अध्यक्ष जी को बुला कर कार्यक्रम कैंसल, सियासी गलियों में चर्चाएं हज़ार: जब 'भावी प्रत्याशी' भैया ने दिखवा दिया बाहर का रास्ता
जय शंकर पाण्डेय.....
बिलासपुर। राजनीति में 'माननीय' बनने की ललक क्या-क्या न करा दे ! बात हो रही है एक छोटी विधानसभा के अध्यक्ष की, और बड़े विधानसभा की जहाँ इन दिनों सियासी पारा चढ़ा हुआ है। अंदर की खबर है कि किसी कमंडल के अध्यक्ष ने राज्य मंत्री दर्जा प्राप्त अध्यक्ष साहब को एक सार्वजनिक कार्यक्रम का न्योता देकर बड़े अदब से बुलाया । लेकिन, जैसे ही अध्यक्ष महोदय वहां पहुंचे, वो खुद गायब हो गए माहौल कुछ ऐसा बदला कि उन्हें बिन पानी पिए ही वहां से 'भाग खड़ा' होना पड़ा!
अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर ऐसा क्या हो गया? तो जनाब, चर्चाओं के बाजार में खबर गर्म है कि यह पूरा मामला आगामी 2028 के चुनाव और माननीय बनने की होड़ से जुड़ा हुआ है।
क्या है अंदर की बात
सूत्रों की मानें तो हलके में अपनी दावेदारी मजबूत करने के लिए तैयारियाँ अभी से ही जोर-शोर से चल रही हैं। हर कोई अपनी बिसात बिछाने में लगा है। इसी चक्कर में एक 'सदस्य भाभी' जी के प्रतिनिधि भैया ने रंग में भंग डालवा दिया...
जैसे ही अध्यक्ष महोदय कार्यक्रम में पहुंचेगे ऐसा पता चला तो भावी माननीय बनने का सपना देख रहे सदस्य भाभी के प्रतिनिधि का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया। बात इतनी बढ़ गई कि भैया जी ने कमंडल के अध्यक्ष को कड़े निर्देश जारी कर दिए, कमंडल अध्यक्ष बिचारे पावर लेस बात माननी पड़ी और वहाँ से गायब होना पड़ा फिर माननीय छोटी विधानसभा के अध्यक्ष महोदय को वहीं से उल्टे पांव लौटना पड़ा प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो बात 'अध्यक्ष जी भी समझ गए पूरा खेल तो फिर वहां से चलते बने,
घटना के बाद से ही पूरे क्षेत्र में बस एक ही सवाल चर्चाओं में तैर रहा है कि जब कमंडल अध्यक्ष को अध्यक्ष जी को भगाना ही था, तो आखिर कार्यक्रम में बुलाया ही क्यों?
क्या यह अध्यक्ष जी को नीचा दिखाने की सोची-समझी रणनीति थी?
या फिर टिकट की दावेदारी को लेकर गुटबाज़ी अब खुलेआम सड़कों पर आ गई है?
2028 की तैयारी में जुटे 'माननीय बनने के शौकीन' नेताजी भले ही अभी से अपना शक्ति प्रदर्शन कर रहे हों, लेकिन अध्यक्ष महोदय भी कम नहीं हैं! इस बेइज्जती के बाद अध्यक्ष जी ने भी अलग ही तेवर अपना लिए हैं।
अध्यक्ष जी का - सोलो मार्च
कहावत है ना—अकेला चना भी भाड़ फोड़ सकता है, बस इसी तर्ज पर अध्यक्ष महोदय ने भी अब अकेले ही कार्यक्रमों में झंडे गाड़ने शुरू कर दिए हैं। बाकायदा चमचों को फोन कर रहे हैं । वे बिना किसी तामझाम या बुलावे की परवाह किए, अकेले ही हर छोटे-बड़े कार्यक्रम में हाजिरी लगा रहे हैं। मुद्दा जो ठहरा 2028 का,
फिलहाल, छोटी विधानसभा का यह सियासी नाटक चाय की दुकानों से लेकर बड़े-बड़े सियासी दफ्तरों तक चर्चा का विषय बना हुआ है।
