Cyber Fraud News: थामे नहीं थम रहा ‘डिजिटल अरेस्ट’, 2.07 करोड़ की ठगी, हाईकोर्ट ने CBI को सौंपी जांच
चंडीगढ़। देश में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों के बीच एक बड़े ‘डिजिटल अरेस्ट’ फ्रॉड मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने 2.07 करोड़ रुपये की हाई-प्रोफाइल ठगी की जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंपते हुए कहा कि इस तरह के संगठित और बहु-राज्यीय साइबर अपराधों की जांच उन्नत तकनीकी क्षमता वाली एजेंसी द्वारा ही प्रभावी तरीके से की जा सकती है।
यह आदेश जस्टिस जसजीत सिंह बेदी की पीठ ने पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड के सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता सुखमंदर सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि उसे ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर सुनियोजित तरीके से मानसिक दबाव में डालकर करोड़ों रुपये की ठगी का शिकार बनाया गया।
मामले में खुलासा हुआ कि आरोपियों ने खुद को पुलिस, रिजर्व बैंक और अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर भरोसा जीता। इसके बाद राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लगाने की धमकी देकर पीड़ित को डराया गया और कथित जांच के नाम पर उसे वीडियो कॉल के जरिए लगातार निगरानी में रखा गया। इस दौरान फर्जी दस्तावेज और नकली आदेश दिखाकर उसे अलग-अलग खातों में पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि 9 मई से 16 जून 2025 के बीच पीड़ित के पेंशन खाते से आरटीजीएस के जरिए कई ट्रांजेक्शन कर कुल 2.07 करोड़ रुपये विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर कर लिए गए। ठगों ने पूरे ऑपरेशन में फर्जी RBI दस्तावेज और नकली ‘डिजिटल अरेस्ट वारंट’ का इस्तेमाल किया, जिससे मामला और गंभीर हो गया।
अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को जांच सौंपने का आदेश दिया है और कहा है कि इस तरह के साइबर गिरोह देशभर में सक्रिय हैं, जिन्हें पकड़ने के लिए हाई-टेक और समन्वित जांच जरूरी है। यह मामला न केवल साइबर सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करता है, बल्कि आम लोगों के लिए भी चेतावनी है कि वे खुद को सरकारी अधिकारी बताकर आने वाले कॉल, वीडियो वेरिफिकेशन और किसी भी प्रकार के दबाव में आकर पैसे ट्रांसफर करने से पहले पूरी जांच जरूर करें।
