सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम का फैसला: जस्टिस कृष्ण राम मोहपात्रा होंगे छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के नए न्यायाधीश
न्यायिक पृष्ठभूमि वाले परिवार से आते हैं जस्टिस मोहपात्रा, 26 साल का रहा है वकालत का अनुभव
बिलासपुर। भारतीय सर्वोच्च न्यायालय के कॉलेजियम ने देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों की व्यवस्था में नवीन नियुक्तियों और तबादलों की अनुशंसा की है। सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता में छह अगस्त को आयोजित इस कॉलेजियम बैठक में चार जजों को पदोन्नत कर चीफ जस्टिस के पद पर आसीन करने का निर्णय हुआ। इसी क्रम में ओडिशा हाईकोर्ट में पदस्थ दो न्यायाधीशों का स्थानांतरण अन्य राज्यों में करने का प्रस्ताव पारित किया गया। इस तबादला सूची में जस्टिस कृष्ण राम मोहपात्रा का नाम शामिल है, जिन्हें ओडिशा से छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय भेजा जा रहा है।
न्यायिक कामकाज के लिहाज से छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में आगामी दो महीने काफी बदलाव वाले रहेंगे। न्यायालय में मौजूदा समय में मुख्य न्यायाधीश को सम्मिलित करते हुए कुल 13 न्यायाधीश अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इनमें से तीन न्यायाधीशों का कार्यकाल अगले साठ दिनों के भीतर पूर्ण होने जा रहा है। इसी माह यानी अगस्त में जस्टिस संजय एस. अग्रवाल और जस्टिस राधाकिशन अग्रवाल सेवानिवृत्त हो जाएंगे। इसके ठीक बाद, सितंबर महीने में हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा भी अपने पद से रिटायर होंगे। तीन वरिष्ठ न्यायाधीशों की विदाई के मुकाबले कॉलेजियम ने वर्तमान में केवल एक जज को छत्तीसगढ़ भेजने का प्रस्ताव रखा है।
जस्टिस कृष्ण राम मोहपात्रा का न्यायिक सफर
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में पदस्थ होने जा रहे जस्टिस कृष्ण राम मोहपात्रा का जन्म 18 अप्रैल 1965 को हुआ था। वे न्यायिक पृष्ठभूमि वाले परिवार से आते हैं; उनके पिता सरत चंद्र मोहपात्रा भी न्यायाधीश के रूप में कार्य कर चुके हैं। कला स्नातक (बीए) और विधि स्नातक (एलएलबी) की शिक्षा पूर्ण करने के उपरांत, उन्होंने सात फरवरी 1988 को ओडिशा स्टेट बार काउंसिल में अधिवक्ता के रूप में अपना पंजीयन करवाया था।
वकालत के पेशे में उन्हें करीब 26 वर्ष का अनुभव प्राप्त है। इस अवधि में उन्होंने सिविल, सेवा, आपराधिक और संवैधानिक कानूनों के क्षेत्र में कार्य किया। पारिवारिक और बाल संरक्षण कानूनों में उनकी विशेष पकड़ रही है। वे अभिभावक और आश्रित अधिनियम, हिंदू अल्पसंख्यक एवं संरक्षकता अधिनियम, हिंदू दत्तक ग्रहण एवं भरण-पोषण अधिनियम, तथा किशोर न्याय (बालकों की देखभाल संरक्षण) अधिनियम से संबंधित प्रकरणों की पैरवी करते रहे हैं।
सरकारी व संस्थागत प्रतिनिधित्व
जस्टिस मोहपात्रा ने अपने विधिक करियर में राज्य सरकार और विभिन्न शासकीय उपक्रमों का भी प्रतिनिधित्व किया है। उन्होंने ओडिशा राज्य सरकार और ओडिशा लोक सेवा आयोग (OPSC) के लिए अतिरिक्त स्थायी वकील का दायित्व निभाया। बतौर अधिवक्ता उन्होंने सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड क्योंझर, मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अंतर्गत संचालित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (NIOS) नई दिल्ली, नीलाचल इस्पात निगम लिमिटेड और बैंक ऑफ बड़ौदा जैसी प्रमुख संस्थाओं के प्रकरणों में अदालत के समक्ष पक्ष रखा है।
अन्य हाईकोर्ट में पदोन्नति और तबादले
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा चार न्यायाधीशों को मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिशें इस प्रकार हैं:
- दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश वी. कामेश्वर राव को पटना हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाने का प्रस्ताव।
- बॉम्बे हाईकोर्ट में पदस्थ जस्टिस रविंद्र वी. घुगे को कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस का पदभार सौंपने की अनुशंसा।
- इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी को बॉम्बे हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाने की सिफारिश।
- पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा को उसी न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश के पद पर नियुक्त करने का निर्णय।
- इसके अतिरिक्त, ओडिशा हाईकोर्ट के एक अन्य न्यायाधीश जस्टिस मानस रंजन पाठक का तबादला गुजरात हाईकोर्ट करने की सिफारिश भी कॉलेजियम द्वारा की गई है।
