छत्तीसगढ़ में गाय और गौठान की हकीकत से कलेक्टर को रूबरू कराने आवेदन लिखने वाली महिलाकर्मी को दण्ड,खतरे में उसकी नौकरी,ऐसे फरमानो से ईमानदार कर्मियों का हाल-बेहाल,पत्र की भाषा और खरी-खरी से बिफरा जिला प्रशासन

छत्तीसगढ़ में गाय और गौठान की हकीकत से कलेक्टर को रूबरू कराने आवेदन लिखने वाली महिलाकर्मी को दण्ड,खतरे में उसकी नौकरी,ऐसे फरमानो से ईमानदार कर्मियों का हाल-बेहाल,पत्र की भाषा और खरी-खरी से बिफरा जिला प्रशासन

छत्तीसगढ़ में गाय और गौठान की हकीकत से कलेक्टर को रूबरू कराने आवेदन लिखने वाली महिलाकर्मी को दण्ड,खतरे में उसकी नौकरी,ऐसे फरमानो से ईमानदार कर्मियों का हाल-बेहाल,पत्र की भाषा और खरी-खरी से बिफरा जिला प्रशासन कोरबा / रायपुर : छत्तीसगढ़ में गौठान योजना की तुलना कई लोग बिहार के चारा घोटाले से करते है। इसकी […]

छत्तीसगढ़ में गाय और गौठान की हकीकत से कलेक्टर को रूबरू कराने आवेदन लिखने वाली महिलाकर्मी को दण्ड,खतरे में उसकी नौकरी,ऐसे फरमानो से ईमानदार कर्मियों का हाल-बेहाल,पत्र की भाषा और खरी-खरी से बिफरा जिला प्रशासन


कोरबा / रायपुर : छत्तीसगढ़ में गौठान योजना की तुलना कई लोग बिहार के चारा घोटाले से करते है। इसकी हकीकत से एक महिला कर्मी ने कलेक्टर को अवगत कराया। उधर पत्र की भाषा और शब्दावली को लेकर प्रशासन बिफर गया। उसने पत्र लिखने वाली महिला कर्मी पर अनुशासन का डंडा चलाया है। कारण बताओ नोटिस जारी कर प्रशासन ने इस महिला कर्मी को सरकारी आचार संहिता का पाठ पढ़ाया है।

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उधर हकीकत बयां करना इतना महंगा पड़ जाएगा,पीड़ित महिला कर्मी ने सोचा ना था। अब वो चिंता में है। उसकी नौकरी खतरे में है। जबकि शासन की आंख खोलने वाले इस मामले में प्रशासन ने महिला कर्मी के पत्र में दर्ज तमाम तथ्यों को आधारहीन बताते हुए सिरे से ख़ारिज कर दिया है।

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छत्तीसगढ़ में पशुधन बचाने और ग्रामीणों की आजीविका के लिए आर्थिक रूप से मजबूती देने वाली “गौठान” योजना आखिर क्योँ ठीक ढंग से लागू नहीं हो रही है ? गौठान क्यों बदहाल है ? कमी क्या है ? जब सरकार गौठानों के रख-रखाव के लिए करोड़ों रुपए खर्च करने का दावा कर रही है। गौठानों की स्थिति और योजना में भ्रष्टाचार के मामले के आम होने के बावजूद आरोपियों के खिलाफ ना तो मामला दर्ज होने,और ना ही सरकारी धन की वसूली होने से उन लोगों की पौ बारह है जिनके कंधो पर गौठानों की खुशहाली का भार है। इस सरकारी पत्र में गौठानों की हालत और योजना की हकीकत दोनों दर्ज है।

यह पत्र एक सरकारी मुलाजिम ने कोरबा कलेक्टर को योजना की हकीकत से रूबरू कराने के लिए लिखा गया था। बताते है कि कुछ वरिष्ठ अफसरों ने इलाके की कनिष्ठ महिलाकर्मी को गौठानों की हकीकत से रूबरू कराने के निर्देश दिए थे। उसके तहत पीड़ित महिलाकर्मी ने कलेक्टर कोरबा को गोकुल नगर गौठान योजना की असलियत से वाकिफ कराने के लिए यह पत्र लिखा था। बताते है कि कलेक्टर दफ्तर में इस पत्र के संज्ञान में आते ही खलबली मच गई।

महिला कर्मी के पत्र में हर उस कठिनाई का जिक्र किया गया था,जिसके चलते ग्रामीणों को इस योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा था। उधर इस पत्र पर रचनात्मक कदम उठाने,योजना में उत्पन्न कठिनाई दूर करने और दोषियों को जवाब-तलब करने के बजाए अधिकारियों ने उस महिला कर्मी के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया जो प्रशासन को हकीकत से रूबरू करा रही थी। देंखे यह पत्र, इस पत्र में योजना की खामियों को उजागर करना इस महिला कर्मी पर कितना भारी पड़ा।

कोरबा के अतरिक्त कलेक्टर ने कारण बताओ नोटिस में जिसे आपत्तिजनक और आपराधिक आचरण के दायरे में बताया है,वह कारण गौरतलब है। इन दिनों गौठानों की हालत वाकई चिंताजनक बताई जा रही है। महिला कर्मी के पत्र में दर्ज गोकुल नगर की ऐसी हालत सिर्फ कोरबा की नहीं बल्कि प्रदेश के कई जिलों की है। अमूमन वहां कलेक्टर अलग है,लेकिन गाय और गौठान दोनों की हालत काफी नाजुक बताई जाती है। प्रदेश में यह पहला मौका है, जब राजनेताओ की अंधभक्ति में लीन कई अफसर भ्रष्टाचार से जुड़े मामलो को रफा-दफा करने के लिए तमाम हदें पार कर रहे है।

गौठानों की हकीकत पर पर्दा डालने के लिए कनिष्ठ कर्मियों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि यह मामला उस संस्थान से भी जुड़ा है, जहाँ प्रदेश के सबसे बड़े 36 हजार करोड़ के नान घोटाले की नीव रखी गई थी। फिलहाल सरकारी योजनाओ की हकीकत से शासन को रूबरू करा रही यह पीड़ित महिला कर्मी अपनी नौकरी गवाने का अंदेशा जाहिर कर रही है। वही कई कर्मी इस मामले को देखकर योजनाओ की हकीकत से मुँह मोड़ रहे है। जाहिर है दोनों ही स्थितियों में नुक्सान उस आबादी का है,जिसके कल्याण के लिए गौठान योजना लागु की गई थी

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