। इसी दौरान कथित ठगों ने संबंधित कंपनी की असली ई-मेल आईडी से मिलती-जुलती एक फर्जी ई-मेल आईडी से संपर्क किया। इसके बाद WhatsApp के जरिए भी बैंक खाते की जानकारी भेजी गई। ई-मेल और बैंक डिटेल देखकर इसे वास्तविक भुगतान संबंधी निर्देश समझ लिया गया और ग्रुप ने बताए गए खाते में रकम ट्रांसफर कर दी।

दो घंटे बाद खुला ठगी का राज
रकम ट्रांसफर होने के करीब दो घंटे बाद संबंधित कंपनी की ओर से बताया गया कि उन्हें भुगतान मिला ही नहीं है। यह सुनते ही ग्रुप को पूरे मामले पर शक हुआ। बैंक ट्रांजैक्शन की जानकारी जांची गई तो पता चला कि रकम गलत खाते में भेजी जा चुकी थी। इसके बाद बिना समय गंवाए साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत की गई।

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3 घंटे में 200 खातों में पहुंच गई रकम
शिकायत मिलते ही स्टेट साइबर पुलिस ने नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल यानी NCRP के जरिए रकम की मनी ट्रेल खंगालनी शुरू की। शुरुआती जांच में सामने आया कि रकम खाते में पहुंचते ही उसे तेजी से अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाने लगा। पुलिस के अनुसार, करीब तीन घंटे के भीतर 1 करोड़ रुपये की रकम देश के अलग-अलग राज्यों में मौजूद करीब 200 बैंक खातों तक पहुंचा दी गई। यानी ठगों ने रकम को इस तरह छोटे-छोटे हिस्सों में बांटना शुरू कर दिया कि उसके एक ही खाते में रहने की संभावना बेहद कम हो जाए।

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5 लाख रुपये निकालने में सफल हुए ठग
पुलिस के मुताबिक, ठग करीब 5 लाख रुपये निकालने में सफल रहे। हालांकि, साइबर हेल्पलाइन पर समय रहते शिकायत मिलने के कारण पुलिस ने बाकी रकम की मनी ट्रेल पकड़ने और संबंधित बैंकों से संपर्क कर रकम को रोकने की कार्रवाई शुरू कर दी।

पुलिस ने 95 लाख रुपये कराए होल्ड
साइबर पुलिस की त्वरित कार्रवाई के बाद अलग-अलग बैंक खातों में पहुंचाई गई करीब 95 लाख रुपये की रकम होल्ड कराई गई। साइबर अपराध की भाषा में शुरुआती कुछ समय को बेहद अहम माना जाता है। जितनी जल्दी शिकायत होती है, उतनी ही तेजी से बैंकिंग चैनल में मौजूद रकम को फ्रीज या होल्ड कराने की संभावना बढ़ती है। इस मामले में शिकायत जल्दी दर्ज होने का फायदा मिला और बड़ी रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोकने में पुलिस सफल रही।

फर्जी ई-मेल बना ठगी का सबसे बड़ा हथियार
इस पूरे मामले में सबसे अहम बात यह है कि ठगों ने कथित तौर पर ऐसी ई-मेल आईडी का इस्तेमाल किया, जो वास्तविक कंपनी की आईडी से मिलती-जुलती थी। यही छोटी-सी समानता भुगतान करने वाले व्यक्ति को भरोसा दिलाने के लिए काफी साबित हुई। इसके बाद WhatsApp के जरिए बैंक डिटेल साझा कर पूरी प्रक्रिया को सामान्य कारोबारी भुगतान जैसा दिखाने की कोशिश की गई।

FIR और पूरे नेटवर्क की जांच
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, मामले में नियमित FIR दर्ज होने की स्थिति स्पष्ट नहीं है। पुलिस ठगी में इस्तेमाल की गई फर्जी ई-मेल आईडी, बैंक खातों और रकम की पूरी मनी ट्रेल की जांच कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि 200 खातों का इस्तेमाल किस नेटवर्क ने किया और रकम को अलग-अलग खातों में भेजने के पीछे कौन लोग शामिल थे।

बड़ी रकम ट्रांसफर करने से पहले एक गलती न करें
यह मामला कंपनियों और कारोबारियों के लिए भी एक बड़ा सबक है। बड़ी रकम ट्रांसफर करने से पहले सिर्फ ई-मेल या WhatsApp पर मिली बैंक डिटेल पर भरोसा करना जोखिम भरा हो सकता है। खासकर अगर बैंक अकाउंट नंबर या भुगतान संबंधी जानकारी में अचानक बदलाव बताया जाए तो फोन कॉल या किसी दूसरे आधिकारिक माध्यम से इसकी पुष्टि जरूर करनी चाहिए।

‘गोल्डन ऑवर’ में शिकायत ने बचाई बड़ी रकम
करीब 1 करोड़ की ठगी के इस मामले में सबसे अहम बात शिकायत की टाइमिंग रही। रकम कई राज्यों के करीब 200 खातों में पहुंचने के बावजूद साइबर पुलिस ने तेजी से कार्रवाई कर 95 लाख रुपये होल्ड करा दिए। अब पुलिस के सामने चुनौती सिर्फ रकम की रिकवरी नहीं, बल्कि उस पूरे साइबर नेटवर्क तक पहुंचने की है, जिसने फर्जी ई-मेल से लेकर बैंक खातों की लंबी चेन तक इस कथित ठगी को अंजाम दिया।

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