Kashmir Donation Scam: मदद के नाम पर बड़ा खेल, 17.91 करोड़ की ठगी, आतंकी फंडिंग का शक, अलर्ट पर एजेंसियां

श्रीनगर। दक्षिण कश्मीर से सामने आया एक बड़ा क्राउड-फंडिंग स्कैम अब राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों की जांच के दायरे में आ गया है। ईरान के नाम पर मानवीय सहायता जुटाने की आड़ में करोड़ों रुपये और कीमती सामान इकट्ठा किए जाने का खुलासा हुआ है, जिसे लेकर गंभीर सुरक्षा चिंताएं उठ खड़ी हुई हैं।

जांच में सामने आया है कि घाटी में एक संगठित नेटवर्क के जरिए करीब 17.91 करोड़ रुपये नकद, सोना और अन्य कीमती सामान जुटाया गया। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस रकम का कोई स्पष्ट ट्रेल नहीं मिला है, जिससे एजेंसियों को आशंका है कि इसका एक हिस्सा आतंकी गतिविधियों में इस्तेमाल हो सकता है। इस मामले की जांच State Investigation Agency के साथ-साथ National Investigation Agency और Enforcement Directorate जैसी केंद्रीय एजेंसियां भी कर रही हैं।

खुफिया रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के लिए जारी असली मदद अपील को बिचौलियों के एक संगठित नेटवर्क ने हाईजैक कर लिया। इन लोगों ने भावनात्मक और धार्मिक अपील के जरिए खासकर शिया समुदाय को निशाना बनाते हुए करोड़ों रुपये और गहने तक जुटा लिए। कई मामलों में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों ने अपनी जीवनभर की बचत तक दान कर दी।

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जांच में यह भी सामने आया है कि यह नेटवर्क घाटी के लगभग सभी जिलों में सक्रिय था। बडगाम से करीब 9.5 करोड़, बारामूला से 4 करोड़ और श्रीनगर से 2 करोड़ रुपये जुटाए जाने की जानकारी मिली है, जबकि अन्य जिलों से भी बड़ी रकम एकत्र की गई।

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एजेंसियों ने एक ‘कन्विट सिस्टम’ की पहचान की है, जिसमें कुछ स्थानीय और विदेशी लिंक जुड़े होने की आशंका है। प्रारंभिक जांच में ऐसे लोगों के नाम सामने आए हैं, जिनके तार Islamic Revolutionary Guard Corps और अलगाववादी नेटवर्क से जुड़े बताए जा रहे हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस फंड का एक हिस्सा कथित तौर पर घाटी में अलगाववाद को बढ़ावा देने के लिए वापस भेजा जा रहा था, जो इस पूरे मामले को और गंभीर बनाता है।

फिलहाल, एजेंसियां नेटवर्क की गहराई तक पहुंचने और फंड के स्रोत व इस्तेमाल का पता लगाने में जुटी हैं। पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार का दान देने से पहले संबंधित संस्था या व्यक्ति की विश्वसनीयता की जांच जरूर करें, ताकि इस तरह के फर्जी नेटवर्क का शिकार होने से बचा जा सके। यह मामला न सिर्फ एक बड़े वित्तीय घोटाले की ओर इशारा करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे मानवीय भावनाओं का इस्तेमाल कर संगठित तरीके से धोखाधड़ी और संभावित देश विरोधी गतिविधियों को अंजाम दिया जा सकता है।

लेखक के विषय में

मनीशंकर पांडेय Picture

मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।

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