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North Korea Missile Alert: किम जोंग उन का ‘सुपर पावर’ टेस्ट, ICBM से पूरे अमेरिका को दी सीधी चुनौती
नई दिल्ली। उत्तर कोरिया ने एक बार फिर अपनी सैन्य ताकत का ऐसा प्रदर्शन किया है, जिसने वैश्विक सुरक्षा को लेकर चिंताओं को और गहरा कर दिया है। तानाशाह किम जोंग उन ने ‘सुपर पावर’ मिसाइल इंजन के सफल परीक्षण का दावा करते हुए साफ संकेत दिया है कि अब उत्तर कोरिया की मारक क्षमता पहले से कहीं ज्यादा बढ़ चुकी है। उनके बयान के मुताबिक, अब देश की इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल यानी ICBM इतनी सक्षम हो चुकी हैं कि पूरा अमेरिकी मुख्य भूभाग उनकी जद में आ गया है।
उत्तर कोरियाई सरकारी मीडिया के अनुसार यह परीक्षण सोहे सैटेलाइट लॉन्चिंग ग्राउंड पर किया गया, जहां नए सॉलिड फ्यूल इंजन का सफल परीक्षण हुआ। इस तकनीक को आधुनिक मिसाइल सिस्टम के लिए बेहद अहम माना जाता है, क्योंकि इससे मिसाइल को तेजी से लॉन्च करने, लंबे समय तक स्टोर करने और दुश्मन की निगरानी से बचाने में मदद मिलती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस इंजन का इस्तेमाल ह्वासोंग-18 जैसी उन्नत मिसाइलों में किया जा सकता है, जो लंबी दूरी तक सटीक हमला करने में सक्षम हैं और आधुनिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम को भी चुनौती दे सकती हैं।
परीक्षण के दौरान खुद किम जोंग उन की मौजूदगी इस बात का संकेत देती है कि यह सिर्फ तकनीकी सफलता नहीं बल्कि रणनीतिक संदेश भी है। उन्होंने इस उपलब्धि को ‘साम्राज्यवादी ताकतों’ के खिलाफ बड़ी जीत बताते हुए कहा कि उत्तर कोरिया अब किसी भी तरह के बाहरी दबाव का जवाब देने में पूरी तरह सक्षम है। उनके इस बयान को सीधे तौर पर अमेरिका की नीतियों और सैन्य गतिविधियों के खिलाफ चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।
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इस घटनाक्रम के बाद अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान जैसे देशों में चिंता का स्तर बढ़ गया है। पेंटागन ने इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बताते हुए अपने इंडो-पैसिफिक बेस पर निगरानी और सतर्कता बढ़ा दी है। वहीं जापान ने इस परीक्षण को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सीधा खतरा करार देते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाने की मांग की है।
गौर करने वाली बात यह है कि यह परीक्षण ऐसे समय में किया गया है जब दुनिया पहले से ही कई बड़े भू-राजनीतिक तनावों से गुजर रही है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते टकराव और वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव के बीच उत्तर कोरिया का यह कदम रणनीतिक दबाव बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि किम जोंग उन ने अंतरराष्ट्रीय हालात का फायदा उठाते हुए अपनी ताकत दिखाने का यह समय चुना है, ताकि वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति और मजबूत की जा सके।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर परमाणु हथियारों और मिसाइल टेक्नोलॉजी को लेकर दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। सवाल यह है कि क्या यह केवल ताकत का प्रदर्शन है या आने वाले समय में किसी बड़े टकराव की चेतावनी। फिलहाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें उत्तर कोरिया की अगली चाल पर टिकी हुई हैं, क्योंकि यह स्थिति वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए बेहद संवेदनशील मानी जा रही है।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
