116 करोड़ से अधिक का महाघोटाला! चंडीगढ़ में फर्जी FD, शेल कंपनियों और बड़े अफसरों की मिलीभगत का खुलासा, 600 पन्नों की रिपोर्ट से मचा हड़कंप

116 करोड़ से अधिक का महाघोटाला! चंडीगढ़ में फर्जी FD, शेल कंपनियों और बड़े अफसरों की मिलीभगत का खुलासा, 600 पन्नों की रिपोर्ट से मचा हड़कंप

चंडीगढ़। ‘सिटी ब्यूटीफुल’ चंडीगढ़ में सामने आए करोड़ों के घोटाले ने प्रशासनिक सिस्टम को झकझोर कर रख दिया है। 75 करोड़ के CREST घोटाले और 116.84 करोड़ के स्मार्ट सिटी फंड में कथित हेराफेरी की जांच अब उच्च स्तर तक पहुंच चुकी है। आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की जांच में कई प्रभावशाली नाम सामने आने से पूरे सिस्टम में हलचल तेज हो गई है।

मामले ने तब नया मोड़ लिया जब मुख्य आरोपी विक्रम वधावा और बैंक अधिकारियों ने पूछताछ के दौरान CREST के प्रोजेक्ट डायरेक्टर सुखविंदर सिंह का नाम लिया। चौंकाने वाली बात यह है कि वही इस केस के शिकायतकर्ता भी हैं। हालांकि अभी तक उन्हें औपचारिक रूप से आरोपी नहीं बनाया गया है, लेकिन उनकी भूमिका की गहन जांच जारी है।

जांच में सामने आया है कि घोटाले को अंजाम देने के लिए बेहद सुनियोजित तरीके अपनाए गए। सरकारी राशि को छिपाने के लिए कई फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट बनाए गए, जबकि रिकॉर्ड में केवल एक ही दर्शाया गया। बैंक खातों में 272 संदिग्ध ट्रांजैक्शन मिले हैं, जिनमें से 31 पूरी तरह फर्जी बताए जा रहे हैं। करोड़ों रुपये रिश्तेदारों के खातों और कथित शेल कंपनियों कैपको फिनटेक और मर्टल बिल्डवेल में ट्रांसफर किए गए। अधिकारियों को गुमराह करने के लिए जाली बैंक स्टेटमेंट ईमेल के जरिए भेजे जाते रहे।

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इस पूरे मामले में नगर निगम द्वारा तैयार की गई 600 पन्नों की आंतरिक रिपोर्ट ने जांच को और तेज कर दिया है। यह रिपोर्ट अब EOW को सौंप दी गई है, जिसमें कई अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में कुछ बड़े अफसरों के नाम एफआईआर में जोड़े जा सकते हैं।

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इस बीच राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज हो गई है। कांग्रेस नेता एचएस लकी ने इस घोटाले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि इतने बड़े स्तर की वित्तीय हेराफेरी बिना उच्च अधिकारियों की मिलीभगत के संभव नहीं है। उन्होंने आरोपियों की कॉल डिटेल और डिजिटल कम्युनिकेशन की जांच सार्वजनिक करने की भी मांग की है, ताकि असली मास्टरमाइंड का खुलासा हो सके।

यह मामला अब केवल वित्तीय अनियमितता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा और संभावित गिरफ्तारियों पर सबकी नजर टिकी हुई है।

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